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डिस् एबल्ड छात्र संघ
Updated Fri, 01 Sep 2017 11:04 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में डिसेबल्ड छात्र संघ ने ‘नेत्रदान में विद्यार्थियों की भूमिका’ विषय पर शुक्रवार को कार्यशाला का आयोजन किया। उमंग फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में तीस छात्रों ने नेत्रदान का संकल्प लिया। इनमें छह छात्र ऐसे थे, जो स्वयं दृष्टिबाधित हैं। डीएसए के संयोजक सतीश ठाकुर ने बताया कि विश्वविद्यालय के 6 दृष्टिबाधित विद्यार्थियों में संगीता, अनुज कुमार, विनोद शर्मा, अजय कुमार, सपना चौहान और जसवीर सिंह ने भी नेत्रदान का संकल्प लिया। प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाता है। इसी के अंतर्गत यह कार्यशाला आयोजित की गई। प्रो. अजय श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को नेत्रदान और आरटीआई की बारीकियों से अवगत कराया। कहा कि वे दृष्टिबाधित व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं जिनका कॉर्निया यानी आंख की पुतली ठीक होती है। प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि मृत्यु के छह घंटे के भीतर मृतक की आंखों से सिर्फ पुतली दान में ली जाती है। यह एक आसान प्रक्रिया है जो कोई भी डॉक्टर कर सकता है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में 7 वर्ष पूर्व नेत्र बैंक की स्थापना हुई थी लेकिन वह संतोषजनक ढंग से कार्य नहीं कर रहा है। अभी तक उसमें लगभग 175 कार्निया ही प्रत्यारोपित किए गए हैं जोकि बहुत कम हैं। सरकार नेत्र संग्रह के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। कहा कि नेत्रदान एक नेक कार्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से नेत्रदान के बारे में जागरूकता फैलाने और सरकार से नेत्र बैंक के सुचारु ढंग से संचालित करने की मांग की। नेत्रदान की इच्छा जताने वाले छात्रों में सतीश ठाकुर, लेखराज शर्मा, मुकेश कुमार, मोनिका राव, मीरा देवी, चंद्रिका, मीना शर्मा, संदीप चौहान, हेम सिंह, किरण बोध, अंशुल शर्मा, मनीषा ठाकुर, रीनू रापटाए, प्रीति और साक्षी मिश्रा शामिल हैं।
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शिमला।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में डिसेबल्ड छात्र संघ ने ‘नेत्रदान में विद्यार्थियों की भूमिका’ विषय पर शुक्रवार को कार्यशाला का आयोजन किया। उमंग फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में तीस छात्रों ने नेत्रदान का संकल्प लिया। इनमें छह छात्र ऐसे थे, जो स्वयं दृष्टिबाधित हैं। डीएसए के संयोजक सतीश ठाकुर ने बताया कि विश्वविद्यालय के 6 दृष्टिबाधित विद्यार्थियों में संगीता, अनुज कुमार, विनोद शर्मा, अजय कुमार, सपना चौहान और जसवीर सिंह ने भी नेत्रदान का संकल्प लिया। प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाता है। इसी के अंतर्गत यह कार्यशाला आयोजित की गई। प्रो. अजय श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को नेत्रदान और आरटीआई की बारीकियों से अवगत कराया। कहा कि वे दृष्टिबाधित व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं जिनका कॉर्निया यानी आंख की पुतली ठीक होती है। प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि मृत्यु के छह घंटे के भीतर मृतक की आंखों से सिर्फ पुतली दान में ली जाती है। यह एक आसान प्रक्रिया है जो कोई भी डॉक्टर कर सकता है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में 7 वर्ष पूर्व नेत्र बैंक की स्थापना हुई थी लेकिन वह संतोषजनक ढंग से कार्य नहीं कर रहा है। अभी तक उसमें लगभग 175 कार्निया ही प्रत्यारोपित किए गए हैं जोकि बहुत कम हैं। सरकार नेत्र संग्रह के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। कहा कि नेत्रदान एक नेक कार्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से नेत्रदान के बारे में जागरूकता फैलाने और सरकार से नेत्र बैंक के सुचारु ढंग से संचालित करने की मांग की। नेत्रदान की इच्छा जताने वाले छात्रों में सतीश ठाकुर, लेखराज शर्मा, मुकेश कुमार, मोनिका राव, मीरा देवी, चंद्रिका, मीना शर्मा, संदीप चौहान, हेम सिंह, किरण बोध, अंशुल शर्मा, मनीषा ठाकुर, रीनू रापटाए, प्रीति और साक्षी मिश्रा शामिल हैं।
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