हिमाचल में अवैध खनन करने वाले नपेंगे, दो साल की होगी कैद, पांच लाख जुर्माना
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अवैध खनन करने पर अब एक साल की बजाय दो साल की कैद और 25 हजार की जगह पांच लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों सजाएं होंगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बुधवार को विधानसभा में नियम 130 के तहत उठाए गए मामले का जवाब देते हुए यह जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि अवैध खनन में संलिप्त दोषियों को सजा देने के प्रावधानों को सरकार और कड़ा करने जा रही है। अवैध खनन से किसी को भी रातोंरात करोड़पति नहीं बनने देंगे।
सीएम ने कहा कि प्रदेश में अब रात आठ से सुबह छह बजे तक खनन सामग्री ढुलाई पर रोक रहेगी। नदी-नालों में मशीनों से खनन पर 50 हजार जुर्माना लगेगा।
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मशीनें और गाड़ियां भी जब्त होंगी। प्रदेश में ड्रग माफिया के साथ- साथ अब खनन माफिया के खिलाफ भी बड़े स्तर पर अभियान चलेगा। पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने और अवैध खनन के खिलाफ प्रदेश की जनता को आगे आना होगा।
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पंजाब-हरियाणा से सटे क्षेत्रों में अधिक निगरानी की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वन क्षेत्र बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस साल 26 लाख पौधे रोपे गए हैं।
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साल 2003 से 2017 तक प्रदेश के वन आवरण में 747 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। प्लास्टिक पैकिंग में आने वाले चिप्स, टॉफी, चाकलेट, दूध आदि का पूर्ण समाधान नहीं होना चिंताजनक है।
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर एनजीटी ने लगाई रोक
ख्यमंत्री ने बताया कि बीते दिनों ही एनजीटी ने बद्दी, परवाणू और कालाअंब में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग न लगाने और ऐसे पुराने उद्योगों को विस्तार देने पर रोक लगाई है।
प्रदेश में 10 माइक्रोन से कम आकार के धूल कण प्रदूषक का घनत्व सात शहरों बद्दी, नालागढ़, डमटाल, कालाअंब, परवाणू, पांवटा साहिब और सुंदरनगर में निर्धारित मात्रा से अधिक पाया गया है।
जागरूकता के अभाव में हम भी काटते थे पेड़
मुख्यमंत्री ने बताया जब वे गांव में रहते तो जागरूकता के अभाव में पेड़ कटान करते थे, लेकिन अब समय बदल गया है। पेड़ों को जो पहले काटते थे, अब इन्हें बचाने को खड़े हो रहे हैं।
हमारी सरकार ने वन काटुओं पर शिकंजा कसा है। बीते डेढ़ साल में बड़े पेड़ कटान का कोई मामला नहीं आया। प्रदेश में आम के पेड़ काटने की शिकायतें मिल रही हैं। इसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी।