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Mohali News: राजपूत बटालियन-4 के युद्ध में शामिल दिग्गजों ने मोहाली में जश्न

Sun, 20 Oct 2024 05:21 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Oct 2024 05:21 AM IST
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War veterans of Rajput Battalion-4 celebrate in Mohali
राजपूत बटालियन-4 के युद्ध में शामिल दिग्गजों ने मोहाली में जश्न
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याद किए युद्ध-शांति की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सेवा के दिन, बोले-बटालियन कर समृद्ध विरासत और सौहार्द बना रहे
माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। बांग्लादेश और श्रीलंका में युद्ध के दौरान अपने जौहर दिखाने वाले युद्ध के दिग्गजों (वार वेटरंर्स) ने मोहाली में शानदार जश्न मनाया। इस दौरान बटालियन-4 के करीब 50 से ज्यादा पूर्व अधिकारी, जेसीओ और एनसीओ यहां एकसाथ इकट्ठे हुए और दो दिन तक यादगार लम्हे याद कर जश्न में शामिल हुए। यह आयोजन बटालियन के वीर चक्र विजेता कर्नल रणबीर सिंह और उनकी पत्नी जसजीत कंग ने आयोजित किया।
इस अवसर पर सभी दिग्गजों ने युद्ध और शांति की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सेवा के दिनों को याद किया। इस दौरान उनकी पत्नियां भी मौजूद रहीं। इस माैके पर कर्नल रणबीर सिंह ने कहा कि अपने अनुभवी साथियों के साथ मिलन समारोह में जुड़ना और पुरानी यादें ताजा करने की काफी समय से तमन्ना थी। इसी वजह से यह आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि इस सेलिब्रेशन के लिए यहां पर कोचीन, बंगलुरू और जयपुर से सभी आए हैं। उन्होंने कहा कि 4 राजपूत यूनिट पूर्वजों की समृद्ध विरासत, वीरता और बलिदान की बात करती है। यही यूनिट है जिसने पहले और द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेने का गौरव प्राप्त किया है।
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इस यूनिट ने वर्ष 1845 से 1946 तक 22 विदेशी अभियानों में भाग लिया। यूनिट ने पर्शिया, एडिन, मासेडोनिया, टिगरिस, अल-अलामीन और बर्मा में लड़ाई लड़कर प्रशंसा हासिल की। आजादी के बाद यूनिट ने 1948 में जम्मू-कश्मीर ऑपरेशन, 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध, गाजा पट्टी 1960/61, गोवा मुक्ति 1961, भारत-चीन युद्ध 1962, 1988/90 में श्रीलंका में आईपीकेएफ ऑपरेशन में लड़ाई लड़ी। यहीं वजह है कि इसको फाइटिंग फोर्थ भी कहा जाता है।
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इस अवसर पर कैप्टन वीके अग्रवाल ने 1965 में कारगिल युद्ध के अपने अनुभव को साझा किया उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने 17 मई 1965 को पाकिस्तान पोस्ट पीटी 13620 पर कब्जा कर लिया था। कैप्टन अग्रवाल ने बताया कि वह घायल हो गए थे पर मैंने खतरे को खत्म करने का संकल्प लिया। 90 वर्षीय आनरेरी सेना पदक विजेता कैप्टन राम सिंह ने बताया कि 1971 के पूर्वी युद्ध के दौरान उन्होंने दुश्मन की तीव्र गोलाबारी के बीच अपनी पलटन का नेतृत्व किया और हमने दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया। सैनिकों ने सीधी गोलीबारी के बावजूद बहादुरी का प्रदर्शन किया।

एवीएसएम, वाईएसएम मेजर जनरल नंजप्पा ने कहा कि 1971 के पूर्वी युद्ध में उनकी वीरता के लिए उन्हें मेंशन-इन-डिस्पैचस से सम्मानित किया गया। श्रीलंका में ऑपरेशन के दौरान अपनी की कमान संभालने के लिए उन्हें युद्ध सेवा पदक भी मिला। उन्होंने कहा कि उन्हें ब्रिगेडियर और मेजर जनरल के रूप में दो बार अति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। कर्नल डीएस राजपूत ने दुश्मन की बंदूक को शांत करने के लिए अपने घातक हमले के बारे में बताया। उन्होंने 1971 के पूर्वी युद्ध में चांदीपुर में भीषण युद्ध का जिक्र किया। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें बहादुरी के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।


वही, वीआरसी कर्नल रणबीर सिंह ने कहा कि 1965 में कारगिल में पाक पोस्ट पीटी 13620 पर कब्जा करने का आदेश दिया गया था। यह एक खूनी लड़ाई थी, जिसके परिणामस्वरूप भारी क्षति हुई। राजपूतों ने 17 मई 1965 को पोस्ट पर कब्जा कर लिया। वह हमले में घायल हो गए। जिसके लिए उनको वीर चक्र का वीरता पुरस्कार दिया गया। बटालियन के वर्तमान कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल संदीप सिंह, एसएम भी यूनिट जेसीओ और एनसीओ के साथ मौजूद थे। जानकारी के मुताबिक इस रेजिमेंट को जोजिला बैटल ऑनर-डे से सम्मानित किए जाने का अनूठा गौरव प्राप्त है।
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