हिमाचल में 18 हजार लोगों को जल्द मिलेगी सामाजिक सुरक्षा पेंशन
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हिमाचल के 18,189 हजार लोगों को जल्द ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन मुहैया कराई जाएगी। सरकार का प्रयास है कि नए वित्त वर्ष में सभी लंबित मामले निपटा दिए जाएं। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने यह जानकारी सामाजिक एवं न्याय अधिकारिता मंत्री राजीव सैजल की अनुपस्थिति में विधायक रमेश धवाला की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी।
भरद्वाज ने कहा कि बीते 1 वर्ष के दौरान 15 जनवरी, 2019 तक सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 1,13,511 मामले स्वीकृत हैं। इसमें से 18,189 मामले लंबित हैं। विभाग को वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान 600 करोड़ का बजट उपलब्ध करवाया गया है, जो पहले से कहीं अधिक है। वर्ष 2015-16 में यह बजट महज 291.77 करोड़ का बजट था।
प्रदेश में इस समय 5,02,934 लोग सामाजिक सुरक्षा पेंशन ले रहे हैं, जिसमें 8 श्रेणी की पेंशन शामिल है। सरकार पेंशन के लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा कर देगी। इससे पहले सुखराम चौधरी ने पेंशन के लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने का आग्रह किया। विधायक जगत सिंह नेगी ने जनजातीय क्षेत्रों में पेंशन के लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने का आग्रह किया।
हमीरपुर से कांगड़ा भेजो काबिल अफसरों को
प्रश्नकाल के दौरान सदन का माहौल उस समय हंसी मजाक जैसा हो गया, जब धवाला ने मजाकिया लिहाज में सुरेश भारद्वाज से कहा - हमीरपुर जिले में काबिल ऑफिसर हैं। इन अफसरों का रुख कांगड़ा की ओर करो।
दरअसल धवाला ने अनुपूरक प्रश्न में पूछा - जिलों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के सैकड़ों मामले लंबित हैं लेकिन हमीरपुर ऐसा जिला है जहां 0-0-0 दिखाया गया है। यानी इससे पता चलता है कि हमीरपुर जिले में पेंशन का एक भी लंबित मामला लंबित नहीं है।
इससे यह भी जाहिर होता है कि हमीरपुर जिले में काबिल अफसर हैं, इन अफसर को जरा कांगड़ा की ओर भेजो ताकि वहां का आंकड़ा भी 0-0-0 हो जाए। इस पर सदन में खूब ठहाके लगे।
सरल होगी आपदा राहत की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि प्रदेश सरकार बरसात और प्राकृतिक आपदा प्रभावितों को समय रहते राहत प्रदान करने का प्रयास कर रही है। अब सरकार आपदा राहत पॉलिसी को सरल करेगी ताकि प्रभावितों को जटिल और लंबी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
आपदा ही स्थिति में पटवारी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण रहती है। यदि पटवारी गलत रिपोर्ट देंगे, तो सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधायक रामलाल ठाकुर के प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि अब टेक्नालाजी का जमाना है।
लोग मोबाइल पर फोटो खींचकर भी अफसरों को दिखा व भेज सकते हैं। इससे भी मौके की तस्वीर साफ की जा सकती है। रामलाल ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में बरसात में करीब 30 लोगों के घर क्षतिग्रस्त हो गए लेकिन उन्हें मुआवजा नहीं मिला।
पटवारी को रिपोर्ट तैयार करने को कहा, लेकिन पटवारी ने मौके पर आने से मना कर दिया। पटवारी कहता है कि मौके पर आकर मैंने अपनी बदली नहीं करानी है। जब डीसी को यह प्रस्ताव भेजे गए, वहां भी इन्हें लंबित रखा गया।
जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ पंचायतों में बरसात से हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिल पाया है। उन्होंने ऐसे मामलों में पटवारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। विधायक सुखराम चौधरी ने राहत मैनुवल में संशोधन की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर जिला में राहत एवं बचाव कार्य के लिए 6.75 करोड़ रुपये दिए गए हैं।