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पांच मुद्दों को लेकर ट्रेड यूनियन करेगी सत्याग्रह
Updated Sun, 07 Jan 2018 11:09 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला।
पांच मुद्दों को लेकर ट्रेड यूनियन जनवरी माह में प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सत्याग्रह आंदोलन करेगी। खाद्य वस्तु, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, मिड-डे मील, आशा वर्कर और मजदूरों का न्यूनतम वेतन 21 हजार करने को लेकर जिला मुख्यालयों पर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किए जाएंगे। जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का मुख्य मकसद केंद्र की मोदी सरकार को मजदूरों और लोगों के रोष से अवगत करवाना है। रविवार को कालीबाड़ी हाल में दोपहर बारह बजे शुरू हुए अधिवेशन में ट्रेड यूनियन के करीब दो सौ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी प्रतिनिधियों ने अधिवेशन में अपने विचार रखे और 22 जनवरी को होने वाले सत्याग्रह आंदोलन में भारी संख्या में लोगों के मौजूद रहने को लेकर प्लान भी तैयार किया। अधिवेशन का उद्घाटन सीटू जिला अध्यक्ष बिहारी सेवगी ने किया। जिला संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने हमेशा ही जनविरोधी निर्णय लेकर जनता के साथ धोखा किया है। वहीं मजदूर विरोधी श्रम कानून और अमीरपरस्त कानूनों को लागू करवाने पर जोर दिया जा रहा है। उधर, एटक के राज्य सचिव राकेश श्याम ने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार खाद्य वस्तु, पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी कर रही है। आरोप लगाया कि पूंजीपतियों की मिलीभगत के कारण महंगाई आसमान छू रही है। अधिवेशन के माध्यम से मांग की कि सरकार मजदूरों का न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये करे। मांग की है कि स्कीम वर्करों को 43वें राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार नियमित किया जाए। वर्ष 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पेंशन न देने को लेकर भी अधिवेशन में चर्चा की गई। कहा कि ट्रेड यूनियनों का संयुक्तमंच इसके खिलाफ भी आंदोलन तेज करेगा। इस मौके पर सीटू नेता रमाकांत मिश्रा, हिमी देवी, बाबू राम, एटक के राज्य अतिरिक्त सचिव राकेश श्याम, एटक प्रेस सचिव संजय शर्मा, इंटक के महासचिव बीएस चौहान ने भी अधिवेशन में संबोधन दिया। कहा कि दो फरवरी को केंद्रीय बजट के बाद शिमला, ठियोग, रामपुर और रोहड़ू में प्रदर्शन किए जाएंगे।
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शिमला।
पांच मुद्दों को लेकर ट्रेड यूनियन जनवरी माह में प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सत्याग्रह आंदोलन करेगी। खाद्य वस्तु, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, मिड-डे मील, आशा वर्कर और मजदूरों का न्यूनतम वेतन 21 हजार करने को लेकर जिला मुख्यालयों पर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किए जाएंगे। जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का मुख्य मकसद केंद्र की मोदी सरकार को मजदूरों और लोगों के रोष से अवगत करवाना है। रविवार को कालीबाड़ी हाल में दोपहर बारह बजे शुरू हुए अधिवेशन में ट्रेड यूनियन के करीब दो सौ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी प्रतिनिधियों ने अधिवेशन में अपने विचार रखे और 22 जनवरी को होने वाले सत्याग्रह आंदोलन में भारी संख्या में लोगों के मौजूद रहने को लेकर प्लान भी तैयार किया। अधिवेशन का उद्घाटन सीटू जिला अध्यक्ष बिहारी सेवगी ने किया। जिला संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने हमेशा ही जनविरोधी निर्णय लेकर जनता के साथ धोखा किया है। वहीं मजदूर विरोधी श्रम कानून और अमीरपरस्त कानूनों को लागू करवाने पर जोर दिया जा रहा है। उधर, एटक के राज्य सचिव राकेश श्याम ने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार खाद्य वस्तु, पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी कर रही है। आरोप लगाया कि पूंजीपतियों की मिलीभगत के कारण महंगाई आसमान छू रही है। अधिवेशन के माध्यम से मांग की कि सरकार मजदूरों का न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये करे। मांग की है कि स्कीम वर्करों को 43वें राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार नियमित किया जाए। वर्ष 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पेंशन न देने को लेकर भी अधिवेशन में चर्चा की गई। कहा कि ट्रेड यूनियनों का संयुक्तमंच इसके खिलाफ भी आंदोलन तेज करेगा। इस मौके पर सीटू नेता रमाकांत मिश्रा, हिमी देवी, बाबू राम, एटक के राज्य अतिरिक्त सचिव राकेश श्याम, एटक प्रेस सचिव संजय शर्मा, इंटक के महासचिव बीएस चौहान ने भी अधिवेशन में संबोधन दिया। कहा कि दो फरवरी को केंद्रीय बजट के बाद शिमला, ठियोग, रामपुर और रोहड़ू में प्रदर्शन किए जाएंगे।