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कैबिनेट: आचार संहिता से पहले कर्मचारियों, उद्योगों सहित किसानों के लिए बड़े फैसले

Thu, 05 Oct 2017 01:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 05 Oct 2017 01:14 PM IST
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big decision of himachal cabinet meeting held in shimla

हिमाचल में विस चुनाव के ल‌िए आदर्श आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले वीरभद्र स‌िंह सरकार ने कर्मचारियों, उद्योगों और सड़क निर्माण को लेकर कई बड़े निर्णय लिए है। बुधवार को सीएम वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में  शिमला जिला के नेरवा तथा समरकोट में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोलने की मंजूरी दी है। 

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किन्नौर जिले के कल्पा तहसील के बारंग में पटवारी के पद सहित पटवार वृत्त सृजित करने हो हरीझंडी मिली है। साथ ही रोहडू तहसील के कुटाड़ा में लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह निर्माण और सिरमौर जिला के संगड़ाह में उपमंडलीय पुलिस कार्यालय खोला जाएगा। 
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इसी तरह रोहडू तहसील के खदराला में पुलिस चौकी खोलने तथा देवता साहिब लक्ष्मी नारायण नोगली मेला को जिला स्तरीय मेला घोषित करने को मंजूरी प्रदान की।  मंत्रिमंडल ने सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में वर्क इंस्पेक्टरों को अतिरिक्त पदोन्नति कोटा उपलब्ध करवाने के लिए भर्ती तथा पदोन्नति नियमों में संशोधन करने की स्वीकृति प्रदान की।

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अब मनरेगा के तहत गांव में बनेगी सड़कें

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हिमाचल में मनरेगा के तहत नई सड़कों का भी निर्माण होगा। प्रदेश सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क रिपेयर के नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। अब नियमों में रिपेयर के साथ निर्माण को भी जोड़ा गया है।

कैबिनेट ने फैसला लिया  कि इस योजना के तहत गांव में सड़क बनाने के लिए जनसंख्या को ही नहीं बल्कि आॅन डिमांड पर भी पैसा उपलब्ध कराया जाएगा। इसकी शक्तियां जिला उपायुक्त को दी जाएगी। 

इस योजना का लाभ लेने के लिए पंचायतों को पहले ग्राम सभाओं से प्रस्ताव पारित करना होगा। इसके बाद इसे मनरेगा में शामिल किया जाएगा। अभी पंचायतों में जो भी सेल्फ डाली जाती थी, वह सड़क की रिपेयर करने के हिसाब से डालनी पड़ती थी। इससे विकास कार्यों में दिक्‍कतें आ रही थी। इसको दूर करने के लिए मामले को कैबिनेट की बैठक में लाया गया।

पंचायत चौकीदारों का एक हजार बढ़ा मानदेय 

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प्रदेश सरकार ने पंचायत चौकीदार के मानदेय में 1000 रुपये की बढ़ोतरी की है। पहले चौकीदारों को 3000 रुपये मानदेय मिलता था, अब अगले माह से इन्हें  4000 रुपये दिए जाएंगे। बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

हिमाचल में 3226 पंचायतें हैं। सभी पंचायतों में चौकीदारों की तैनाती की गई है। ग्राम सभा के दौरान इन चौकीदारों से चपरासी का काम तक लिया जाता है। चौकीदार यूनियन ने अपनी मांग को लेकर सचिवालय का भी घेराव किया था।

इस दौरान सरकार की ओर से उनका मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था। अब इसे स्वीकृति दी गई है। गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार जब सत्ता में आई थी, उस दौरान इन चौकीदारों का मानदेय 1700 रुपये था, इसके बाद सरकार ने इसे बढ़ाकर 3000 रुपये किया था। अब इसे बढ़ाकर 4000 रुपये किया गया है।

एक हजार करोड़ से उभरेंगे बीमार उद्योग

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सरकार ने बीमार उद्योगों को राहत देने के लिए नई नीति पर मुहर लगा दी है। बीमार उद्योगों को टैक्स सहित बिजली दरों आदि में छूट देने में सरकार के खजाने पर लगभग एक हजार करोड़ का भार पड़ेगा। दस साल तक बीमार उद्योगों को छूट रहेगी।

हालांकि मंत्रिमंडल की तीन सदस्य उपसीमिति की रिपोर्ट में लगभग 2900 करोड़ रुपये की राहत उद्योगों को देने की सिफारिश की गई थी। विभागीय अधिकारियों की आपत्ति के बाद नीति में कई संशोधन सुझाए गए, जिनके अनुरूप पालिसी को मंजूरी मिली है।

आचार संहिता से पहले सरकार हर हाल में इस पालिसी को मंजूरी देना चाहती थी। बीमार उद्योगों की पालिसी लंबे समय से लटकी हुई थी। कैबिनेट में दो बार पालिसी अधिकारियों की आपत्ति के चलते सरकार को वापस लेनी पड़ी। 

कंप्यूटर ऑपरेटरों को मिलेगा नियमित वेतनमान

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मंत्रिमंडल ने मनरेगा के तहत लगे 105 कंप्यूटर ऑपरेटरों, जिन्होंने 31 मार्च 2017 तक तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है उन्हें पहली जुलाई , 2017 से नियमित वेतनमान मनरेगा के प्रशासनिक खर्च से देने की स्वीकृति दी है। 

उप मंडलीय पशु अस्पताल को मंजूरी
प्रदेश सरकार ने मंडी जिला के उप मंडलीय पशु अस्पताल नगवाईं को क्षेत्रीय पशु अस्पताल में स्तरोन्नत करने की मंजूरी दी है।

किसानों के हित में लिया बड़ा फैसला

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हिमाचल मंत्रिमंडल ने राज्य के किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। हिमाचल प्रदेश में अब कोई भी किसान कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर खरीद सकेगा। इसके लिए न्यूनतम एक हेक्टेयर जमीन का मालिक होने की शर्त को हटा दिया गया है। यानी अब कोई भी किसान कृषि उद्देश्य से खरीदे गए ट्रैक्टर पर सब्सिडी और टैक्स छूट का लाभ लेने का पात्र होगा।

दूसरा बड़ा फैसला ये हुआ है कि अब कृषि कार्य के लिए खरीदे गए ट्रैक्टर के पंजीकरण के दौरान कोई भी टोकन टैक्स नहीं लिया जाएगा। जिन किसानों के पास ट्रैक्टरों का टोकन टैक्स बकाया है। उनसे आगामी आदेशों तक कोई वसूली नहीं होगी। मंत्रिमंडल ने इस वसूली पर भी रोक लगा दी है। मिड हिमालयन जलागम विकास परियोजना में तैनात प्रेरकों के लिए पुन : रोजगार की नीति बनाने का भी मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया गया। 

कांगड़ा, सिरमौर को तोहफा; 24 उप-स्वास्थ्य केंद्र स्तरोन्नत

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हिमाचल मंत्रिमंडल ने कांगड़ा और सिरमौर जिलों को बडे़ तोहफे दिए हैं। कैबिनेट ने कांगड़ा और सिरमौर जिलों में के लिए  12-12 यानी कुल 24 स्वास्थ्य उपकेंद्रों को स्तरोन्नत करने का फैसला लिया है। ये हिंदुस्तान लेटेक्स सीमित कंपनी के माध्यम से काम करेंगे।

पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज चंबा में स्टाफ नर्सों के 110 और स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्सों के अतिरिक्त 13 पदों को भरने का निर्णय लिया गया है। कुल 123 पद भरने का निर्णय लिया गया।

इन जिलों को भी मिला तोहफा

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मंत्रिमंडल ने बिलासपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 50 बिस्तरों वाले नागरिक अस्पताल में स्तरोन्नत करने का निर्णय लिया इसके लिए आवश्यक स्टाफ सृजित किया जाएगा। मंडी जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पांगणा को भी आवश्यक स्टाफ सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करने को मंजूरी दी गई।

बैठक में शिमला जिले की चौपाल तहसील के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ावग को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्तरोन्नत करने और चौपाल तहसील के संगरोली यानी बमटा में आवश्यक स्टाफ सृजित करने सहित उप स्वास्थ्य केंद्र खोलने को मंजूरी दी। 

कुल्लू जिले के कसोल में आवश्यक स्टाफ सहित स्वास्थ्य उप केंद्र खोलने का निर्णय लिया गया है। बैठक में मंडी जिले के स्वास्थ्य उप-केंद्र सलोट को आवश्यक स्टाफ सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्तरोन्नत करने का फैसला लिया गया है।

कांगड़ा जिले की रक्कड़ तहसील के बन्नी में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने का भी निर्णय लिया गया है। मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में दवा उपनियंत्रक का एक पद सृजित करने को भी मंजूरी दी।

मंडी जिले के थलटुखोड पशु औषधालय और लाहौल-स्पीति जिले के घीयु पशु औषधालय को पशु अस्पताल के रूप में स्तरोन्नत किया गया है, जिसके लिए आवश्यक स्टाफ का सृजन किया जाएगा। 

कई शिक्षण संस्थान स्तरोन्नत

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मंत्रिमंडल ने शिमला जिले के राजकीय महाविद्यालय नेरवा में शैक्षणिक सत्र 2017-18 से अंग्रेजी तथा वाणिज्य विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं शुरू करने का निर्णय लिया। इसके अलावा शिमला जिला के नेरवा शिक्षा खंड की ग्राम पंचायत किरण के फाजियाबाग में प्राथमिक स्कूल खोलने का फैसला किया गया।

सोलन जिले के राजकीय प्राथमिक सतरोल को माध्यमिक पाठशाला में स्तरोन्नत करने, द्रंग विधानसभा क्षेत्र की राजकीय प्राथमिक पाठशाला शरआना तथा राजकीय प्राथमिक पाठशाला बसडेहरा को माध्यमिक पाठशाला में स्तरोन्नत करने, शिमला जिले के चौपाल विधानसभा क्षेत्र में नवसृजित नेरवा

तहसील के राजकीय उच्च पाठशाला कुठार को वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला को स्तरोन्नत करने के अलावा कांगड़ा जिले की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चढ़ियार का पुन: नामकरण कर बख्शी प्रताप सिंह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चढ़ियार करने का निर्णय लिया। 

महलों और हवेलियों के फिरेंगे दिन, हेरिटेज टूरिज्म पॉलिसी को मंजूरी

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हिमाचल की संस्कृति और धरोहर को पर्यटन से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सूबे के राजा-रजवाड़ों से लेकर अंग्रेजी शासनकाल के दौर तक के पुराने महलों और हवेलियों को संजोए रखने के लिए सरकार हिमाचल हेरिटेज टूरिज्म पॉलिसी लेकर आई है। मंत्रिमंडल ने नीति को मंजूरी दी गई है। 

इस नीति के तहत रियासतों से ब्रिटिश राज की धरोहरों जिसमें भवन, किले, महल, लॉज और हवेलियां किसी न किसी इतिहास से जुड़ी हैं, उनका निरंतर रखरखाव करना शामिल है। इससे राज्य में पर्यटन गतिविधियों के लिए नए क्षेत्र विकसित होंगे। 

इस नीति का मकसद पर्यटकों को रियासत काल की जीवनशैली, परंपराओं और ब्रिटिश काल की वास्तुकला की भव्यता की झलक प्रस्तुत करना और उन्हें इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी देना है। 

इन इमारतों के रखरखाव के लिए प्रदेश सरकार भवन या महल मालिक को पचास फीसदी तक राशि उपलब्ध कराएगी ताकि वह उस विरासत को संजोकर रख सकें। सूत्रों का कहना है कि इस नीति को सरकार ने राजस्थान के महलों के संरक्षण की तर्ज पर लागू किया है।

राजघरानों को मिलेगा फायदा
इस नीति का सीधा फायदा प्रदेश के राजघरानों के लोगों को मिलेगा। चूंकि ज्यादातर राजघरानों के सदस्य राजनीति में हैं। ऐसे में इस नीति के राजनीतिक मायने भी अभी से निकाले जाना शुरू हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस पॉलिसी का सीधा लाभ प्रदेश के गिने चुने लोगों को ही मिलेगा।

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