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आठ माह में दवाओं के 272 सैंपल जांचे, 83 हो गए फेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालागढ़ (सोलन)
Updated Thu, 13 Sep 2018 01:27 PM IST
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विश्व मानचित्र पर अपना नाम दर्ज करवाने वाले हिमाचल प्रदेश और फार्मा हब बीबीएन के उद्योगों की निर्मित होने वाली दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर पा रही हैं। इस वर्ष अब तक देशभर से लिए गए 272 सैंपलों में से हिमाचल के 83 सैंपल फेल हो गए हैं।
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प्रदेश सरकार के कड़ा संज्ञान लेने पर हालांकि पिछले कुछ माह में कुछ सुधार हुआ है लेकिन इस बार के ताजा ड्रग अलर्ट में फिर से आंकड़ा बढ़ गया है। इस वर्ष जनवरी माह में 8, फरवरी में 14, मार्च में 16, अप्रैल में 6, मई में 13 और जून में 4, जुलाई में 7 और अगस्त माह में 15 दवाओं के सैंपल फेल हो गए है।
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बीते वर्ष लिए गए 373 सैंपलों में से हिमाचल प्रदेश के उद्योगों की बनी 110 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने जनवरी में फेल सैंपल मामले पर प्राधिकरण को कड़ी लताड़ लगाकर सख्ती दिखाई थी।
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हिमाचल में 750 फार्मा उद्योग
स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार के बद्दी में बैठकें कर कड़ा रुख अपनाया था। जिसके बाद जून व जुलाई में फेल होने वाले सैंपलों के आंकड़ों में गिरावट आई, लेकिन अगस्त माह में यह आंकड़ा फिर से बढ़ गया है। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाहा ने कहा कि कई दवाओं में वातावरण का भी असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि 90:10 के अनुुपात में बद्दी में ही ड्रग टेस्टिंग लैब बन रही है, जिसके लिए एक भवन के पांच फ्लोर किराये पर ले लिए गए हैं। जल्द यहां लैब की स्थापना होगी, जिससे दवाओं की जांच यहीं लैब में हो सकेगी।
प्रदेशभर में करीब 750 फार्मा उद्योग स्थापित हैं, जिनमें से कई उद्योगों में निर्मित दवाओं पर सवाल उठते रहे हैं। सीडीएससीओ द्वारा हर माह दिए जाने वाले ड्रग अलर्ट के बाद विभाग हरकत में आता है और सैंपल फेल होने वाली दवाओं का बैच मार्किट से उठा लिया जाता है।
उन्होंने कहा कि 90:10 के अनुुपात में बद्दी में ही ड्रग टेस्टिंग लैब बन रही है, जिसके लिए एक भवन के पांच फ्लोर किराये पर ले लिए गए हैं। जल्द यहां लैब की स्थापना होगी, जिससे दवाओं की जांच यहीं लैब में हो सकेगी।
प्रदेशभर में करीब 750 फार्मा उद्योग स्थापित हैं, जिनमें से कई उद्योगों में निर्मित दवाओं पर सवाल उठते रहे हैं। सीडीएससीओ द्वारा हर माह दिए जाने वाले ड्रग अलर्ट के बाद विभाग हरकत में आता है और सैंपल फेल होने वाली दवाओं का बैच मार्किट से उठा लिया जाता है।