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अनुराग ठाकुर बोले-हिमाचल की कला और संस्कृति को विश्व पटल पर दिलाऊंगा पहचान

Fri, 20 Aug 2021 06:09 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 20 Aug 2021 06:09 PM IST
सार

प्रेसवार्ता में अनुराग ने कहा कि हिमाचल के संगीत की मिठास पूरे देश में चर्चित है। हमें अपनी संस्कृति को बढ़ावा देना है। इस विरासत को लुप्त नहीं होने देंगे।

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Anurag Thakur said that I will recognize the art and culture of Himachal on the world stage
anurag thakur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कला और संस्कृति को अगले 10 वर्षों में विश्व पटल पर पहचान दिलाना प्राथमिकता है। होटल पीटरहॉफ  शिमला में शुक्रवार सुबह प्रेसवार्ता में अनुराग ने कहा कि हिमाचल के संगीत की मिठास पूरे देश में चर्चित है।

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हमें अपनी संस्कृति को बढ़ावा देना है। इस विरासत को लुप्त नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर अपने संकल्प में कला और संस्कृति क्षेत्र को चुना है। हिमाचल देवभूमि है। यह एक बड़ा कारण है कि हमारी संस्कृति बहुत अच्छी है। 
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चंबा के रुमाल, थाल, कांगड़ा की पेंटिंग, ऊपरी शिमला की नाटी सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बहुमूल्य चीजें हैं। इन्हें देश के साथ विदेश में पहचान दिलाने के लिए काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो विश्वास हिमाचल के लिए दिखाया है, उसके लिए हिमाचल हमेशा उनका ऋणी रहेगा। वोकल फॉर लोकल हमारा बड़ा अभियान है।
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इसमें हिमाचल की सभी लोकल वस्तुओं एवं संस्कृति को बढ़ावा देना है। केंद्रीय युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि हिमाचल सरकार जमीन दे। हम खेलों को बढ़ावा देने में कोई कमी नहीं रखेंगे। प्रदेश में खेल स्टेडियमों और एकेडमी निर्माण के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होना होगा। जब एक स्वर में प्रदेश से आवाज उठेगी तो उसे कोई नहीं रोक सकेगा। 

क्रिकेट स्टेडियम से बदली धर्मशाला की पहचान
अनुराग ने कहा कि क्रिकेट स्टेडियम से धर्मशाला की पहचान बदली है। अब सालाना करीब पांच लाख लोग धर्मशाला आते हैं। स्टेडियम बनने से पहले यहां आने वाले सैलानियों की संख्या कम थी। 


खेलों में राजनीति आने से ही मैं राजनीति में आया
अनुराग ने कहा कि जब नेता कई क्षेत्रों में काम कर सकते हैं तो खेल संघों में भी उनका सहयोग लिया जा सकता है। खेल संघों के पदाधिकारियों को अपनी कुर्सी से न्याय करना चाहिए। उन्होंने हंसते हुए कहा कि जब खेलों में राजनीति आई तभी मैं राजनीति में आया।
 

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