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सिर्फ होटलियरों पर मेहरबान सरकार, आम जनता को राहत नहीं
Updated Wed, 28 Mar 2018 10:36 PM IST
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अवैध भवन मालिक निराश, नहीं मिली राहत
सरकार केवल होटलियरों पर मेहरबान
अवैध भवन मालिकों को करना होगा इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अपने अवैध भवनों को नियमित करने के लिए सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे शहर के हजारों भवन मालिकों को फिर निराशा हाथ लगी है। सरकार ने होटलियरों को तो राहत दे दी लेकिन भवन मालिकों को अभी इंतजार करना होगा।
मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने उन होटलियरों को राहत देने का फैसला लिया है जिन्होंने अवैध निर्माण कर रखा है। इसमें धर्मशाला और कुल्लू मनाली के वे होटल शामिल हैं, जिन्होंने अवैध निर्माण कर रखा है। इनके बिजली और पानी तक के कनेक्शन काट दिए गए थे। इनको राहत देने के लिए सरकार ने टीसीपी एक्ट में संशोधन का फैसला लिया है। इसके अनुसार नियमों से अधिक फ्लोर बनाने वाले भवन मालिक अपना कारोबार जारी रख सकेंगे। भवन का जो हिस्सा अवैध होगा, उसे सील किया जाएगा। नियमों के अनुसार बने बाकी फ्लोर में कारोबार किया जा सकेगा। सरकार से इन्हें तो राहत मिल गई लेकिन आम जनता को कुछ नहीं मिला। अकेले राजधानी शिमला में चार हजार से अधिक भवन मालिक ऐसे हैं जो सालों से अपने मकान नियमित होने का इंतजार कर रहे हैं। अभी सरकार की ओर से इन्हें राहत नहीं मिली है।
इसीलिए अवैध हैं हजारों भवन
शहर के साथ लगते बाहरी इलाके पहले पंचायतों के अधीन थे। लोगों ने यहां अपनी मर्जी से बिना नक्शों के भवन बना रखे थे। अब नगर निगम और प्लानिंग एरिया में आने से इन पर भी नक्शे की शर्त लागू हो गई। नक्शा न होने से इनके मकान अभी तक अवैध हैं। मकान अवैध होने से इन्हें घरेलू दरों पर बिजली-पानी की सुविधा नहीं है। इन्हें महंगा बिल चुकाकर ये सुविधाएं लेनी पड़ रही हैं।
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सरकार केवल होटलियरों पर मेहरबान
अवैध भवन मालिकों को करना होगा इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अपने अवैध भवनों को नियमित करने के लिए सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे शहर के हजारों भवन मालिकों को फिर निराशा हाथ लगी है। सरकार ने होटलियरों को तो राहत दे दी लेकिन भवन मालिकों को अभी इंतजार करना होगा।
मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने उन होटलियरों को राहत देने का फैसला लिया है जिन्होंने अवैध निर्माण कर रखा है। इसमें धर्मशाला और कुल्लू मनाली के वे होटल शामिल हैं, जिन्होंने अवैध निर्माण कर रखा है। इनके बिजली और पानी तक के कनेक्शन काट दिए गए थे। इनको राहत देने के लिए सरकार ने टीसीपी एक्ट में संशोधन का फैसला लिया है। इसके अनुसार नियमों से अधिक फ्लोर बनाने वाले भवन मालिक अपना कारोबार जारी रख सकेंगे। भवन का जो हिस्सा अवैध होगा, उसे सील किया जाएगा। नियमों के अनुसार बने बाकी फ्लोर में कारोबार किया जा सकेगा। सरकार से इन्हें तो राहत मिल गई लेकिन आम जनता को कुछ नहीं मिला। अकेले राजधानी शिमला में चार हजार से अधिक भवन मालिक ऐसे हैं जो सालों से अपने मकान नियमित होने का इंतजार कर रहे हैं। अभी सरकार की ओर से इन्हें राहत नहीं मिली है।
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इसीलिए अवैध हैं हजारों भवन
शहर के साथ लगते बाहरी इलाके पहले पंचायतों के अधीन थे। लोगों ने यहां अपनी मर्जी से बिना नक्शों के भवन बना रखे थे। अब नगर निगम और प्लानिंग एरिया में आने से इन पर भी नक्शे की शर्त लागू हो गई। नक्शा न होने से इनके मकान अभी तक अवैध हैं। मकान अवैध होने से इन्हें घरेलू दरों पर बिजली-पानी की सुविधा नहीं है। इन्हें महंगा बिल चुकाकर ये सुविधाएं लेनी पड़ रही हैं।
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