{"_id":"59416c084f1c1b0c748b4696","slug":"181497459720-shimla-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपनी संस्कृति अपने गीत पर बटोरीं तालियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपनी संस्कृति अपने गीत पर बटोरीं तालियां
Updated Wed, 14 Jun 2017 10:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आनी (कुल्लू)।
निरमंड स्थित डे केयर सेंटर में क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों और युवा कवियों के लिए हिम संस्कृति संस्था एवं जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग कुल्लू के तत्वाधान में कवि सम्मेलन और निरमंड के इतिहास पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
हिम संस्कृति के सचिव लीलाचंद जोशी ने बताया कि कवि सम्मेलन का शुभारंभ खंड चिकित्सा अधिकारी निरमंड डॉ. संजय आनंद ने किया। कार्यक्रम के पहले सत्र में कवि सम्मेलन का आगाज कवि कुशलानंद भारद्वाज ने किया। उन्होंने देव धरती है हिमाचल हमारा, अपनी संस्कृति अपने गीत कविता सुनाई। उन्होंने कविता से खूब तालियां बटोरीं। कवि केएन शास्त्री ने भगवान परशुराम की महिमा के बारे में कविता पाठ किया। साहित्यकार कृष्णानंद ने देश के वीरों को मेरा सलाम, राणा प्रताप जैसे शूरवीर है इस देश में, कवि नीरज शर्मा ने परीक्षा आई हम हुए बेचैन, उत्तर प्रश्न के झंझट में जवानी गई बीत, हेतराम ने राष्ट्रभाषा हिंदी में करे सब काम, यही है हिंदी का नाम, डॉ. रमेश ने पहाड़ी भाषा है क्या हम सबको नहीं ज्ञान, अपनी भाषा अपनी पहचान, कुमारी रंजना ने कब तक रोता रहेगा इंसान कविता प्रस्तुत की। त्रिलोका देवी ने अंबिका देवी भवानी तेरी जय कारा हो, लीलाचंद ने हम है सुदामा तुम हो कृष्ण कविता पाठ किया। श्याम दीवान ने देवभूमि निरमंड के इतिहास पर शोधपत्र प्रस्तुत किया।
इस मौके पर भजना देवी, अशोक कुमार, हरदयाल, योगराज, गुलेश्वरी शर्मा, शिवराज शर्मा, राजेंद्र कुमार, आईटीआई की छात्रा रंजना कुमारी, बरखा देवी, बबीता, सुरेखा वर्मा, बुद्धा देवी, अक्षय कुमार, देवी सिंह, उज्जवला भारद्वाज, सुरेश कुमार सहित 50 कवियों ने कविता प्रस्तुत की। कार्यक्रम के मुख्यातिथि बीएमओ डॉ. संजय आनंद ने कवि सम्मेलन और साहित्य गोष्ठी के समापन अवसर पर कहा कि कला संस्कृति साहित्य के आयोजन में सभी ने बेहतरीन कविता पाठ किया है। उन्होंने कहा कि हम सबको अपनी संस्कृति की पहचान बनानी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
निरमंड स्थित डे केयर सेंटर में क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों और युवा कवियों के लिए हिम संस्कृति संस्था एवं जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग कुल्लू के तत्वाधान में कवि सम्मेलन और निरमंड के इतिहास पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
हिम संस्कृति के सचिव लीलाचंद जोशी ने बताया कि कवि सम्मेलन का शुभारंभ खंड चिकित्सा अधिकारी निरमंड डॉ. संजय आनंद ने किया। कार्यक्रम के पहले सत्र में कवि सम्मेलन का आगाज कवि कुशलानंद भारद्वाज ने किया। उन्होंने देव धरती है हिमाचल हमारा, अपनी संस्कृति अपने गीत कविता सुनाई। उन्होंने कविता से खूब तालियां बटोरीं। कवि केएन शास्त्री ने भगवान परशुराम की महिमा के बारे में कविता पाठ किया। साहित्यकार कृष्णानंद ने देश के वीरों को मेरा सलाम, राणा प्रताप जैसे शूरवीर है इस देश में, कवि नीरज शर्मा ने परीक्षा आई हम हुए बेचैन, उत्तर प्रश्न के झंझट में जवानी गई बीत, हेतराम ने राष्ट्रभाषा हिंदी में करे सब काम, यही है हिंदी का नाम, डॉ. रमेश ने पहाड़ी भाषा है क्या हम सबको नहीं ज्ञान, अपनी भाषा अपनी पहचान, कुमारी रंजना ने कब तक रोता रहेगा इंसान कविता प्रस्तुत की। त्रिलोका देवी ने अंबिका देवी भवानी तेरी जय कारा हो, लीलाचंद ने हम है सुदामा तुम हो कृष्ण कविता पाठ किया। श्याम दीवान ने देवभूमि निरमंड के इतिहास पर शोधपत्र प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
इस मौके पर भजना देवी, अशोक कुमार, हरदयाल, योगराज, गुलेश्वरी शर्मा, शिवराज शर्मा, राजेंद्र कुमार, आईटीआई की छात्रा रंजना कुमारी, बरखा देवी, बबीता, सुरेखा वर्मा, बुद्धा देवी, अक्षय कुमार, देवी सिंह, उज्जवला भारद्वाज, सुरेश कुमार सहित 50 कवियों ने कविता प्रस्तुत की। कार्यक्रम के मुख्यातिथि बीएमओ डॉ. संजय आनंद ने कवि सम्मेलन और साहित्य गोष्ठी के समापन अवसर पर कहा कि कला संस्कृति साहित्य के आयोजन में सभी ने बेहतरीन कविता पाठ किया है। उन्होंने कहा कि हम सबको अपनी संस्कृति की पहचान बनानी है।
विज्ञापन