मंडी: जोगिंद्रनगर में अचानक मर गईं 2500 ट्राउट मछलियां
बुधवार को एक डैम में करीब 2500 मछलियां अचानक मर गईं। इससे उन्हें पांच लाख से अधिक नुकसान हुआ है। दस क्विंटल से अधिक मछलियों के मरने की बात कही जा रही है।
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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंद्रनगर के स्यूरी (आरठी) में करीब 25 सौ ट्राउट मछलियां अचानक मर गई हैं। पशु चिकित्सकों की टीम ने मृत मछलियों का पोस्टमार्टम कर सैंपल वेटरनेरी अस्पताल पालमपुर भेजे हैं। प्रारंभिक जांच में मछलियों के मरने का कारण दूषित पानी और ऑक्सीजन की कमी माना जा रहा है। अन्य पहलुओं पर भी संबंधित विभाग ने जांच शुरू कर दी है। आरठी निवासी बचित्र सिंह ने वर्ष 2017 में पशुपालन विभाग से सब्सिडी पर ट्राउट मछली का उत्पादन शुरू किया था। उनके चार डैमों में करीब 7500 मछलियां थीं। बुधवार को एक डैम में करीब 2500 मछलियां अचानक मर गईं।
इससे उन्हें पांच लाख से अधिक नुकसान हुआ है। दस क्विंटल से अधिक मछलियों के मरने की बात कही जा रही है। उपमंडलीय पशु चिकित्साधिकारी दीपक वर्मा से मिली जानकारी के अनुसार करीब 2500 मछलियां अचानक मरी हुई मिली हैं। बचित्र सिंह ने बताया कि पुलिस थाने में भी शिकायत दी गई है। पुलिस और पशु विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उपमंडलीय पशु चिकित्साधिकारी जोगिंद्रनगर दीपक वर्मा ने कहा कि प्रारंभिक जांच में 2500 मछलियों की मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी लग रही है। मछलियों का पोस्टमार्टम कर सैंपल वेटरनेरी अस्पताल पालमपुर भेजे हैं।
प्रदेश में रखा 950 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य
हिमाचल प्रदेश में वित्त वर्ष 2020-21 में ठंडे पानी में 800 मीट्रिक टन ट्राउट मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा था। 2021-22 साल के लिए 950 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। मत्स्य पालन विभाग ने ट्राउट मछली की बिक्री के लिए 940 ट्राउट इकाइयां विकसित करने के लिए महत्वाकांक्षी विपणन नीति तैयार की है। विभाग फिश वैन के माध्यम से ट्राउट मछली के विपणन के लिए इस वित्त वर्ष के दौरान ट्राउट क्लस्टर स्थापित कर रहा है। राज्य में ट्राउट मछली के उत्पादन में से 50 फीसदी की बिक्री दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों के पांच सितारा होटलों में की जा रही है, लेकिन कोविड काल के दौरान मांग में कमी आई है।