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Bilaspur Firing Incident: बंबर ठाकुर गोलीकांड मामले में अब तक पांच गिरफ्तार, सौरभ और कुलदीप हिरासत में

Tue, 25 Mar 2025 08:24 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Published by: Krishan Singh Updated Tue, 25 Mar 2025 08:24 PM IST
सार

गोलीकांड में पुलिस की एसआईटी ने दो और गिरफ्तारियां की हैं। आरोपियों की पहचान सौरभ पटियाल उर्फ फांदी और कुलदीप उर्फ शिशु के रूप में हुई है।

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Bilaspur Firing Incident:  Two more accused arrested in Bamber Thakur firing case, seven arrests made so far
बिलासपुर गोलीकांड। - फोटो : संवाद

विस्तार

पूर्व विधायक बंबर ठाकुर गोलीकांड मामले में पुलिस ने रोहतक के कुलदीप उर्फ शिशु और सौरभ पटियाल उर्फ फांदी को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि एसआईटी ने दोनों को हरियाणा के रोहतक से ही पकड़ा है। दोनों को बिलासपुर पहुंचा दिया है, अभी तक पुलिस ने दोनों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है। इसके अलावा दो शूटर पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

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एसपी बिलासपुर ने जानकारी दी कि गोलीकांड मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पहले से ही चार आरोपी मनजीत नड्डा, रितेश शर्मा, रोहित राणा और सागर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। पुलिस ने 24 मार्च को अजय कुमार (24) पुत्र प्रेम सिंह, निवासी गांव गोयला कलां, तहसील बादली, जिला झज्जर (हरियाणा) को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 7 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश जारी किए गए। सूत्रों के अनुसार मामले में गठित एसआईटी टीम ने दो और आरोपियों सौरभ पटियाल और कुलदीप को भी हिरासत में लिया है। दोनों को बिलासपुर लाया गया है। कुलदीप उर्फ शिशु जनवरी से घुमारवीं थाना में दर्ज हुए आर्म्स एक्ट के मामले में फरार चल रहा था। आरोपी कुलदीप हरियाणा के रोहतक का ही है। घुमारवीं पुलिस ने 8 जनवरी को मामला दर्ज किया था कि घुमारवीं के जाहड़ी जंगल में कुछ युवक गोली चलाने का अभ्यास कर रहे हैं।

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वहीं जब मामले की जांच की गई तो पुलिस को जाहड़ी जंगल से दो भरे तो नौ खाली रौंद मिले थे। इसके बाद घुमारवीं के दो युवकों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान एक युवक ने बताया था कि उसका घुमारवीं का ही साथी और हरियाणा के रोहतक का कुलदीप घुमारवीं के पास जाहड़ी में फायर करने का अभ्यास करते थे। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तार दो आरोपियों को अदालत में पेश किया था। वहां से चार दिन के रिमांड के बाद उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई थी। लेकिन पुलिस मामले के तीसरे आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी, जो रोहतक का कुलदीप था। वहीं अब उसे पुलिस ने हिरासत में लिया है।

जाहड़ी जंगल में गोलियां चलाने का अभ्यास करने के मामले के सामने आने के बाद ही बंबर ठाकुर ने प्रेस वार्ता कर चिंता जताई थी कि उन पर जानलेवा हमला करने की तैयारी हो रही है। उन्होंने उस दौरान सौरभ पटियाल उर्फ फांदी का नाम लेकर उन पर गंभीर आरोप भी लगाए थे। लेकिन पुलिस की गिरफ्तारी के बाद सौरभ को कोर्ट से जमानत मिल गई थी। अब इस गोलीकांड के होने के बाद फांदी का नाम सीधे तौर पर इस मामले से जुड़ गया है। इसके चलते पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है। अब तक इस मामले में पुलिस ने जहां पांच को गिरफ्तार किया है, वहीं दो को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।

जब तक सरकार आपराधिक तत्वों को संरक्षण देती रहेगी, ऐसा होता रहेगा : जमवाल
सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल ने विधानसभा सत्र में कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि वन, खनन, भूमि व ड्रग्स जैसे माफिया के बाद हिमाचल में अब सुपारी माफिया ने भी पांव पसार लिए हैं। बिलासपुर में पिछले एक वर्ष के दौरान हुई मारपीट, गोलीकांड की घटनाओं को लेकर पूर्व विधायक बंबर ठाकुर पर भी जमकर निशाने साधे। कहा कि ऐसी घटनाएं बार-बार एक ही व्यक्ति के इर्द-गिर्द होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जब तक सरकार आपराधिक तत्वों को संरक्षण देती रहेगी, ऐसा ही होता रहेगा।
बेहतर होगा कि अपना-पराया देखकर कदम उठाने के बजाय सरकार समय रहते सख्त कार्रवाई करे।

ऐसा नहीं हुआ तो वार-पलटवार का यह खेल इसी तरह चलता रहेगा। इससे आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में रहेगी। जमवाल ने कहा कि 14 मार्च को होली पर्व पर बिलासपुर में दिनदहाड़े गोलियां चलीं। इसमें पूर्व विधायक बंबर ठाकुर घायल हुए। यह घटना बेहद निंदनीय व दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पर गंभीर चिंतन की जरूरत है। पिछले साल फरवरी माह में बिलासपुर में रेलवे कंपनी के कार्यालय में झगड़ा हुआ था। यह झगड़ा सुबह उस समय हुआ, जब रेत-बजरी के ट्रक पहुंचते हैं। उनसे 4-5 हजार रुपये कमीशन वसूला जाता रहा है। इसी बात को लेकर दो पक्षों में झगड़ा हुआ और नौबत मारपीट तक पहुंच गई।

हैरानी इस बात की है कि झगड़ा शुरू करने वाले पूर्व विधायक के बजाय केवल दूसरे पक्ष के लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद कोर्ट परिसर के बाहर दिनदहाड़े गोलियां चलीं। इसके लिए सुपारी देकर बाहर से शूटर बुलाया गया था। शूटर की पूर्व विधायक और उनके बेटे से कई बार बात हुई। यहां तक कि उसके रहने की व्यवस्था भी उन्हीं ने की थी। त्कहा कि बिलासपुर में कोर्ट परिसर के पास हुआ गोलीकांड का मामला मुख्यमंत्री ने 24 अक्तूबर को सीबीआई को रेफर किया। सीबीआई ने दो क्लेरीफिकेशन मांगी, लेकिन कुछ अधिकारी उस फाइल को दबाकर बैठ गए। सवाल यह है कि अधिकारियों की इसमें क्या रुचि है। वे किसे बचाना चाहते हैं। यहां तक कि सत्ता पक्ष के कई लोगों ने भी मुख्यमंत्री पर दबाव बनाया कि इस मामले में पूर्व विधायक का नाम नहीं आना चाहिए। यह वही पूर्व विधायक हैं, जिनके खिलाफ लगभग 30 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने गोलीकांड के दोनों मामलों की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग करते हुए कहा कि इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
 
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