सर्दी के मौसम में भी नहीं थम रहा स्क्रब टायफस का प्रकोप, 20 दिन में 15 मामले
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अब सर्दी के मौसम में भी स्क्रब टायफस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूबे में पिछले 20 दिन में स्क्रब टायफस के 15 नए मामले सामने आए हैं। अकसर बरसात में स्क्रब टायफस का प्रकोप ज्यादा रहता है, लेकिन अब सर्दी के मौसम में भी स्क्रब टायफस थमने का नाम नहीं ले रहा है।
पहली जनवरी से लेकर अभी तक सूबे के कांगड़ा जिले में तीन, चंबा में दो, शिमला में दो और बिलासपुर में सबसे ज्यादा आठ मामले सामने आए हैं। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ जीडी गुप्ता ने कहा कि अक्तूबर के अंत या नवंबर के शुरुआत तक हिमाचल में स्क्रब टायफस के मामले आने बंद हो जाते थे, लेकिन इस बार सर्दी के मौसम में भी मामले आ रहे हैं। इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हैं।
बरसात में बढ़ता है सबसे ज्यादा खतरा
बरसात के मौसम में स्क्रब टायफस का खतरा बढ़ जाता है। स्क्रब टायफस घास में पाए जाने वाले एक पिस्सू के काटने से होता है। आमतौर पर पिस्सू के काटने पर लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन समय पर उपचार न हुआ तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
घास में पाए जाने वाले पिस्सू के काटने से तेज बुखार आना शुरू हो जाता है। समय पर जांच करवाकर इसका उपचार करवाना आवश्यक है। स्क्रब टायफस ज्वर खतरनाक जीवाणु जिसे रिकेटशिया यानी संक्रमित माइट (पिस्सू) के काटने से फैलता है, जो खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों से पनपता है।
बीमारी के लक्षण
पिस्सू के काटने के बाद व्यक्ति को बुखार के साथ जोड़ों में दर्द, कंपकंपी के साथ बुखार, अकड़न या शरीर का थका हुआ लगना, अधिक संक्रमण, गर्दन, बाजुओं के नीचे, कूल्हों के ऊपर गिल्टियां आती हैं। अगर किसी को ऐसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।
ऐसे करें बचाव
बरसात के दिनों में घर के आसपास घास या झाड़ियां न उगने दें। घर के इर्द-गिर्द समय-समय पर सफाई करते रहें। खेतों में काम करते समय अपने हाथ पैरों को अच्छे से ढककर रखें। अगर 2-3 दिन से अधिक समय तक बुखार हो तो तुरंत चिकित्सक से मिलें और रक्त जांच जरूर करा लें। यह रोग एक आदमी से दूसरे को नहीं फैलता है।