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शहर में एक सरकारी स्कूल ऐसा भी, शिक्षा मुफ्त में, सुविधाएं कान्वेंट स्कूलों से बेहतर

Fri, 12 Apr 2019 10:24 AM IST
शिमला ब्यूरो नरेंद्र एस कंवर, अमर उजाला, शिमला
नरेंद्र एस कंवर, अमर उजाला, शिमला Published by: शिमला ब्यूरो Updated Fri, 12 Apr 2019 10:24 AM IST
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निजी स्कूलों में नहीं लूटने की जरूरत
- फोटो : अमर उजाला

अभिभावक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और उन्हें सकारात्मक सोच के शिक्षकों का सहयोग मिले तो निजी स्कूलों की मनमानी का शिकार नहीं होना पड़ेगा। फीस के नाम पर एक पैसा दिए बिना भी सरकारी स्कूलों में वो सब सुविधाएं उपलब्ध हैं जिसे निजी कान्वेंट स्कूल सालाना 35 से 40 हजार रुपये फीस वसूलकर मुहैया करवा रहे हैं।

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राजधानी में खुली केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला पोर्टमोर यह सब सुविधाएं बच्चों को मुहैया करवा रहा है। प्रदेश में सबसे पहले 2014 में इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई शुरू करने वाले और सरकार के फैसले के चार साल पूर्व नर्सरी तथा केजी की कक्षाएं शुरू करने वाला यह पहला स्कूल है।
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स्कूल ने इसी सत्र से बच्चों के लिए आठ कंप्यूटरों की व्यवस्था कर कंप्यूटर एजूकेशन भी शुरू कर दी है। स्कूल के गेट से एंट्री करते वक्त ऐसा महसूस होता है कि किसी निजी स्कूल में प्रवेश कर लिया हो। स्कूल में उपलब्ध दस कमरों, नौ शिक्षकों का स्टाफ स्कूल का स्तर ऊंचा करने और यहां दी जा रही शिक्षा में गुणात्मक सुधार करने के लिए मेहनत कर रहा है।
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स्कूल में यह हैं सुविधाएं
स्कूल में डायनिंग हॉल, एमडीएम स्टाफ के लिए ड्रेस कोड, पानी के लिए फिल्टर और गीजर जैसी आधुनिक सुविधाएं है। स्कूल में 350 छात्र-छात्राओं के लिए कंप्यूटर एजूकेशन भी शुरू कर दी है। गेट पर सिक्योरिटी गार्ड भी तैनात है। बच्चों को खाना ओवन में गरम करके दिया जाता है।

शिक्षा मंत्री से मिला सहयोग : जिष्टू
स्कूल की काया पलटने में स्कूल के केंद्रीय मुख्य शिक्षक संजीव जिस्टु का अहम योगदान रहा है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज भी इस स्कूल की सराहना कर चुके हैं। उन्होंने बीस नए कंप्यूटर देने का वादा भी किया है। स्कूल का छह कमरों का नया भवन बनने जा रहा है। दस शौचालय बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस काम में स्कूल प्रबंधन समिति के हर सदस्य का सहयोग मिला है। एसएमसी सदस्य फंड में सौ रुपये प्रतिमाह अंशदान देते हैं।


बच्चे का भविष्य संवारने की चाह रखने वाले अभिभावकों के लिए नई उम्मीद
पोर्टमोर प्राथमिक पाठशाला उन अभिभावकों के लिए एक नई उम्मीद है, जो अपने बच्चे को बेहतरीन शिक्षा देना चाहते है, मगर बड़े नामी निजी व कान्वेंट स्कूलों की फीस की दरें सुनकर हिम्मत नहीं जुटा पाते है। इस स्कूल में मिल रही सुविधाओं से साबित हुआ है कि अभिभावक चाहें तो किसी भी सरकारी स्कूल को कान्वेंट की तरह संचालित कर बच्चे का भविष्य संवार सकते है।

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