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परीक्षा के समय तीन घंटे तक गुल रही एचपीयू में बिजली
Updated Mon, 01 Jan 2018 10:53 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। विश्वविद्यालय कैंपस में सोमवार को दोपहर ढाई से लेकर साढ़े पांच बजे तक बत्ती गुल हो गई। इस कारण बीएड और एमएड के परीक्षार्थियों को अंधेरे कमरों में ही परीक्षा देने पर मजबूर होना पड़ा। एबीवीपी की विवि इकाई के सचिव सुयश पवार ने कहा कि बिजली के अघोषित कट और विवि की अव्यवस्था का खामियाजा परीक्षार्थियों को भुगतना पड़ा। सर्दियों के मौसम में पुस्तकालय में शोध संबंधित कार्य करने और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने आए छात्रों को भी बिना हीटर के ही घंटों बैठने पर मजबूर होना पड़ा। उनका कहना है कि विवि को यूजीसी से ए-ग्रेड जरूर मिला है, मगर विवि के पास बिजली जाने की स्थिति में लाइट के लिए जेनरेटर तक की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
हर बड़े संस्थान और सरकारी कार्यालय में अपने जेनरेटर लगे हुए हैं। विवि में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। सिर्फ परीक्षा विंग में जेनरेटर/डीजी सेट की सुविधा है। विभागों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। सुयश का कहना है कि सोमवार को दोपहर दो से पांच बजे तक एमएड की रिसर्च मैथेडेलॉजी और बीएड की लेंग्वेज अक्रॉस करिकुलम की लिखित परीक्षा थी। गांधी भवन में इसके लिए सेंटर बनाए गए थे। यहां ढाई से पांच बजे तक परीक्षार्थियों को अंधेरे कमरों में परीक्षा देने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने विवि प्रशासन से मांग की है कि विभागों में डीजी सेट जेनरेटर की व्यवस्था की जाए और विद्युत आपूर्ति विभाग से परीक्षाओं के दिनों में नियमित आपूर्ति किए जाने की मांग उठाई है।
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शिमला। विश्वविद्यालय कैंपस में सोमवार को दोपहर ढाई से लेकर साढ़े पांच बजे तक बत्ती गुल हो गई। इस कारण बीएड और एमएड के परीक्षार्थियों को अंधेरे कमरों में ही परीक्षा देने पर मजबूर होना पड़ा। एबीवीपी की विवि इकाई के सचिव सुयश पवार ने कहा कि बिजली के अघोषित कट और विवि की अव्यवस्था का खामियाजा परीक्षार्थियों को भुगतना पड़ा। सर्दियों के मौसम में पुस्तकालय में शोध संबंधित कार्य करने और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने आए छात्रों को भी बिना हीटर के ही घंटों बैठने पर मजबूर होना पड़ा। उनका कहना है कि विवि को यूजीसी से ए-ग्रेड जरूर मिला है, मगर विवि के पास बिजली जाने की स्थिति में लाइट के लिए जेनरेटर तक की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
हर बड़े संस्थान और सरकारी कार्यालय में अपने जेनरेटर लगे हुए हैं। विवि में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। सिर्फ परीक्षा विंग में जेनरेटर/डीजी सेट की सुविधा है। विभागों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। सुयश का कहना है कि सोमवार को दोपहर दो से पांच बजे तक एमएड की रिसर्च मैथेडेलॉजी और बीएड की लेंग्वेज अक्रॉस करिकुलम की लिखित परीक्षा थी। गांधी भवन में इसके लिए सेंटर बनाए गए थे। यहां ढाई से पांच बजे तक परीक्षार्थियों को अंधेरे कमरों में परीक्षा देने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने विवि प्रशासन से मांग की है कि विभागों में डीजी सेट जेनरेटर की व्यवस्था की जाए और विद्युत आपूर्ति विभाग से परीक्षाओं के दिनों में नियमित आपूर्ति किए जाने की मांग उठाई है।
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