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आखिर नींद से जागा प्रशासन, सड़कों पर उतरे अफसर

Wed, 28 Mar 2018 10:32 AM IST
Updated Wed, 28 Mar 2018 10:32 AM IST
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आखिर नींद से जागा प्रशासन, सड़कों पर उतरे अफसर

विश्वास भारद्वाज

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शिमला। दमघोंट देने वाले माहौल में स्कूल टैक्सियों की डिग्गियों में ठूंसे जा रहे बच्चों की तस्वीरें ‘अमर उजाला’ में छपने के बाद मंगलवार को प्रशासन आखिर हरकत में आ ही गया। उपायुक्त शिमला अमित कश्यप ने सुबह 12 बजे एडीएम लॉ एंड आर्डर, एसडीएम शिमला शहरी, आरटीओ शिमला, डीएसपी सिटी, डीएसपी ट्रैफिक सहित सेंट एडवर्ड स्कूल, ताराहाल स्कूल, आकलैंड स्कूल, डीएवी न्यू शिमला सहित अन्य स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधन को अपने कार्यालय में तलब किया। उपायुक्त ने प्रशासनिक अधिकारियों और स्कूल प्रबंधनों को तुरंत व्यवस्था सुधारने के आदेश दिए।

दोपहर पौने दो बजे छुट्टी से पहले ही पुलिस दल ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए एडवर्ड स्कूल के बाहर पहुंच गया। एसडीएम शिमला शहरी नीरज चांदला और डीएसपी सिटी दिनेश शर्मा भी स्कूल के बाहर पहुंचे। सेंट एडवर्ड स्कूल प्रबंधन भी लापरवाही छोड़ हरकत में आया। छुट्टी होते ही प्रधानाचार्य फादर अनिल अन्य अध्यापकों के साथ बच्चों को गेट से बाहर भेजने के लिए लाइनें लगाने खुद खड़े हुए। स्कूल टैक्सी आपरेटर भी बच्चों को हाथ से पकड़ कर टैक्सियों में बैठाते दिखे।
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स्कूल को बनानी होगी पार्किंग, कैमरे भी लगाने होंगे
एसडीएम नीरज चांदला और डीएसपी सिटी दिनेश शर्मा ने एडवर्ड स्कूल को गाड़ियों के लिए पार्किंग बनाने और वाहनों की आवाजाही पर नजर रखने को सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए संभावनाएं तलाशने के आदेश दिए। डीएसपी सिटी ने पुलिस कर्मियों को सभी स्कूल टैक्सी आपरेटरों से फार्म भरवा कर विस्तृत विवरण तैयार करने के निर्देश भी दिए। एसडीएम ने स्कूूूल प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि एक बच्चे को लाने ले जाने के लिए एक गाड़ी स्कूल न आए इसके लिए अभिभावकों को जागरूक करें।
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टैक्सियों के नंबर दो, हमें कार्रवाई करनी है
सेंट एडवर्ड स्कूल पहुंची एसडीएम शिमला शहरी नीरज चांदला ‘अमर उजाला’ से ऐसे स्कूल टैक्सी आपरेटरों की गाड़ियों के नंबर मांगें जोे डिग्गियों में सीटें लगा कर बच्चों को बैठा रहे थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस कर्मियों को सड़क किनारे खड़ी टैक्सियों की जांच के आदेश दिए।

स्कूल टैक्सी से बेरोजगारों का पल रहा परिवार : विजय
स्कूल टैक्सी आपरेटरों का पक्ष रखते हुए विजय कुमार ने अमर उजाला को बताया कि पिछले कई सालों से टैक्सी आपरेटर बच्चों को सकुशल घरों से स्कूल पहुंचाने और स्कूल से घर छोड़ने की जिम्मेवारी निभा रहे हैं। बेरोजगार युवाओं का परिवार इस काम से पल रहा है। एडवर्ड स्कूल के बाहर स्थायी तौर पर पुलिस कर्मियों की तैनाती कर दी जाए और स्कूल भी ट्रैफिक वार्डन लगाए तो समस्या का समाधान हो सकता है। एचआरटीसी बसें जाम का कारण बन रही हैं, अगर फिक्स टाइम पर बसें बच्चों को लेने आएं तो जाम की समस्या से भी निजात मिल सकती है।


हैरत, परिवहन विभाग को छापेमारी में कभी नहीं मिली ओवरलोडिंग
परिवहन विभाग की ओर से स्कूल टैक्सियों और स्कूल बसों में ओवरलोडिंग जांचने के लिए की गई छापेमारी के दौरान कभी भी ओवरलोडिंग नहीं मिली, इसलिए कोई चालान भी नहीं किया गया। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी शिमला भूपेंद्र अत्री का कहना है कि विभाग ने करीब छह से सात बार छापेमारी की है लेकिन स्कूल टैक्सियों की डिग्गियों में न तो सीटें मिली हैं न ओवरलोडिंग, सिर्फ बैग रखे मिले हैं। न्यू शिमला में स्कूल बसों की जांच के लिए तीन इंस्पेक्टर और अधीक्षक को भेजा गया था उनसे भी रिपोर्ट ली गई है।

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