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नगर पार्षदों का सैर सपाटा शहरवासियों पर पड़ा भारी
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अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। नगर निगम के पार्षदों का सैर सपाटा हजारों शहरवासियों पर भारी पड़ रहा है। जनता को राहत देने और नए विकासकार्य करने के लिए बुलाई दो अहम बैठकें पार्षदों के न होने से टल गईं। पिछले महीने आचार संहिता के कारण सदन नहीं हो पाया था। अब नए साल की पहली जीएफसी और एफसीपीसी की बैठक भी पार्षदों के न होने के कारण 22 जनवरी तक टाल दी गईं। इनमें भी ज्यादातर भाजपा पार्षद शामिल हैं जो जनता को राहत देने के लिए एक दिन का वक्त नहीं निकाल पा रहे।
महापौर के अनुसार शुक्रवार को दोनों कमेटियों की बैठक बुलाई थी। लेकिन जीएफसी और एफसीपीसी में शामिल ज्यादातर पार्षद शहर से बाहर हैं। इसीलिए बैठक से एक दिन पहले ही इन्हें टालने का फैसला ले लिया गया। बैठक में आठ करोड़ से सड़कों की टारिंग करने, कई वार्डों में सड़कों-रास्तों की मरम्मत करने, गोबर खाद की कीमतें तय करने आदि मुद्दों पर फैसले लिए जाने थे। लेकिन जनता को इसके लिए अभी इंतजार करना होगा।
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पार्षद बोले, मेयर ने टाली बैठक
जीएफसी में शामिल कांग्रेस पार्षद राकेश चौहान ने कहा कि वह शहर में है लेकिन मेयर ने ही बैठक रद्द कर दी। कहा कि वह हमेशा बैठकों में आते हैं, सिर्फ भाजपा पार्षदों के न आने के कारण बैठक टली है। पार्षदों को बैठक में आना चाहिए ताकि लोगों से जुड़े फैसलों में देरी न हो। पार्षद अर्चना धवन ने कहा कि निगम ने बैठक टाली है।
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महापौर बोलीं, पार्षदों के चलते टाली बैठक
मेयर कुसुम सदरेट ने कहा कि ज्यादातर पार्षद शहर में नहीं है। इसलिए बैठक टालनी पड़ी। भाजपा और कांग्रेस के कई पार्षद बैठक में नहीं आ रहे थे जिसके चलते अब 22 जनवरी को बैठक बुलाने का फैसला लिया है।