शिक्षा विभाग में जलवाहकों के स्थान पर होगी बहुउद्देशीय कर्मचारियों की भर्ती
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हिमाचल में शिक्षा विभाग में अंशकालिक जलवाहकों के स्थान पर बहुउद्देशीय कर्मचारियों की भर्ती होगी। ये जलवाहक के अलावा हर तरह का कार्य करेंगे। राज्य सरकार इस बारे में विचार-विमर्श कर रही है।
बुधवार को प्रश्नकाल में यह जानकारी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने विधायकों के सवालों के जवाब में दी। उन्होंने कहा कि अंशकालिक जलवाहकों के पद डाइंग काडर हैं। अंशकालिक जलवाहकों के इन पदों को केवल वहीं भरा जा रहा है, जहां किन्हीं कारणों से इनकी रिक्तियां हैं।
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सरकाघाट के भाजपा विधायक कर्नल इंद्र सिंह के सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल में विद्यालयों में अंशकालिक जलवाहकों को लगाने की पॉलिसी 1991-92 से है। 14 साल से कर्मचारियों को नियमित करने की नीति है।
जिन लोगों को नियमित कर दिया जाता है, उनके पद खुद ही समाप्त हो जाते हैं। ये भर्तियां नियम -12 के अनुसार की जा रही थीं। मगर 15 मई 2015 के हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद नियम - 12 निकाल दिया गया था।
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बाद में यह भर्तियां बंद हो गईं। सरकार ने इस बारे में उच्चतम न्यायालय में अपील की, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश को स्टे कर दिया गया। यह मामला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के ध्यान में लाया गया। अंशकालिक जलवाहकों के 355 पद खाली पड़े हैं।
इनमें से 260 प्रारंभिक और 95 उच्च शिक्षा विभाग में रिक्त चल रहे हैं। जो पद खाली पडे़ हैं वे भरे जा रहे हैं, मगर आवेदन केवल उन्हीं स्कूलों के ज्यादा आ रहे हैं, जहां रिक्तियां नहीं हैं। इसलिए नाममात्र के पद भरे जा सके हैं। इस बारे में किन्नौर के कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी और सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी अनुपूरक प्रश्न किए।
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अब स्कूलों में पानी पिलाने का काम कम, दूसरे काम ज्यादा : जयराम
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के जवाब पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी इस मामले पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आज लगभग हर स्कूल में पीने के पानी के नल लग गए हैं। ऐसे में अब स्कूलों में जलवाहकों से ज्यादा बहुउद्देश्यीय कर्मचारियों का काम है।
उन्होंने कहा कि ऐसा कोई दिन नहीं, जब सरकार के पास अंशकालिक जलवाहकों के पद भरने के लिए आवेदन नहीं आते हों। मगर ये ऐसे स्कूलों से आ रहे हैं, जहां इनके पद खत्म हो चुके हैं।
वर्तमान में स्कूलों की संख्या भी बढ़ गई है। हर स्कूल में बहुउद्देश्यीय कर्मचारियों की जरूरत महसूस की जा रही है। अब स्कूलों में पानी पिलाने का काम भी कम है और अन्य काम ज्यादा हैं। ऐेसी स्थिति में नया प्रस्ताव तैयार कर बहुउद्देश्यीय कर्मचारियों की भर्ती करने का विचार किया जा रहा है।