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फोरलेन की जद में आए 24 परिवारों के घर तोड़े
Updated Sun, 04 Jun 2017 11:28 PM IST
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धर्मपुर(सोलन)। फोरलेन की जद में आए लोगों के आशियाने तोड़े जाने के कारण वह बेघर हो गए हैं। इससे अब वे लोग खुले आसमान तले रहने को मजबूर हैं। धर्मपुर पंचायत के वार्ड नंबर 10 की बंगाला बस्ती में रहने वाले 24 परिवार लगभग 80 वर्ष से यहां रह रहे थे। पिछले तीन दिन से ये लोग खुले आसमान तले खेतों में ही खाना बना रहे हैं व रात भी वहीं गुजार रहे हैं। बंगलाबस्ती निवासी सीता राम, गंगा राम, मुरली, तन्ना राम, पींकु, टोनी, चमन लाल, रूप लाल, खोकी राम, चंद, नथु राम, शोकी, भगत राम, संजू, सोनू, पवन, बेला देवी, साक्ष राम, सुभाष, रोशन लाल, करण ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय रहते सरकार उन्हें भूमि दे देती तो उन्हें बेघर नहीं होना पड़ता। उन्होंने बताया कि उन्हें खाना, सोना सब कुछ खुले आसमान के नीचे करना पड़ रहा है। परिवार में महिलाएं व छोटे बच्चे भी हैं, मकान टूटने के कारण बच्चे भी स्कूल नहीं जा रहे हैं। वहीं नायब तहसीलदार चमन चौहान व राजस्व सलाहकार मस्त राम ने बताया कि बंगला बस्ती के प्रभावित होने वाले 24 परिवारों को सरकार सिर्फ भवन का मुआवजा देगी।
घर टूटने की वजह से स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे
छोटे बच्चे आर्यन (5), विशेष (9), शिखा (7), दिया, ऋषि, प्राची, नीरज ने कहा की वे डिवाइन स्कूल में पड़ते हैं, लेकिन घर टूटने के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। मम्मी-पापा के साथ बाहर ही सो रहे हैं। इस दौरान जानवरों व सांप का भय बना रहता है।
टूट गए युवाओं के सपने
अंजना ने बताया कि उसने बीए करने के बाद बीसीए एलआर संस्थान से की है। उसका सपना था कि वह समाज में एक अच्छा स्थान पा सके और एक मिसाल पेश करते हुए प्रदेश सरकार में एक अधिकारी बन सके। अब उसका सपना शायद परिवार के बेघर होने के कारण टूट सकता है। अभी तक सरकार की ओर से उन्हें कोई भी सहायता नहीं मिली है।
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घर टूटने की वजह से स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे
छोटे बच्चे आर्यन (5), विशेष (9), शिखा (7), दिया, ऋषि, प्राची, नीरज ने कहा की वे डिवाइन स्कूल में पड़ते हैं, लेकिन घर टूटने के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। मम्मी-पापा के साथ बाहर ही सो रहे हैं। इस दौरान जानवरों व सांप का भय बना रहता है।
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टूट गए युवाओं के सपने
अंजना ने बताया कि उसने बीए करने के बाद बीसीए एलआर संस्थान से की है। उसका सपना था कि वह समाज में एक अच्छा स्थान पा सके और एक मिसाल पेश करते हुए प्रदेश सरकार में एक अधिकारी बन सके। अब उसका सपना शायद परिवार के बेघर होने के कारण टूट सकता है। अभी तक सरकार की ओर से उन्हें कोई भी सहायता नहीं मिली है।
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