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Himachal News: हिमाचल के तीनों निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे मंजूर, अब होगा उपचुनाव

Mon, 03 Jun 2024 06:53 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 03 Jun 2024 06:53 PM IST
सार

प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने तीन निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। 

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Assembly Speaker Kuldeep Pathania accepted the resignations of the three independent MLAs
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 आखिरकार 73 दिन बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा के तीन निर्दलीय विधायकों होशियार सिंह, आशीष शर्मा और केएल ठाकुर के इस्तीफे मंजूर कर लिए गए। अब यहां उपचुनाव होंगे। राज्य विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सोमवार को इस्तीफे मंजूर करने का फैसला ले लिया। इस्तीफे मंजूर होने के बाद राज्य की चौदहवीं विधानसभा में विधायकों की संख्या 59 रह गई है। इनमें से 34 विधायक कांग्रेस के हैं तो 25 भाजपा के। यानी 6 कांग्रेस विधायकों को अयोग्य घोषित करने के बाद जहां 6 रिक्तियां हो गई थीं, अब कुल 9 सीटें खाली हो गई हैं। हालांकि, उपचुनाव वाली छह सीटों पर आज जितनी सीटें आएंगी, उतना दोनों दलों को फायदा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले कांग्रेस के पहले 40 विधायक थे, भाजपा के 25 और 3 निर्दलीय।

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पठानिया ने कहा कि तीनों निर्दलीय विधायकों ने 22 मार्च को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफे दे दिए थे। 23 मार्च को उन्होंने भाजपा को ज्वाइन किया। दल-बदल कानून में भी एक याचिका उनके समक्ष दायर हुई। इनकी जांच करने के बाद इस्तीफों को मंजूर कर दिया गया। अब तीनों राज्य विधानसभा में सदस्य नहीं होंगे। अब जब तीनों विधानसभा के सदस्य नहीं रहे, तो चाहे उनके इस्तीफे मंजूर कर लिए जाएं या अयोग्य घोषित किए जाएं। ऐसे में अब याचिका भी निष्फल हो जाती है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में भी मामला गया। वहां से भी मुख्य न्यायाधीश का अभी तक का आदेश है कि विधानसभा अध्यक्ष के क्षेत्राधिकार में दखल नहीं दिया जा सकता है। मामला तीसरे जज को गया है।
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केएल ठाकुर ने कहा कि देरी से सही फैसला आया है। कहा कि इस्तीफा देने का मकसद यह था कि लोकसभा के साथ विधानसभा का उपचुनाव भी हो जाए, ताकि सरकार का पैसा बचे। शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। साथ ही विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं। अब तीन सीटों के लिए उपचुनाव होने से तीन जिलों में आदर्श चुनाव आचार संहिता लगेगी, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। 

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