करुणामूलक आधार पर नौकरी देने को लेकर प्रशासनिक प्राधिकरण का बड़ा फैसला
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हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक प्राधिकरण ने करुणामूलक आधार पर नौकरी दिए जाने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। प्राधिकरण ने करुणामूलक आधार पर नौकरी दिए जाने के मामले में स्पष्ट किया है कि जब परिवार की आर्थिक स्थिति मापने के लिए जब कोई मानक ही निर्धारित नहीं किया गया हो तो उस आधार पर मामला रद्द करना कानूनी तौर पर गलत है।
प्राधिकरण अध्यक्ष वीके शर्मा और प्रशासनिक सदस्य प्रेम कुमार की खंडपीठ ने हर्ष शर्मा द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया।
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी हर्ष शर्मा के पिता आयुर्वेदिक विभाग में फार्मासिस्ट पद पर तैनात थे।
उनकी 27 सितंबर 2007 को मृत्यु हो गई। प्रार्थी ने 16 अक्तूबर 2008 को करुणामूलक आधार पर नौकरी दिए जाने के लिए आवेदन दिया। आवेदन पर 24 दिसंबर 2014 तक कोई भी निर्णय नहीं लिया गया।
फिर प्रार्थी के आवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया कि राज्य सरकार द्वारा तय आर्थिक मानकों के दायरे में उनका मामला नहीं आता है। प्राधिकरण ने पाया कि जब प्रार्थी ने करुणामूलक आधार पर नौकरी पाने के लिए राज्य सरकार को आवेदन दिया था तो उस समय कोई भी आर्थिक (आय) मानक राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नहीं किया था।
ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार द्वारा पारित 24 दिसंबर 2014 के आदेश को निरस्त करते हुए आदेश दिए कि करुणामूलक आधार पर प्रार्थी को आवेदन देने बाबत 4 अप्रैल 2008 के ज्ञापन के अनुरूप निर्णय लेते हुए प्रार्थी का मामला 31 जनवरी 2018 तक नौकरी देने के लिए कंसीडर किया जाए।