{"_id":"5b7856c142c792463c04f6e8","slug":"191534613185-shimla-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कभी भी धंस सकता है ऐतिहासिक रिज मैदान, दरारें बढ़ीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कभी भी धंस सकता है ऐतिहासिक रिज मैदान, दरारें बढ़ीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 19 Aug 2018 12:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐतिहासिक रिज मैदान के धंस रहे एक हिस्से में दरारें बढ़ गई हैं। यह कभी भी ढह सकता है। 14 अगस्त को मूसलाधार बारिश के बाद से दरारें लगातार बढ़ती जा रही हैं। शनिवार को दरारें और बढ़ गई हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन ने अभी तक बचाव कार्य शुरू नहीं किया है।
विज्ञापन
नगर निगम ने दो दिन पहले दरारें बंद करने के लिए इसमें सीमेंट भर दिया था। साथ ही बैरिकेटड्स लगाकर यहां पैदल आवाजाही भी बंद कर दी है। लेकिन दो दिन में ही निगम की इस लीपापोती की पोल खुल गई। अब यह दरारें एक बार फिर खुल गई हैं। अब सीमेंट से भी निगम इनको बंद नहीं कर पा रहा।
विज्ञापन
ऐसे में यदि फिर बारिश होती है तो पानी इसमें रिस सकता है। इससे इस हिस्सा के ढहने का खतरा बढ़ जाएगा। गेयटी थियेटर के सामने वाले इस हिस्से में रिज करीब एक फीट तक नीचे धंस चुका है। इस हिस्से में रैलिंग भी टूट गई है। उधर, निगम प्रशासन का कहना है कि बरसात थमने के बाद रिज के इस हिस्से में डंगा लगाया जाएगा।
विज्ञापन
रिज टैंक में भी दरारें, निगम लापरवाह
रिज टैंक के भी छत वाले हिस्से में दरारें आ गई हैं। करीब छह माह पहले सफाई के दौरान टैंक में यह दरारें देखी गईं थीं। उस समय निगम ने आईआईटी एक्सपर्ट की मदद से इसे दुरुस्त करने की बात कही थी। लेकिन अभी तक न एक्सपर्ट आए और न ही मरम्मत की गई। इससे पहले तिब्बती मार्केट का हिस्सा भी धंस चुका है जिससे भारी तबाही हुई थी। निगम ने इसके बाद यहां रिटेनिंग वाल और मल्टी प्लेक्स बनाने जैसी योजनाएं बनाई थीं लेकिन यह सभी सालों से कागजों में ही है।
बरसात के बाद शुरू करेंगे काम
अभी मौसम खराब है जिसके कारण काम शुरू नहीं कर पा रहे। बरसात थमते ही हमारी प्राथमिकता रहेगी कि इस हिस्से की मरम्मत की जाए। रिज शहर का सबसे अहम हिस्सा है, इसे धंसने नहीं देंगे। - कुसुम सदरेट, मेयर नगर निगम शिमला