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नगर निगम ने मानीं ठेकेदारों की मांगें
Updated Mon, 20 Nov 2017 10:58 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में चार माह से ठप पड़े करोड़ों रुपये के नए निर्माण और मरम्मत कार्य अब जल्द शुरू किए जा सकेंगे। जीएसटी और ईपीएफ को लेकर नगर निगम और ठेकेदारों के बीच जारी विवाद खत्म हो गया है।
सोमवार को निगम आयुक्त जीसी नेगी की अध्यक्षता में ठेकेदारों के साथ बैठक हुई। दो घंटे चली बैठक में ठेकेदारों ने अपनी मांग के पक्ष में कई तर्क रखे। ठेकेदार यूनियन अध्यक्ष पीएन शर्मा ने कहा कि पर्यटन विभाग में जीएसटी का खर्च ठेकेदार नहीं बल्कि खुद विभाग वहन कर रहा है। कई दूसरे महकमे भी जीएसटी का हिस्सा कुल बजट में शामिल कर खुद उठा रहे हैं। कहा कि एक लाख के काम में ठेकेदार को 12 फीसदी के हिसाब से करीब 12 हजार रुपये जीएसटी भरना पड़ रहा है। ऐसे में उनका लाभ खत्म हो रहा है। उल्टा घाटा उठाना पड़ रहा है। इसी तरह लेबर पर दिए जाने वाले ईपीएफ को भी एस्टीमेट में शामिल किया जाए। बाद में निगम प्रशासन ने ठेकेदारों की मांग मानते हुए जीएसटी और ईपीएफ का हिस्सा एस्टीमेट में शामिल कर खुद वहन करने का भरोसा दिलाया। साथ ही ठेकेदारों को काम का रजिस्टर मेंटेन करने के भी निर्देश दिए। निगम के साथ बैठक सफल होने के बाद ठेकेदारों ने भी अपना बहिष्कार खत्म कर काम करने को हामी भर दी है।
शहर में अटके पड़े हैं 10 करोड़ के कार्य
जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद से शहर में नए निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। बरसात के दौरान भी शहर में काफी नुकसान हुआ है। निगम ने इसकी भरपाई के लिए बजट तो पारित कर दिया लेकिन ठेकेदार काम को राजी नहीं हुए। अब तक चार माह में करीब 10 करोड़ रुपये के डेढ़ सौ कार्यों के टेंडर अटके पड़े हैं। इनमें सड़कों-रास्तों को पक्का करने, नए डंगे, रेलिंग लगाने, सीढ़ियों की मरम्मत करने, पार्किंग आदि जैसे काम होने हैं।
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अब रिवाइज किए जाएंगे सारे टेंडर
पिछले तीन माह के दौरान निगम ने जो भी टेंडर जारी किए हैं, उन्हें अब दोबारा रिवाइज कर जारी किया जाएगा। इनमें अब जीएसटी का पैसा भी शामिल किया जाएगा। 18 दिसंबर तक आचार संहिता के चलते इसके बाद ही निगम ये काम शुरू करवा पाएगा। निगम ने कुछ कार्यों के लिए चुनाव आयोग से अनुमति भी मांगी है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में सभी कार्य 18 दिसंबर के बाद ही शुरू होने की उम्मीद है।
क्या कहते हैं आयुक्त
ठेकेदारों के साथ हुई बैठक में उनकी कुछ मांगों को मान लिया गया है। शहरवासियों को जल्द राहत मिले, इसके लिए जल्द काम शुरू करवाए जाएंगे।
जीसी नेगी, नगर निगम आयुक्त
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शिमला। शहर में चार माह से ठप पड़े करोड़ों रुपये के नए निर्माण और मरम्मत कार्य अब जल्द शुरू किए जा सकेंगे। जीएसटी और ईपीएफ को लेकर नगर निगम और ठेकेदारों के बीच जारी विवाद खत्म हो गया है।
सोमवार को निगम आयुक्त जीसी नेगी की अध्यक्षता में ठेकेदारों के साथ बैठक हुई। दो घंटे चली बैठक में ठेकेदारों ने अपनी मांग के पक्ष में कई तर्क रखे। ठेकेदार यूनियन अध्यक्ष पीएन शर्मा ने कहा कि पर्यटन विभाग में जीएसटी का खर्च ठेकेदार नहीं बल्कि खुद विभाग वहन कर रहा है। कई दूसरे महकमे भी जीएसटी का हिस्सा कुल बजट में शामिल कर खुद उठा रहे हैं। कहा कि एक लाख के काम में ठेकेदार को 12 फीसदी के हिसाब से करीब 12 हजार रुपये जीएसटी भरना पड़ रहा है। ऐसे में उनका लाभ खत्म हो रहा है। उल्टा घाटा उठाना पड़ रहा है। इसी तरह लेबर पर दिए जाने वाले ईपीएफ को भी एस्टीमेट में शामिल किया जाए। बाद में निगम प्रशासन ने ठेकेदारों की मांग मानते हुए जीएसटी और ईपीएफ का हिस्सा एस्टीमेट में शामिल कर खुद वहन करने का भरोसा दिलाया। साथ ही ठेकेदारों को काम का रजिस्टर मेंटेन करने के भी निर्देश दिए। निगम के साथ बैठक सफल होने के बाद ठेकेदारों ने भी अपना बहिष्कार खत्म कर काम करने को हामी भर दी है।
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शहर में अटके पड़े हैं 10 करोड़ के कार्य
जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद से शहर में नए निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। बरसात के दौरान भी शहर में काफी नुकसान हुआ है। निगम ने इसकी भरपाई के लिए बजट तो पारित कर दिया लेकिन ठेकेदार काम को राजी नहीं हुए। अब तक चार माह में करीब 10 करोड़ रुपये के डेढ़ सौ कार्यों के टेंडर अटके पड़े हैं। इनमें सड़कों-रास्तों को पक्का करने, नए डंगे, रेलिंग लगाने, सीढ़ियों की मरम्मत करने, पार्किंग आदि जैसे काम होने हैं।
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अब रिवाइज किए जाएंगे सारे टेंडर
पिछले तीन माह के दौरान निगम ने जो भी टेंडर जारी किए हैं, उन्हें अब दोबारा रिवाइज कर जारी किया जाएगा। इनमें अब जीएसटी का पैसा भी शामिल किया जाएगा। 18 दिसंबर तक आचार संहिता के चलते इसके बाद ही निगम ये काम शुरू करवा पाएगा। निगम ने कुछ कार्यों के लिए चुनाव आयोग से अनुमति भी मांगी है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में सभी कार्य 18 दिसंबर के बाद ही शुरू होने की उम्मीद है।
क्या कहते हैं आयुक्त
ठेकेदारों के साथ हुई बैठक में उनकी कुछ मांगों को मान लिया गया है। शहरवासियों को जल्द राहत मिले, इसके लिए जल्द काम शुरू करवाए जाएंगे।
जीसी नेगी, नगर निगम आयुक्त