गिरि के पानी में घोल दी मिट्टी, अफसरशाही बेखबर
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राजधानी की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना गिरि नदी में अवैध डंपिंग होने से शहर के लिए पानी की सप्लाई ठप हो गई है। नदी में फेंके मलबे से गाद इतनी बढ़ गई कि पानी की लिफ्टिंग बंद करनी पड़ी। हैरत इस बात की है कि अफसरशाही को इसकी जानकारी तक नहीं है कि कौन पानी में मिट्टी फेंक रहा है।
हालत यह है कि 20 एमएलडी की क्षमता वाली गिरि परियोजना से सप्लाई घटकर 12 एमएलडी रह गई है। इससे शिमला शहर में पेयजल शेड्यूल गड़बड़ा गया है। शहर के कई इलाकों में बुधवार को पानी की सप्लाई नहीं दी गई। हाईकोर्ट ने पेयजल परियोजनाओं और पानी के प्राकृतिक स्रोतों के निकट डंपिंग पर सख्त पाबंदी लगा रखी है। इसके बावजूद दो दिन से नदी में अवैध डंपिंग हो रही है।
नदी में गाद आने की सूचना मिलने पर पेयजल कंपनी के एजीएम राजेश कश्यप बुधवार को खुद मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों ने बताया पानी में इतनी गाद है कि इसे पीने योग्य नहीं बनाया जा सकता। ऐसे में इसकी लिफ्टिंग नहीं की जा सकती। कर्मचारियों ने बताया कि परियोजना से कुछ दूरी पर सैंज-चौपाल सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। लोनिवि इसका मलबा नदी में फेंक रहा है जिससे गाद आ गई है। उधर, लोनिवि मलबा फेंकने की बात से इंकार कर रहा है।
कंपनी का दावा कर दी है शिकायत, एसडीएम का इंकार
पेयजल कंपनी के अधिकारियों ने एसडीएम ठियोग से इसकी शिकायत की। एजीएम राजेश कश्यप ने बताया कि एसडीएम को इसकी शिकायत दी है। साथ ही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को भी स्थिति से अवगत करवाया गया है।
गाद थमने के बाद ही लिफ्टिंग सुचारु हो पाएगी। अभी दो पंप ही चल पा रहे हैं। उधर, एसडीएम ठियोग एमडी शर्मा ने कहा कि इस मामले की अभी कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसा है तो संबंधित विभाग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी महकमों के हाथ खड़े, जनता परेशान
नदी में हो रही अवैध डंपिंग पर सरकारी महकमे लीपापोती में जुट गए हैं। वन विभाग को तो इसकी सूचना तक नहीं है। अवैध डंपिंग पर कार्रवाई का जिम्मा वन विभाग पर है, लेकिन अभी तक न तो कोई डीआर कटी है और न ही कार्रवाई हुई है। उधर, लोनिवि कह रहा है कि उसने यह डंपिंग नहीं की है।
लेकिन भारी मात्रा में मलबा फेंके जाने से खुद को अनजान बताने वाले लोनिवि पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी कार्रवाई नहीं कर रहे। नदी में गाद इतनी ज्यादा है कि इसे पीने लायक बनाना मुश्किल हो रहा है। साथ लगते गांवों के लोगों को भी यही मटमैला पानी सप्लाई हो रहा है।
गाद के कारण नहीं कर पा रहे लिफ्टिंग
पेयजल कंपनी के एजीएम राजेश कश्यप ने कहा कि नदी में मलबा फेंके जाने के बाद पानी में गाद बढ़ गई है जिसके कारण शिमला के लिए पेयजल सप्लाई घटी है। इस बारे में प्रशासन और लोनिवि को जानकारी दी है।
इसकी सूचना नहीं
वन विभाग शिमला के सीसीएफ आरके गुप्ता ने कहा कि नदी में अवैध डंपिंग की सूचना नहीं है। विभाग वन भूमि पर अवैध डंपिंग करने वालों पर कार्रवाई कर सकता है। यदि यह निजी जमीन हुई तो विभाग कार्रवाई नहीं कर सकता। मामले का पता कर कड़ी कार्रवाई करेंगे।
शेड्यूल बिगड़ा, कई इलाकों में नहीं आया पानी
शिमला। गिरि परियोजना से सप्लाई घटने के कारण शिमला शहर को बुधवार को 46 एमएलडी पानी मिल पाया है। शहर के कई इलाकों में पानी की सप्लाई नहीं दी जा सकी। यूएस क्लब और टुटू एरिया में देर शाम तक पानी नहीं आया। उधर, नवबहार, मल्याणा, नेरीधार, शनान, हाउसिंग बोर्ड कालोनी, इंद्रनगर, मशोबरा, क्रेगनैनो में पानी की सप्लाई नहीं दी गई। इन इलाकों में अब आज पानी दिया जा सकता है।
कौन कर रहा डंपिंग, नहीं है जानकारी
ठियोग के अधिशासी अभियंता महेश कंवर ने कहा कि यह सड़क हमारे अधीन है, लेकिन यहां कौन अवैध डंपिंग कर रहा है, इसकी जानकारी नहीं। विभाग तो सड़क पक्की करवा रहा है। ऐसे में मलबा कहां से आएगा। जेई से भी इसकी रिपोर्ट ले ली है। अवैध डंपिंग के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।