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हिमाचल में 20 तरह के ये कानून हुए निरस्त, विधानसभा में हंगामे के बीच विधेयक पारित

Wed, 28 Aug 2019 06:32 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 28 Aug 2019 06:32 PM IST
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20 kinds of these laws repealed in Himachal during opposition ruckus in himachal assemly
प्रतीकात्मक तस्वीर

राज्य विधानसभा में बुधवार को भारी हंगामे के बीच हिमाचल प्रदेश निरसन विधेयक 2019 ध्वनिमत से पारित हुआ। माकपा और कांग्रेस विधायकों ने प्रदेश सरकार पर विधेयक पारित करने के लिए जल्दबाजी का आरोप लगाया।

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कहा कि दिल्ली दरबार को खुश करने के लिए बिना चर्चा के सरकार ने विधेयक लाया है। निरसन विधेयक 2019 पारित होने से हिमाचल में बीस तरह के पुराने कानून निरस्त हो गए हैं। इस विधेयक को लेकर कानून मंत्री सुरेश भारद्वाज और नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
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विधेयक पर आपत्ति जताते हुए माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सदन का काम कानून बनाने का होता है। प्रदेश सरकार उल्टी गंगा बहाते हुए कानूनों को निरस्त करने पर जुटी है।
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उन्होंने कहा कि हर कानून का औचित्य होता है। सरकार गैर जरूरी बताते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम को भी निरस्त कर रही है। यह गलत है। इस कानून के निरस्त होने से बाजार पर किसी का भी नियंत्रण नहीं रहेगा।
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उन्होंने कहा कि इसको लेकर चर्चा करनी चाहिए। कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी निरसन विधेयक पर आपत्ति जताते हुए सेलेक्ट कमेटी में चर्चा करने की वकालत की। 

विपक्ष ने उठाए कई सवाल

20 kinds of these laws repealed in Himachal during opposition ruckus in himachal assemly

कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने कहा कि सदन का अधिकार है कि उन्हें पता हो निरसन विधेयक का क्या फायदा और नुकसान है। सरकार को जल्दबाजी न करते हुए सेलेक्ट कमेटी बनानी चाहिए। नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मोदी सरकार को खुश करने के लिए यह विधेयक लाया गया है।

यह विधेयक उसी तरह का मामला बन रहा है जैसे पर्यटन निगम के होटलों को बेचने का प्रस्ताव पोर्टल डालने का था। नेता विपक्ष के इस बयान पर कानून मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि जब नए कानून बन गए हैं तो पुराने कानूनों का कोई औचित्य नहीं है।

गैर जरूरी कानूनों के हटने से आम लोगों को सेवाएं प्रदान करने में आसानी होगी। अनावश्यक प्रक्रिया एवं रिकार्ड से भी बचा जा सकेगा। इस दौरान मंत्री और नेता विपक्ष के बीच काफी गहमागहमी हुई। इसी बीच ध्वनिमत से विधेयक को पास कर दिया गया।

इन कानूनों को किया गया निरस्त

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दी पंजाब स्मॉल टाउनज एक्ट 1934, दी पंजाब न्यू टाउनशिप फीस एक्ट 1950, हिमाचल प्रदेश निरसन अधिनियम 1954, हिमाचल प्रदेश निरसन अधिनियम 1964, दी पंजाब टाउन इम्प्रूवमेंट एक्ट 1965, हिमाचल प्रदेश पशुधन और पक्षी रोग अधिनियम 1968, हिमाचल प्रदेश निरसन अधिनियम 1968, हिमाचल प्रदेश निरसन अधिनियम 1972, हिमाचल प्रदेश भूमि विकास अधिनियम 1973, हिमाचल प्रदेश ट्रैक्टर खेती अधिनियम 1972, हिमाचल प्रदेश निरसन अधिनियम 1973, हिमाचल प्रदेश भंडारण अधिनियम 1976, हिमाचल प्रदेश निरसन अधिनियम 1976, हिमाचल प्रदेश निरसन अधिनियम 1978,  आवश्यक वस्तु (हिमाचल प्रदेश संशोधन) अधिनियम 1986, विद्युत (प्रदाय) हिमाचल प्रदेश संशोधन अधिनियम 1999 संख्या चार, विद्युत (प्रदाय) हिमाचल प्रदेश संशोधन अधिनियम 1999 संख्या आठ, हिमाचल प्रदेश धूम्रपान प्रतिषेध और अधूम्रसेवी स्वास्थ्य संरक्षण (निरसन) अधिनियम 2009, हिमाचल प्रदेश प्राइवेट क्लिनिकल स्थापन (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) निरसन अधिनियम 2013 और हिमाचल प्रदेश निरसन अधिनियम 2017 को प्रदेश सरकार ने निरस्त कर दिया है।

अधिवक्ता कल्याण निधि विधेयक भी पारित

हिमाचल प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक 2019 भी पारित हो गया है। कानून मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बुधवार को संशोधन विधेयक को सदन पटल पर रखा। अब वकालतनामे में दस के बदले 25 रुपये की स्टैंप लगेगी।

इसके अलावा प्रदेश में काम कर रहे वकीलों की मृत्यु पर वित्तीय राशि 1.50 लाख से बढ़ाकर 2.25 लाख करने के अलावा गंभीर बीमारियों से पीड़ित वकील को 25 हजार की जगह एक से दो लाख रुपये देने जैसे प्रावधान कर दिए हैं। मंत्रिमंडल की पिछली बैठक में इस संशोधन को अनुमति प्रदान की गई थी।

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