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Shimla News: बच्चों के लिए बनाया अतिरिक्त पर्ची काउंटर, मिली राहत
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शिमला के डीडीयू अस्पताल में सैम्पल देने के लिए इंतजार मेंफोटो अमर उजाला
डीडीयू में पांच साल से कम उम्र के बच्चों को मिली सुविधा
कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अलग से पर्ची काउंटर शुरू हो गया है। इस पर्ची काउंटर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों की पर्चियां बनाई जाएगी। पर्ची बनाने को लेकर मरीजों को जो परेशानी पेश आती थी, वह भी नहीं आएगी। हालांकि दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन इस काउंटर पर अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती नहीं की है। इस वजह से मरीजों के साथ-साथ कर्मचारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
डीडीयू अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार करवाने आते हैं। अस्पताल में महिला ओर पुरुष काउंटर पर मरीजों की पर्चियां बनाई जाती हैं। अब अस्पताल प्रबंधन ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों को पर्चियां बनाने की सुविधा दी है। इसके विपरीत यहां पर अतिरिक्त कर्मचारी की तैनाती न हो पाने के कारण कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई है। आलम यह है कि छुट्टी के बाद अस्पताल के पुरुष और महिला पर्ची काउंटर पर लगी लाइनें मुख्य गेट तक पहुंच गई थी। इसके विपरीत बच्चों के पर्ची काउंटर पर अलग से ही लाइन लगी थी। इस वजह से यहां पर अव्यवस्था का आलम रहा।
पर्ची काउंटर पर तैनात महिला कर्मचारी एक साथ दो-दो काउंटर संभाल रही थी। इस वजह से उन्हें तो दिक्कतें पेश आ रही थी। वहीं अव्यवस्था के कारण मरीज भी उनके साथ बहस कर रहे थे। चक्कर से अस्पताल आईं अनीता, खलीनी के अनिल और बालूगंज के विपिन शर्मा ने बताया कि जब बच्चों के लिए अतिरिक्त काउंटर प्रबंधन ने बनाया है तो स्टाफ की भी तैनाती करें। इससे कि मरीजों और कर्मचारियों को सहूलियत होगी।
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एंट्री करवाने में लग गए घंटों, नहीं हुए टेस्ट
डॉक्टरों ने टेस्ट लिखे है। यह टेस्ट क्रस्ना लैब में होने हैं। यहां पर आई तो पहले एंट्री के लिए घंटों लगाए, लेकिन सैंपल देने आए तो यहां पर कर्मी ही नहीं है।
- रीना, चक्कर।
गले में है दिक्कत
गले में दिक्कत है। डॉक्टरों के कुछ टेस्ट करने को कहा है। सैंपल कलेक्शन सेंटर पर कर्मचारी मौजूद नहीं है। पता नहीं कब सैंपल लिया जाएगा।
- गौरव, बल्देयां।
नेटवर्क की है समस्या
काउंटर पर एंट्री करवाने गई तो पहले कहा गया कि नेटवर्क की समस्या है। जब नेट चला तो घंटों तक बारी नहीं आई। निजी लैब में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जाए।
- माया ठाकुर, भूमती।
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कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अलग से पर्ची काउंटर शुरू हो गया है। इस पर्ची काउंटर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों की पर्चियां बनाई जाएगी। पर्ची बनाने को लेकर मरीजों को जो परेशानी पेश आती थी, वह भी नहीं आएगी। हालांकि दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन इस काउंटर पर अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती नहीं की है। इस वजह से मरीजों के साथ-साथ कर्मचारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
डीडीयू अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार करवाने आते हैं। अस्पताल में महिला ओर पुरुष काउंटर पर मरीजों की पर्चियां बनाई जाती हैं। अब अस्पताल प्रबंधन ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों को पर्चियां बनाने की सुविधा दी है। इसके विपरीत यहां पर अतिरिक्त कर्मचारी की तैनाती न हो पाने के कारण कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई है। आलम यह है कि छुट्टी के बाद अस्पताल के पुरुष और महिला पर्ची काउंटर पर लगी लाइनें मुख्य गेट तक पहुंच गई थी। इसके विपरीत बच्चों के पर्ची काउंटर पर अलग से ही लाइन लगी थी। इस वजह से यहां पर अव्यवस्था का आलम रहा।
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पर्ची काउंटर पर तैनात महिला कर्मचारी एक साथ दो-दो काउंटर संभाल रही थी। इस वजह से उन्हें तो दिक्कतें पेश आ रही थी। वहीं अव्यवस्था के कारण मरीज भी उनके साथ बहस कर रहे थे। चक्कर से अस्पताल आईं अनीता, खलीनी के अनिल और बालूगंज के विपिन शर्मा ने बताया कि जब बच्चों के लिए अतिरिक्त काउंटर प्रबंधन ने बनाया है तो स्टाफ की भी तैनाती करें। इससे कि मरीजों और कर्मचारियों को सहूलियत होगी।
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एंट्री करवाने में लग गए घंटों, नहीं हुए टेस्ट
डॉक्टरों ने टेस्ट लिखे है। यह टेस्ट क्रस्ना लैब में होने हैं। यहां पर आई तो पहले एंट्री के लिए घंटों लगाए, लेकिन सैंपल देने आए तो यहां पर कर्मी ही नहीं है।
- रीना, चक्कर।
गले में है दिक्कत
गले में दिक्कत है। डॉक्टरों के कुछ टेस्ट करने को कहा है। सैंपल कलेक्शन सेंटर पर कर्मचारी मौजूद नहीं है। पता नहीं कब सैंपल लिया जाएगा।
- गौरव, बल्देयां।
नेटवर्क की है समस्या
काउंटर पर एंट्री करवाने गई तो पहले कहा गया कि नेटवर्क की समस्या है। जब नेट चला तो घंटों तक बारी नहीं आई। निजी लैब में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जाए।
- माया ठाकुर, भूमती।