छात्रों ने पूछे ऐसे सवाल, चुप हो गए सीबीआई के अफसर
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शिमला के पोर्टमोर स्कूल में एक कार्यक्रम के तहत छात्राओं को सीबीआई की कार्यप्रणाली समझाई गई। कार्यक्रम में छात्राओं ने एक के बाद एक कई तीखे सवाल भी अधिकारियों से किए। सीबीआई के डीएसपी एमके पुरी ने जैसे ही छात्रों ने सवाल करने को बोला तो दनादन एक के बाद एक छात्रों ने सवाल कर अपनी शंकाएं दूर की। छोटा शिमला स्कूल के राहुल ने सवाल किया कि सीबीआई पर जांच के दौरान राजनैतिक दबाव होता है क्या?
इस पर जवाब मिला कि सीबीआई शक्ल और स्टेटस देख कर मामले दर्ज नहीं करती। अपराध के आधार पर तथ्य जुटा आगे बढ़ती है। मेरी तीस साल की नौकरी में मैंने ऐसा कोई दबाव महसूस नहीं किया। छोटा शिमला स्कूल की बिंदुबाला ने सवाल किया कि सीबीआई की जांच धीमी क्यों होती है? इस पर जवाब मिला कि सीबीआई की जांच गहराई से होती है।
जब तक जांच अधिकारी संतुष्ट नहीं होता, तब तक आगे नहीं बढ़ते, जांच साइंटिफिक होती है। शीतल ने सवाल किया कि सीबीआई प्रदेशों की पुलिस के साथ कैसे काम करती है। अधिकारी ने कहा कि यह व्यवस्था बनी है कि सीबीआई का पुलिस सहयोग करे।
सीबीआई पर केंद्र सरकार का दबाव होता है क्या?
शिवानी ने सवाल किया कि सीबीआई क्या करती है। इस पर बताया गया कि सीबीआई भ्रष्टाचार और हत्या के मामलों में देश-विदेश कहीं भी जांच कर सकती है। सीबीआई इंटरपोल की नोडल एजेंसी के रूप में भी कार्य करती है। अमिता शर्मा ने सवाल किया कि क्रिकेट में भ्रष्टाचार मामले की जांच सीबीआई करती है। जवाब मिला कि यह निर्भर करता है, मामला सौंपे जाने या शिकायत आने पर। कार्य क्षेत्र का जांच प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रोल होता है।
डा. संजोग भूषण शिक्षक ने सवाल किया कि सीबीआई पर केंद्र सरकार का दबाव होता है क्या? जवाब मिला कि केंद्र सरकार से मामलों की जांच आगे बढ़ाने को अनुमति लेनी होती है, इसका मतलब यह नहीं कि उसका असर जांच पर पड़ता है, विपक्षी दलों के आरोप लगते हैं, सबको आरोप लगाने, अपनी बात रखने का हक है। जांच तथ्यों पर ही आगे बढ़ती है।
सुमेधा ने सीबीआई अधिकारी से आरुषि मर्डर केस के बारे में सवाल किया। इस पर अधिकारी ने कहा कि मामले में दोषी पाए लोगों को सजा हो चुकी है। एक छात्र ने काला धन वापस लाने, सीबीआई में भर्ती होने की प्रक्रिया से संबंधित सवाल किए। उन्हें भी इसके संतोषजनक जवाब मिले।
बताई सीबीआई की कार्यप्रणाली
इससे पहले बच्चों को सीबीआई की कार्यप्रणाली समझाई गई। सीबीआई आफिसरों ने बताया कि सीबीआई कैसे देश और विदेशों तक भ्रष्टाचार, हत्या जैसे बड़े मामलों की जांच को अंजाम तक पहुंचाती है। सीबीआई की शिमला ब्रांच के डीएसपी एमके पुरी और उनके सहयोगी एनके ठाकुर ने पोर्टमोर और छोटा शिमला वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के आए सैकड़ों बच्चों को कार्यप्रणाली बारे बताया।
उन्होंने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के समय हथियारों की खरीद में घोटाले की जांच के लिए स्पेशल पुलिस एन्फोरस्मेंट विंग बना, उसके बाद इसके अच्छे कार्यों को देखते हुए इसे भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए और मजबूत किया गया। एक अप्रैल 1963 में इसका नाम बदलकर सीबीआई रखा गया।
उन्होंने छात्रों को बताया कि देश भर में सीबीआई के छह जोनल और 60 शाखा कार्यालय है, जिसमें हिमाचल में 2009 में ब्रांच कार्यालय खोला गया। स्कूल की प्रधानाचार्य नीशा भलूनी ने सीबीआई के अधिकारियों का जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर आभार जताया।
सेंट्रल विजिलेंस कमीशन का होता है सीबीआई पर पूरा नियंत्रण
उन्होंने बताया कि सीबीआई भी पुलिस की तरह से आईपीसी और सीआरपीसी भारतीय कानूनों के तहत जांच का कार्य करती है। सीबीआई केंद्र सरकार के कार्यालयों, पब्लिक सेक्टर अंडटेकिंग सहित राष्ट्रीयकृत बैंकों आदि में भ्रष्टाचार रोकने के लिए कार्य करती है, इसके अलावा केंद्र और प्रदेश सरकार के जांच को भेजे जाने वाले जटिल मामलों की जांच भी करती हैं।
वह व्यक्ति विशेष की जांच भी करती है। सेंट्रल विजिलेंस कमीशन का सीबीआई पर पूरा नियंत्रण होता है। सीबीआई में अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया से लेकर उनके कार्य करने के तरीकों पर विस्तार से जानकारी देने के साथ ही बताया कि सीबीआई के जांच मामले सुलझाने की औसत दर 70 फीसदी से अधिक है।
आज देश में हर व्यक्ति, विशेष तौर पर युवाओं को भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र बनाने में सीबीआई का सहयोग करना होगा। ऐसा करने पर ही भ्रष्टाचार पर विश्व स्तर पर किए सर्वे में 85वें नंबर पर रहे भारत को पूरी तरह से भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जा सकेगा। संजोग भूषण ने छात्रों को भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र बनाने के लिए रिश्वत न लेने और देने की शपथ लेने का आवाहन किया। कार्यक्रम में सीबीआई अधिकारी एनआर वर्मा आदि भी शामिल हुए।