{"_id":"6aa1785df3ee5fa28a04a694","slug":"agitation-by-teachers-shimla-news-c-19-sml1002-783959-2026-09-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: स्वायत्तता में हस्तक्षेप के खिलाफ एचपीयू शिक्षकों का प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: स्वायत्तता में हस्तक्षेप के खिलाफ एचपीयू शिक्षकों का प्रदर्शन
विज्ञापन
सरकार के नियंत्रण पर शिक्षकों ने जताया विरोध, वैधानिक निकायों की भूमिका बचाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में हस्तक्षेप के विरोध में शिक्षकों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ के आह्वान पर आयोजित प्रदर्शन में शिक्षकों ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालय की अकादमिक और प्रशासनिक स्वायत्तता कमजोर करने का प्रयास स्वीकार नहीं होगा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 56 वर्षों में शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय को मजबूत संस्थान बनाया है। ऐसे में बाहरी नियंत्रण बढ़ाना संस्थान की मूल भावना के खिलाफ है। शिक्षकों ने कहा कि जवाबदेही जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर विश्वविद्यालय को अधीनस्थ नहीं बनाया जा सकता। शिक्षकों ने वैधानिक निकायों की भूमिका बनाए रखने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अकादमिक परिषद और कार्यकारिणी परिषद जैसे निकाय विश्वविद्यालय के निर्णयों में महत्वपूर्ण हैं। इनके अधिकार सीमित होने से निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होगी। शिक्षकों ने सरकार से नियंत्रण बढ़ाने के बजाय संसाधन बढ़ाने की मांग की। उन्होंने शोध अनुदान, प्रयोगशालाओं, छात्रावासों, खेल सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया। प्रो. कुलभूषण चंदेल ने कहा कि स्वायत्तता कमजोर करना संस्थान की नींव पर चोट है। प्रो. चंदेल ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता उसकी पहचान है। इसे कमजोर करने से अकादमिक निर्णयों की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। चौधरी वरयाम सिंह बैंस ने कहा कि विश्वविद्यालय हजारों लोगों के योगदान से खड़ा हुआ है। इसकी संस्थागत गरिमा और निर्णय लेने की स्वतंत्रता कायम रहनी चाहिए। डॉ. शशिकांत शर्मा ने कहा कि शिक्षक जवाबदेही से पीछे नहीं हट रहे हैं। लेकिन जवाबदेही के नाम पर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता खत्म नहीं होनी चाहिए। प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि सरकार को शोध, प्रयोगशालाओं और आधारभूत सुविधाओं के लिए संसाधन देने चाहिए। स्वायत्तता से समझौता स्वीकार नहीं होगा।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में हस्तक्षेप के विरोध में शिक्षकों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ के आह्वान पर आयोजित प्रदर्शन में शिक्षकों ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालय की अकादमिक और प्रशासनिक स्वायत्तता कमजोर करने का प्रयास स्वीकार नहीं होगा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 56 वर्षों में शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय को मजबूत संस्थान बनाया है। ऐसे में बाहरी नियंत्रण बढ़ाना संस्थान की मूल भावना के खिलाफ है। शिक्षकों ने कहा कि जवाबदेही जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर विश्वविद्यालय को अधीनस्थ नहीं बनाया जा सकता। शिक्षकों ने वैधानिक निकायों की भूमिका बनाए रखने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अकादमिक परिषद और कार्यकारिणी परिषद जैसे निकाय विश्वविद्यालय के निर्णयों में महत्वपूर्ण हैं। इनके अधिकार सीमित होने से निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होगी। शिक्षकों ने सरकार से नियंत्रण बढ़ाने के बजाय संसाधन बढ़ाने की मांग की। उन्होंने शोध अनुदान, प्रयोगशालाओं, छात्रावासों, खेल सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया। प्रो. कुलभूषण चंदेल ने कहा कि स्वायत्तता कमजोर करना संस्थान की नींव पर चोट है। प्रो. चंदेल ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता उसकी पहचान है। इसे कमजोर करने से अकादमिक निर्णयों की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। चौधरी वरयाम सिंह बैंस ने कहा कि विश्वविद्यालय हजारों लोगों के योगदान से खड़ा हुआ है। इसकी संस्थागत गरिमा और निर्णय लेने की स्वतंत्रता कायम रहनी चाहिए। डॉ. शशिकांत शर्मा ने कहा कि शिक्षक जवाबदेही से पीछे नहीं हट रहे हैं। लेकिन जवाबदेही के नाम पर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता खत्म नहीं होनी चाहिए। प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि सरकार को शोध, प्रयोगशालाओं और आधारभूत सुविधाओं के लिए संसाधन देने चाहिए। स्वायत्तता से समझौता स्वीकार नहीं होगा।
विज्ञापन