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अगले दो महीने भी फ्लैट रेट पर भरना पड़ेगा पानी का बिल
Updated Fri, 20 Oct 2017 10:18 PM IST
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शिमला। शहरवासियों को पानी के भारी भरकम बिलों से अभी राहत मिलने वाली नहीं है। अगले दो महीने भी फ्लैट रेट पर ही बिल चुकाना पड़ेगा। नए मीटर लगने के बावजूद नगर निगम ने फिलहाल मीटर रीडिंग पर बिल जारी करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में हजारों शहरवासियों को अभी कई महीने और जेब ढीली करनी होगी।
नगर निगम ने पानी के बिल जारी करने के लिए हाल ही में टेंडर किए थे। इसी हफ्ते ये टेंडर खुलने थे। लेकिन आचार संहिता के चलते अब टेंडर प्रक्रिया 20 दिसंबर के बाद ही आगे बढ़ पाएगी। इससे पहले निगम ने सितंबर से मीटर रीडिंग पर पानी के बिल जारी करने का दावा किया था। फिर नए मीटरों में खराबी आने और नौ हजार मीटर न बदले जाने के कारण अक्तूबर से रीडिंग पर बिल देने की बात कही। लेकिन अब स्थिति यह है कि निगम दिसंबर तक रीडिंग पर पानी के बिल जारी ही नहीं कर पाएगा। चुनाव के बाद जब टेंडर खुलेंगे तभी बिल जारी करने का काम आउटसोर्स किया जा सकेगा। नगर निगम के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल का कहना है कि टेंडर की प्रक्रिया चुनाव के बाद ही आगे बढ़ पाएगी।
इसलिए भी काम में हुई देरी
दरअसल निगम ने पहले सैहबकर्मियों के माध्यम से पानी के बिल जारी करने का प्लान तैयार किया था। लेकिन ऐन मौके पर यह कर्मचारी काम से मुकर गए। निगम के पास खुद भी इतने कर्मचारी नहीं थे जो रीडिंग लेकर हर माह बिल जारी कर सके। ऐसे में निगम के पास काम आउटसोर्स करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था। निगम ने तुरंत टेंडर तो किए लेकिन अब आचार संहिता के चलते यह प्रक्रिया 20 दिसंबर के बाद ही आगे बढ़ पाएगी। वहीं, हर वार्ड में नए मीटर भी नहीं लग पाए हैं। अभी 24 हजार में से 16 हजार मीटर ही बदले जा सके हैं।
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24 हजार से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ रहा बोेझ
फ्लैट बिल का बोझ शहर के करीब 24 हजार घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। इन्हें अगस्त तक पहले ही फ्लैट रेट पर बिल चुकाना पड़ा है। अब अगले दो महीने भी इन्हें 392 रुपये प्रतिमाह की दर से बिल भरना होगा। वहीं, आठ हजार से अधिक कामर्शियल उपभोक्ताओं को मीटर रीडिंग पर बिल जारी हो रहे हैं।
कोट्स
हमने कोशिश की है कि जल्द मीटर रीडिंग पर बिल जारी हों। लेकिन मीटरों को लेकर आ रही शिकायतों के चलते काम में देरी हो गई। अफसरों से बात करूंगी कि कैसे जल्द रीडिंग पर बिल जारी करने काम शुरू हो सकता है।
कुसुम सदरेट, नगर निगम महापौर
--------------------
शिमला शहरी सीट के टिकट आवंटन पर कांग्रेस में बगावत
सब हेड
हरीश जनारथा ने किया शक्ति प्रदर्शन, समर्थकों ने 22 तक हाईकमान को दिया अल्टीमेटम
क्रासर
टिकट न बदला तो जनारथा समर्थक देंगे इस्तीफा
बोले जनारथा-जैसा समर्थक चाहेंगे वैसा ही करेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कांग्रेस के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने के बाद शिमला शहरी सीट पर बगावत हो गई है। यहां से टिकट हरभजन सिंह को देने और हरीश जनारथा का टिकट कटने पर जनारथा समर्थक भड़क गए हैं। नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक प्रस्ताव पारित कर हाईकमान को 22 अक्तूबर तक टिकट बदलकर हरीश जनारथा देने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि ऐसा नहीं किया गया तो तमाम मौजूद नेता और कार्यकर्ता सामूहिक इस्तीफा देंगे।
यहां एक निजी बैंक्वेट हॉल में जनारथा सहित कांग्रेस के नाराज वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मेयर, पार्षदों और कार्यकर्ताओं व समर्थकों ने भाग लिया। जनारथा ने मौजूद भीड़ का इतनी तादाद में जुटने और प्यार जताने के लिए आभार जताते हुए हाईकमान से आग्रह किया कि वह जन भावनाओें और उनके कार्यों को देखते हुए शिमला शहरी के टिकट आवंटन पर पुनर्विचार करे।
पूर्व मेयर जैनी प्रेम, सोहन लाल, मनोज कुमार, पूर्व पार्षद वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोहन लाल, पूर्व डिप्टी मेयर शशि शेखर चीनू, पार्षद अशोक सूद, ओम सूद, राजेंद्र जिंदा, सुशांत कपरेट, व्यापार मंडल के अध्यक्ष व नगर निगम पार्षद इंद्रजीत के साथ सोनिया चौहान, देवेंद्र चौहान, अतुल गौतम ,नरेश गांधी, मुफ्ती मोहम्मद शफी काजमी, पारचिनार सभा के प्रधान परमजीत सिंह, गुरुद्वारा साहिब संजौली कमेटी उपाध्यक्ष रविंद्र सिंह बंगा, अधिवक्ता चंद्र मोहन के साथ मौजूद कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हरीश जनारथा हमेशा जनता के बीच में रहे हैं। हाईकमान ने उनको टिकट न देकर जनभावनाओं को नजरअंदाज किया है। ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिया है, जो जनता के बीच नहीं रहे। एक वक्ता ने कहा कि पार्टी ने उसे टिकट दिया जो पांच साल में एक कमरे से बाहर नहीं निकले। उनकी नाराजगी गलत टिकट आवंटन से है, पार्टी से नहीं। वक्ताओं ने चेताया कि यदि शिमला सीट को जीतना है, तो पार्टी को टिकट बदलना ही होगा। इन नेताओं ने जनारथा का खुलकर समर्थन करने का एलान भी कर दिया। कार्यकर्ताओं ने जनारथा के समर्थन में खुलकर नारेबाजी भी की।
भज्जी को टिकट मिलने की सबसे ज्यादा खुशी भाजपा को
वक्ताओं ने कहा कि भज्जी को जानते सब हैं, लेकिन मानता कोई नहीं है। क्योंकि उन्होंने किसी का साथ नहीं दिया। पूर्व मेयर सोहन लाल ने कहा कि 22 तक फैसला आने का इंतजार करेंगे, वहीं पार्टी हाईकमान से भी मिलकर अवगत करवाएंगे। सुशांत कपरेट ने कहा कि जनारथा हमेशा एनएसयूआई और युवा कांग्रेस में भड़े भाई की भूमिका में रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भज्जी को टिकट मिलने से सबसे अधिक खुशी भाजपा को हुई है, चूंकि वह शिमला की सीट जीती मानने लगी है।
इस तरह निकाल देगी हाईकमान, कभी सोचा न था : जनारथा
भावुक हुए जनारथा ने भी खुलकर नाराजगी जताई। कहा कि हाईकमान मुझे इस तरह दूध से मक्खी की तरह निकाल देगी, यह सोचा नहीं था। समर्थकों से कहा कि आपका अहसान कभी नहीं भूलूंगा। 22 अक्तूबर तक हाईकमान के फैसले का इंतजार करूंगा, फै सला न बदला तो जो आप कहेंगे वही करूंगा। हाईकमान ने मेरी इज्जत नहीं रखी, अब अपनी और आपकी इज्जत के लिए लड़ूंगा। मुझे कुछ नहीं पता कि मेरा टिकट क्यों काटा। मैं काम में लगा रहा और वो मेरा टिकट काट गए। उन्हें अचानक दिल्ली बुलाया गया और कहा कि उन्हें वे टिकट नहीं दे पाएंगे। सीएम वीरभद्र सिंह उनके लिए लड़ते रहे। ऐसा क्यों हुआ, मेरी गलती क्या रही, हाईकमान बताए। एक गलत साइन ने उनका कैरियर तबाह किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसे व्यक्ति को टिकट दे जो सीट जीते, तो वे स्वयं मिलकर उसके लिए काम करेंगे। वह कांग्रेस छोड़कर कहीं नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि वे कार्यकर्ताओं की भावनाओं का ध्यान रखेंगे और यदि वे चुनाव लड़ेंगे तो उन लोगों के लिए जो साथ खड़े हैं और उन लोगों को बताने के लिए लड़ेंगे, जिन्होंने गलत टिकट दिया है। जनता व समर्थक जो फैसला लेंगे, उन्हें मान्य होगा।
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नगर निगम ने पानी के बिल जारी करने के लिए हाल ही में टेंडर किए थे। इसी हफ्ते ये टेंडर खुलने थे। लेकिन आचार संहिता के चलते अब टेंडर प्रक्रिया 20 दिसंबर के बाद ही आगे बढ़ पाएगी। इससे पहले निगम ने सितंबर से मीटर रीडिंग पर पानी के बिल जारी करने का दावा किया था। फिर नए मीटरों में खराबी आने और नौ हजार मीटर न बदले जाने के कारण अक्तूबर से रीडिंग पर बिल देने की बात कही। लेकिन अब स्थिति यह है कि निगम दिसंबर तक रीडिंग पर पानी के बिल जारी ही नहीं कर पाएगा। चुनाव के बाद जब टेंडर खुलेंगे तभी बिल जारी करने का काम आउटसोर्स किया जा सकेगा। नगर निगम के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल का कहना है कि टेंडर की प्रक्रिया चुनाव के बाद ही आगे बढ़ पाएगी।
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इसलिए भी काम में हुई देरी
दरअसल निगम ने पहले सैहबकर्मियों के माध्यम से पानी के बिल जारी करने का प्लान तैयार किया था। लेकिन ऐन मौके पर यह कर्मचारी काम से मुकर गए। निगम के पास खुद भी इतने कर्मचारी नहीं थे जो रीडिंग लेकर हर माह बिल जारी कर सके। ऐसे में निगम के पास काम आउटसोर्स करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था। निगम ने तुरंत टेंडर तो किए लेकिन अब आचार संहिता के चलते यह प्रक्रिया 20 दिसंबर के बाद ही आगे बढ़ पाएगी। वहीं, हर वार्ड में नए मीटर भी नहीं लग पाए हैं। अभी 24 हजार में से 16 हजार मीटर ही बदले जा सके हैं।
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24 हजार से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ रहा बोेझ
फ्लैट बिल का बोझ शहर के करीब 24 हजार घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। इन्हें अगस्त तक पहले ही फ्लैट रेट पर बिल चुकाना पड़ा है। अब अगले दो महीने भी इन्हें 392 रुपये प्रतिमाह की दर से बिल भरना होगा। वहीं, आठ हजार से अधिक कामर्शियल उपभोक्ताओं को मीटर रीडिंग पर बिल जारी हो रहे हैं।
कोट्स
हमने कोशिश की है कि जल्द मीटर रीडिंग पर बिल जारी हों। लेकिन मीटरों को लेकर आ रही शिकायतों के चलते काम में देरी हो गई। अफसरों से बात करूंगी कि कैसे जल्द रीडिंग पर बिल जारी करने काम शुरू हो सकता है।
कुसुम सदरेट, नगर निगम महापौर
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शिमला शहरी सीट के टिकट आवंटन पर कांग्रेस में बगावत
सब हेड
हरीश जनारथा ने किया शक्ति प्रदर्शन, समर्थकों ने 22 तक हाईकमान को दिया अल्टीमेटम
क्रासर
टिकट न बदला तो जनारथा समर्थक देंगे इस्तीफा
बोले जनारथा-जैसा समर्थक चाहेंगे वैसा ही करेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कांग्रेस के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने के बाद शिमला शहरी सीट पर बगावत हो गई है। यहां से टिकट हरभजन सिंह को देने और हरीश जनारथा का टिकट कटने पर जनारथा समर्थक भड़क गए हैं। नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक प्रस्ताव पारित कर हाईकमान को 22 अक्तूबर तक टिकट बदलकर हरीश जनारथा देने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि ऐसा नहीं किया गया तो तमाम मौजूद नेता और कार्यकर्ता सामूहिक इस्तीफा देंगे।
यहां एक निजी बैंक्वेट हॉल में जनारथा सहित कांग्रेस के नाराज वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मेयर, पार्षदों और कार्यकर्ताओं व समर्थकों ने भाग लिया। जनारथा ने मौजूद भीड़ का इतनी तादाद में जुटने और प्यार जताने के लिए आभार जताते हुए हाईकमान से आग्रह किया कि वह जन भावनाओें और उनके कार्यों को देखते हुए शिमला शहरी के टिकट आवंटन पर पुनर्विचार करे।
पूर्व मेयर जैनी प्रेम, सोहन लाल, मनोज कुमार, पूर्व पार्षद वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोहन लाल, पूर्व डिप्टी मेयर शशि शेखर चीनू, पार्षद अशोक सूद, ओम सूद, राजेंद्र जिंदा, सुशांत कपरेट, व्यापार मंडल के अध्यक्ष व नगर निगम पार्षद इंद्रजीत के साथ सोनिया चौहान, देवेंद्र चौहान, अतुल गौतम ,नरेश गांधी, मुफ्ती मोहम्मद शफी काजमी, पारचिनार सभा के प्रधान परमजीत सिंह, गुरुद्वारा साहिब संजौली कमेटी उपाध्यक्ष रविंद्र सिंह बंगा, अधिवक्ता चंद्र मोहन के साथ मौजूद कांग्रेस नेताओं ने कहा कि हरीश जनारथा हमेशा जनता के बीच में रहे हैं। हाईकमान ने उनको टिकट न देकर जनभावनाओं को नजरअंदाज किया है। ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिया है, जो जनता के बीच नहीं रहे। एक वक्ता ने कहा कि पार्टी ने उसे टिकट दिया जो पांच साल में एक कमरे से बाहर नहीं निकले। उनकी नाराजगी गलत टिकट आवंटन से है, पार्टी से नहीं। वक्ताओं ने चेताया कि यदि शिमला सीट को जीतना है, तो पार्टी को टिकट बदलना ही होगा। इन नेताओं ने जनारथा का खुलकर समर्थन करने का एलान भी कर दिया। कार्यकर्ताओं ने जनारथा के समर्थन में खुलकर नारेबाजी भी की।
भज्जी को टिकट मिलने की सबसे ज्यादा खुशी भाजपा को
वक्ताओं ने कहा कि भज्जी को जानते सब हैं, लेकिन मानता कोई नहीं है। क्योंकि उन्होंने किसी का साथ नहीं दिया। पूर्व मेयर सोहन लाल ने कहा कि 22 तक फैसला आने का इंतजार करेंगे, वहीं पार्टी हाईकमान से भी मिलकर अवगत करवाएंगे। सुशांत कपरेट ने कहा कि जनारथा हमेशा एनएसयूआई और युवा कांग्रेस में भड़े भाई की भूमिका में रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भज्जी को टिकट मिलने से सबसे अधिक खुशी भाजपा को हुई है, चूंकि वह शिमला की सीट जीती मानने लगी है।
इस तरह निकाल देगी हाईकमान, कभी सोचा न था : जनारथा
भावुक हुए जनारथा ने भी खुलकर नाराजगी जताई। कहा कि हाईकमान मुझे इस तरह दूध से मक्खी की तरह निकाल देगी, यह सोचा नहीं था। समर्थकों से कहा कि आपका अहसान कभी नहीं भूलूंगा। 22 अक्तूबर तक हाईकमान के फैसले का इंतजार करूंगा, फै सला न बदला तो जो आप कहेंगे वही करूंगा। हाईकमान ने मेरी इज्जत नहीं रखी, अब अपनी और आपकी इज्जत के लिए लड़ूंगा। मुझे कुछ नहीं पता कि मेरा टिकट क्यों काटा। मैं काम में लगा रहा और वो मेरा टिकट काट गए। उन्हें अचानक दिल्ली बुलाया गया और कहा कि उन्हें वे टिकट नहीं दे पाएंगे। सीएम वीरभद्र सिंह उनके लिए लड़ते रहे। ऐसा क्यों हुआ, मेरी गलती क्या रही, हाईकमान बताए। एक गलत साइन ने उनका कैरियर तबाह किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसे व्यक्ति को टिकट दे जो सीट जीते, तो वे स्वयं मिलकर उसके लिए काम करेंगे। वह कांग्रेस छोड़कर कहीं नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि वे कार्यकर्ताओं की भावनाओं का ध्यान रखेंगे और यदि वे चुनाव लड़ेंगे तो उन लोगों के लिए जो साथ खड़े हैं और उन लोगों को बताने के लिए लड़ेंगे, जिन्होंने गलत टिकट दिया है। जनता व समर्थक जो फैसला लेंगे, उन्हें मान्य होगा।