विधानसभा उपचुनाव: फतेहपुर, जुब्बल-कोटखाई और अर्की सीट पर इनके बीच हो सकता है मुकाबला
हिमाचल प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव की घोषणा के साथ ही टिकट के चाहवानों की धुकधुकी बढ़ गई है। प्रदेश फतेहपुर, जुब्बल-कोटखाई और अर्की विधानसभा सीट के लिए 30 अक्तूबर को मतदान होगा। जानें कहां कौन लड़ सकता है चुनाव...
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हिमाचल प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव की घोषणा के साथ ही टिकट के चाहवानों की धुकधुकी बढ़ गई है। फतेहपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के कृपाल परमार और भाजपा के भवानी पठानिया के बीच मुकाबला हो सकता है। यहां किसी नए चेहरे पर दांव खेलकर भी भाजपा चौंका सकती है। पिछली वीरभद्र सरकार में मंत्री रहे सुजान सिंह पठानिया के देहांत के बाद खाली हुई है। उनके ही बेटे भवानी पठानिया यहां से टिकट के सशक्त दावेदार हैं। कांग्रेस उन पर दांव खेलने की तैयारी कर चुकी है। हालांकि निशावर सिंह, चेतन चंबयाल, राघव सिंह पठानिया जैसे वरिष्ठ नेता भी टिकट मांग रहे हैं। भाजपा में इस सीट से राज्यसभा के सांसद रह चुके प्रदेश भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष, पूर्व महासचिव कृपाल परमार दावेदारी में हैं। वर्ष 2017 में भी वह यहां से भाजपा के विधानसभा प्रत्याशी थे, लेकिन चुनाव हार गए थे।
पीएम नरेंद्र मोदी के हिमाचल प्रभारी रहते हुए कृपाल परमार युवा मोर्चा में रहे हैं और उनके पसंदीदा बताए जाते हैं। साल 2017 में इनकी हार का प्रमुख कारण भाजपा के ही पूर्व सांसद एवं धूमल सरकार के पूर्व मंत्री राजन सुशांत और भाजपा के एक अन्य नेता बलदेव ठाकुर की बगावत माना गया। इन दोनों ने बागी होकर विधानसभा चुनाव लड़ा था। राजन सुशांत इस बार भी यहां से उपचुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। भाजपा से बगावत करने के बाद वह ‘हमारी पार्टी हिमाचल पार्टी’ का गठन चुके हैं। कृपाल परमार के अलावा यहां से भाजपा के टिकट के दावेदार बलदेव ठाकुर भी हैं। भाजपा नेता पंकज शर्मा उर्फ हैप्पी भी टिकट चाह रहे हैं।
जुब्बल-कोटखाई में रोहित ठाकुर और चेतन बरागटा में मुकाबला
जुब्बल-कोटखाई विधानसभा सीट पूर्व मंत्री और तत्कालीन मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा के निधन के बाद खाली हुई है। यहां कांग्रेस से पूर्व विधायक रोहित ठाकुर और दिवंगत नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा के बीच मुकाबला हो सकता है। इस सीट पर भाजपा से जिला परिषद सदस्य रही नीलम सरैइक और संघ की पृष्ठभूमि के सुशांत देष्टा भी भाजपा से टिकट चाह रहे हैं। हालांकि, फिलहाल कांग्रेस रोहित ठाकुर और भाजपा चेतन बरागटा से ही चुनाव लड़वाना चाह रही है। जुब्बल-कोटखाई में नीलम सरैइक को अपने साथ चलाना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी। वहीं, कांग्रेस से अगर रोहित ठाकुर का टिकट पक्का होता है तो उन्हें भी पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष महेंद्र स्तान, यशवंत छाजटा आदि स्थानीय नेताओं को प्रचार में अपने साथ चलाना भी चुनौती होगा। माकपा नेता संजय चौहान और जिला परिषद सदस्य विशाल शांगटा का रुख भी यहां नए समीकरण बनाएगा।
अर्की में भाजपा से रतन पाल सिंह और कांग्रेस से संजय अवस्थी प्रबल दावेदार
अर्की विधानसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के देहांत के बाद खाली हुई है। वीरभद्र सिंह के खिलाफ वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले रतन पाल सिंह इस बार भी यहां से भाजपा टिकट के सशक्त दावेदार हैं। उन्होंने वीरभद्र सिंह को अच्छी टक्कर दी थी। रतन पाल सिंह को सिटिंग विधायक गोविंद राम शर्मा का टिकट काटकर भाजपा प्रत्याशी बनाया गया था। उन्होंने उस दौरान पार्टी का आदेश मानते हुए चुनाव में रतन पाल सिंह का साथ दिया, लेकिन इस बार वह उपचुनाव में अपने लिए टिकट मांग रहे हैं और बगावत पर उतर आए हैं।
भाजपा की नेत्री आशा परिहार, हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र ठाकुर आदि भी यहां से गोविंद राम शर्मा को टिकट दिलाने के पक्ष में हैं। गोविंद राम शर्मा निर्दलीय चुनाव लड़े तो वह नए समीकरण बना सकते हैं। कांग्रेस से टिकट के प्रबल दावेदार पूर्व में गोविंद राम शर्मा के खिलाफ प्रत्याशी रह चुके संजय अवस्थी हैं। उनके अलावा वीरभद्र खेमे में गिने जाने वाले राजेंद्र ठाकुर भी टिकट चाह रहे हैं।