फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   cancer patient increased in shimla

धूम्रपान से प्रदेश में बढ़ रहे कैंसर के मरीज

Sat, 06 Nov 2021 11:36 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 06 Nov 2021 11:36 PM IST
विज्ञापन
cancer patient increased in shimla
आईजीएमसी के कैंसर अस्पताल में हर साल आ रहे दो सौ से अधिक नए कैंसर रोगी
विज्ञापन

क्रॉसर
कैंसर रोगियों में अधिकतर धूम्रपान करने वाले
राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस पर विशेष
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अस्पतालों में कैंसर रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आईजीएमसी स्थित कैंसर अस्पताल में हर साल 2 सौ से 250 नए कैंसर रोगी आ रहे हैं। इनमें फेफड़े के कैंसर के मरीज अधिक हैं। इसमें से अधिकतर वह लोग हैं जो धूम्रपान करते हैं।
आईजीएमसी के रेडियोथैरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष गुप्ता ने बताया कि अगर धूम्रपान बंद हो जाए तो 33 फीसदी लोग कैंसर की बीमारी से बच जाएंगे। देशभर में सात नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जा रहा है। इस दौरान चिकित्सकों द्वारा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ने और शुरुआती चरण में कैंसर का पता लगाने की आवश्यकता पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। डॉक्टराें का कहना है कि बीमारी के लक्षण दिखने के तुरंत बाद उपचार शुरू होने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि धूम्रपान और तंबाकू का सेवन छोड़कर दूध का सेवन करें। हरी सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें। कहा कि धूम्रपान छोड़ने का सबसे अच्छा तरीका है सुबह की सैर करें। खुद को व्यस्त रखें ताकि धूम्रपान की तरफ आपका ध्यान न जाएं।
विज्ञापन

खांसी के साथ आए खून हो जाएं सतर्क
रेडियोथैरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष गुप्ता ने बताया कि स्मोकिंग के कारण अधिकांश लोगों को फेफड़े का कैंसर होता है। खांसी, सांस फूलना और खांसी के दौरान खून आए तो तुरंत अस्पताल में आकर चेकअप करवाना चाहिए। यह लक्षण कैंसर के हो सकते हैं। कई मरीज स्मोकिंग की वजह से खांसी होने पर अधिक ध्यान नहीं देते। इससे बीमारी का समय पर पता नहीं चल पाता है। बताया कि मरीजों को एक्सरे करवाना चाहिए जिससे बीमारी का पता चल जाता है। विभागाध्यक्ष ने बताया कि जल्दी उपचार मिलने से 80 फीसदी मरीज ठीक हो सकते हैं। देरी से बीमारी का पता लगने पर बीस फीसदी मरीज ही बच पाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

दो सालों में बढ़ गए सैकड़ों मरीज
कैंसर अस्पताल में साल 2015 में 2200 मरीज आए थे। लेकिन पिछले दो सालों में यह आंकड़ा तीन हजार सालाना पहुंच गया है। चिकित्सकों का कहना है कि इसके पीछे वजह यह भी है कि प्रदेश के अन्य जिलों में मेडिकल कॉलेज खुलने से जागरूकता बढ़ी है और लोग इस बीमारी के उपचार के लिए अस्पताल आ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed