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Shimla News: तहबाजारियों ने कैंडल मार्च निकाल चार साथियों को दी श्रद्धांजलि
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सरकार से उठाई मांग, बाजार में नहीं बिठा सकते तो रोजी कमाने को दें जगह
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में नगर निगम के न्यायालय के आदेशों पर बाजार की सड़कों से तहबाजारियों को हटाने का ढाई माह से अभियान जारी है। इसके विरोध में तहबाजारियों ने अपना आंदोलन जारी रखा है। तहबाजारी यूनियन के प्रधान पवन शर्मा की अगुवाई में शुक्रवार को तहबाजारियों ने कैंडल मार्च निकाला। आर्थिक तंगी, गरीबी और रोजी-रोटी पर आए संकट के चलते जान गंवाने वाले चार तहबाजारियों को श्रद्धांजलि दी।
पवन शर्मा ने कहा कि ढाई माह से तहबाजारी बिना कमाई के रोजी-रोटी और एक-एक पैसे के लिए तरस रहे हैं। अपने परिवार का पेट पालने, दो बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाने के लिए कमाई न होने से तनाव में चल रहे चार तहबाजारियों की ढाई माह के दौरान मौत हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि इनमें एक तहबाजारी चमन की मौत आईजीएमसी के पास तहबाजारियों का सामान जब्त करने आई टीम के डर से खाई में गिरने से हुई थी। वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के परिवार में अकेला कमाने वाला था। वहीं लक्कड़ बाजार में मनोज कुलचे वाले की भी कमाई न होने की चिंता और बीमारी के कारण मौत हो गई। उसके परिवार में तीन बेटियां, एक बेटा और पत्नी है। उन्होंने कहा कि लोअर बाजार में 70 साल से तहबाजारी हरदेश शर्मा नामक व्यक्ति की भी मृत्यु हो गई। उनकी 95 वर्षीय माता बीमार हैं और उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। बीती रात एक और तहबाजारी की मौत हो गई। पवन शर्मा ने सरकार से मांग उठाई कि गरीबों के बारे में भी सोचा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार क्या सिर्फ अमीरों के लिए शहर बसा रही है? कहा कि चुनाव के समय तहबाजारियों ने नेताओं को पूरा समर्थन दिया, लेकिन कुर्सी मिलने के बाद गरीबों की रोजी-रोटी पर आए संकट के समय कोई उनका साथ नहीं दे रहा है। कहा कि यदि बाजार में उन्हें रोजी कमाने के लिए जगह नहीं दी जा सकती तो कम से कम कहीं बैठने की जगह दी जाए, जहां वे अपना रोजगार चला सकें। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के नेताओं का दरवाजा खटखटा चुके हैं, लेकिन कोई सुनने और मदद करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि शिमला शहरी विधायक को चुनाव के समय ढाई सौ तहबाजारियों ने पूरा समर्थन दिया था, लेकिन आज विधायक और नेता उनकी बात तक सुनने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नेता यह न भूलें कि फिर चुनाव आएंगे।
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कहा कि लड़ाई लड़ने के लिए आमरण अनशन भी करेंगे। तहबाजारियों ने उपायुक्त कार्यालय से लेकर लोअर बाजार होते हुए शेरे पंजाब तक कैंडल मार्च निकाला और अपने साथियों को श्रद्धांजलि दी। मार्च में तहबाजारी यूनियन के उप प्रधान ओम प्रकाश सहित अन्य तहबाजारी शामिल हुए।
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में नगर निगम के न्यायालय के आदेशों पर बाजार की सड़कों से तहबाजारियों को हटाने का ढाई माह से अभियान जारी है। इसके विरोध में तहबाजारियों ने अपना आंदोलन जारी रखा है। तहबाजारी यूनियन के प्रधान पवन शर्मा की अगुवाई में शुक्रवार को तहबाजारियों ने कैंडल मार्च निकाला। आर्थिक तंगी, गरीबी और रोजी-रोटी पर आए संकट के चलते जान गंवाने वाले चार तहबाजारियों को श्रद्धांजलि दी।
पवन शर्मा ने कहा कि ढाई माह से तहबाजारी बिना कमाई के रोजी-रोटी और एक-एक पैसे के लिए तरस रहे हैं। अपने परिवार का पेट पालने, दो बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाने के लिए कमाई न होने से तनाव में चल रहे चार तहबाजारियों की ढाई माह के दौरान मौत हो चुकी है।
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उन्होंने बताया कि इनमें एक तहबाजारी चमन की मौत आईजीएमसी के पास तहबाजारियों का सामान जब्त करने आई टीम के डर से खाई में गिरने से हुई थी। वह अपनी पत्नी और दो बच्चों के परिवार में अकेला कमाने वाला था। वहीं लक्कड़ बाजार में मनोज कुलचे वाले की भी कमाई न होने की चिंता और बीमारी के कारण मौत हो गई। उसके परिवार में तीन बेटियां, एक बेटा और पत्नी है। उन्होंने कहा कि लोअर बाजार में 70 साल से तहबाजारी हरदेश शर्मा नामक व्यक्ति की भी मृत्यु हो गई। उनकी 95 वर्षीय माता बीमार हैं और उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। बीती रात एक और तहबाजारी की मौत हो गई। पवन शर्मा ने सरकार से मांग उठाई कि गरीबों के बारे में भी सोचा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार क्या सिर्फ अमीरों के लिए शहर बसा रही है? कहा कि चुनाव के समय तहबाजारियों ने नेताओं को पूरा समर्थन दिया, लेकिन कुर्सी मिलने के बाद गरीबों की रोजी-रोटी पर आए संकट के समय कोई उनका साथ नहीं दे रहा है। कहा कि यदि बाजार में उन्हें रोजी कमाने के लिए जगह नहीं दी जा सकती तो कम से कम कहीं बैठने की जगह दी जाए, जहां वे अपना रोजगार चला सकें। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के नेताओं का दरवाजा खटखटा चुके हैं, लेकिन कोई सुनने और मदद करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि शिमला शहरी विधायक को चुनाव के समय ढाई सौ तहबाजारियों ने पूरा समर्थन दिया था, लेकिन आज विधायक और नेता उनकी बात तक सुनने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नेता यह न भूलें कि फिर चुनाव आएंगे।
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कहा कि लड़ाई लड़ने के लिए आमरण अनशन भी करेंगे। तहबाजारियों ने उपायुक्त कार्यालय से लेकर लोअर बाजार होते हुए शेरे पंजाब तक कैंडल मार्च निकाला और अपने साथियों को श्रद्धांजलि दी। मार्च में तहबाजारी यूनियन के उप प्रधान ओम प्रकाश सहित अन्य तहबाजारी शामिल हुए।