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एजेंसी बताएगी, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से शहर में होंगे क्या बदलाव
Updated Mon, 01 Jan 2018 10:49 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में लोअर बाजार से लेकर कृष्णानगर तक के सभी पुराने जर्जर भवन हटाकर नई इमारतें बनाने और गरीबों के लिए नए आशियाने तैयार करने के रि-डेवलपमेंट प्लान पर काम शुरू हो गया है। 1248 करोड़ रुपये के बजट से इस पूरे क्षेत्र को नए सिरे से बसाने के लिए नगर निगम ने नागरिका फाउंडेशन नाम की रिसर्च संस्था को असेसमेंट का जिम्मा सौंपा है। संस्था बिना कोई फीस लिए नगर निगम के लिए यह मूल्यांकन रिपोर्ट करेगी। पुराने ढारे और भवन हटाकर नए भवन बनाने से इस पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और लोगों पर क्या असर पड़ेगा, इसका आकलन किया जाएगा। देखा जाएगा कि क्या कृष्णानगर जैसे सिंकिंग जोन में बहुमंजिला इमारतें और मल्टीप्लेक्स बनाना संभव है भी या नहीं। संस्था इसी साल अक्तूबर में इसकी रिपोर्ट तैयार कर नगर निगम को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर शहर को बसाने के लिए अर्बन रिन्युअल स्कीम और मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। संस्था ने सर्वेक्षण को लेकर निगम प्रशासन के साथ समझौता भी कर लिया है। 15 दिन बाद संस्था की टीम सर्वेक्षण के लिए शिमला पहुंच जाएगी।
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1248 करोड़ के बजट से बनने हैं नए भवन, मल्टीप्लेक्स
रि डेवलेपमेंट प्लान के तहत लोअर बाजार, रामबाजार और कृष्णानगर वार्ड में सैकड़ों पुराने ढारे हटाकर नए भवन बनाकर गरीब परिवारों को बसाया जाएगा। इसके अलावा पुराने भवन की जगह नई इमारतें खड़ी की जाएंगी। 1248 करोड़ रुपये के बजट से क्षेत्र में होटल और कमर्शियल काम्पलेक्स तैयार किए जाने हैं। इन तीनों वार्डों में 80 फीसदी जमीन नगर निगम के अधीन है। इस पर 16 प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे।
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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से इस क्षेत्र पर क्या क्या असर पड़ेगा, इसका मूल्यांकन करने के लिए नागरिका फाउंडेशन के साथ समझौता किया गया है। अक्तूबर में संस्था अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।
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प्रशांत सरकैक, नोडल ऑफिसर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, शिमला
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शिमला। शहर में लोअर बाजार से लेकर कृष्णानगर तक के सभी पुराने जर्जर भवन हटाकर नई इमारतें बनाने और गरीबों के लिए नए आशियाने तैयार करने के रि-डेवलपमेंट प्लान पर काम शुरू हो गया है। 1248 करोड़ रुपये के बजट से इस पूरे क्षेत्र को नए सिरे से बसाने के लिए नगर निगम ने नागरिका फाउंडेशन नाम की रिसर्च संस्था को असेसमेंट का जिम्मा सौंपा है। संस्था बिना कोई फीस लिए नगर निगम के लिए यह मूल्यांकन रिपोर्ट करेगी। पुराने ढारे और भवन हटाकर नए भवन बनाने से इस पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और लोगों पर क्या असर पड़ेगा, इसका आकलन किया जाएगा। देखा जाएगा कि क्या कृष्णानगर जैसे सिंकिंग जोन में बहुमंजिला इमारतें और मल्टीप्लेक्स बनाना संभव है भी या नहीं। संस्था इसी साल अक्तूबर में इसकी रिपोर्ट तैयार कर नगर निगम को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर शहर को बसाने के लिए अर्बन रिन्युअल स्कीम और मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। संस्था ने सर्वेक्षण को लेकर निगम प्रशासन के साथ समझौता भी कर लिया है। 15 दिन बाद संस्था की टीम सर्वेक्षण के लिए शिमला पहुंच जाएगी।
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1248 करोड़ के बजट से बनने हैं नए भवन, मल्टीप्लेक्स
रि डेवलेपमेंट प्लान के तहत लोअर बाजार, रामबाजार और कृष्णानगर वार्ड में सैकड़ों पुराने ढारे हटाकर नए भवन बनाकर गरीब परिवारों को बसाया जाएगा। इसके अलावा पुराने भवन की जगह नई इमारतें खड़ी की जाएंगी। 1248 करोड़ रुपये के बजट से क्षेत्र में होटल और कमर्शियल काम्पलेक्स तैयार किए जाने हैं। इन तीनों वार्डों में 80 फीसदी जमीन नगर निगम के अधीन है। इस पर 16 प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे।
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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से इस क्षेत्र पर क्या क्या असर पड़ेगा, इसका मूल्यांकन करने के लिए नागरिका फाउंडेशन के साथ समझौता किया गया है। अक्तूबर में संस्था अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।
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प्रशांत सरकैक, नोडल ऑफिसर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, शिमला