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मंत्री की छापेमारी से जोगिंद्रनगर अस्पताल प्रबंधन में मचा हड़कंप
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने रविवार को जोगिंद्रनगर अस्पताल का निरीक्षण किया। अचानक अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री को देखकर अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। इस दौरान मंत्री ने मरीजों से बातचीत की और उनकी समस्याएं भी जानी। अस्पताल के हर रोगी वार्ड की स्वास्थ्य सुविधाएं जांची गई। दवा भंडारण का भी निरीक्षण किया।
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इस मौके पर उनके साथ एसडीएम अमित मेहरा, डीएसपी मदनकांत शर्मा, थाना प्रभारी संदीप शर्मा और मंत्री का निजी स्टाफ मौजूद रहा। तमाम गतिविधियों की वीडियो और फोटोग्राफी भी की गई। इससे पहले अस्पताल के पूर्व वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं शिशु विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. आरएल कौंडल ने स्वास्थ्य मंत्री को अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में अवगत करवाया।
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विधायक राणा ने मंत्री को बताईं समस्याएं
जोगिंद्रनगर के विधायक प्रकाश राणा ने स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार से सिविल अस्पताल की कई समस्याओं के बारे में बात की। विधायक ने सिविल अस्पताल में चल रहे रिक्त पदों को भरने सहित चौंतड़ा में सीएचसी और गुम्मा में पीएचसी खोलने की मांग रखी है।
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इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सीएम ने जो घोषणाएं क्षेत्र के लिए की हैं, उन्हें तुरंत अमलीजामा पहनाया जा रहा है। जोगिंद्रनगर विस क्षेत्र के चौंतड़ा और गुम्मा की जनता को भी जल्द सीएचसी और पीएचसी की सौगात मिलेगी। रिक्त पदों को भी भरा जाएगा।
महंगी और ब्रांडेड दवाएं लिखने पर नपे डॉक्टर
स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार अचानक जोगिंद्रनगर अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने बाहर से महंगी दवाएं लिखने पर दस्तावेज कब्जे में लिए और मौके पर ही डॉक्टर पर कार्रवाई के आदेश दिए। ड्यूटी में कोताही पर महिला कर्मी और अस्पताल में कम डिलीवरी पर भी उन्होंने फटकार लगाई।
40 मिनट के निरीक्षण में परमार ने अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा भी लिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल के रोगी वार्ड में दाखिल मरीजों से अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा दिए जा रहे उपचार की जानकारी भी ली। परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार के बार बार निर्देश करने के बावजूद डॉक्टर महंगी और ब्रांडेड दवाएं लिखकर आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं।
उधर, एसएमओ डा. जितेंद्र चौहान ने कहा कि मरीज इमरजेंसी में आया था। उसे एमआई हार्ट अटैक का स्ट्रोक पड़ा था। स्टॉक में दवाई न होने के कारण मरीज की जान बचाने के लिए बाजार से दवाइयां मंगवानी पड़ीं।