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अजब टोटका: मोहाली जिले के नयागांव में घरों के बाहर टांग दीं नीली बोतलें ताकि गंदगी न करें कुत्ते
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नयागांव। लावारिस कुत्तों से परेशान लोग तरह तरह के टोटके अपना रहे हैं। घरों के बाहर पानी की नीली बोतलें लटका रहे हैं। उनका मानना है कि इससे कुत्ते वहां गंदगी नहीं करेंगे। हालांकि जानवरों के डॉक्टर का कहना है कि कुत्तों को नीले रंग से कोई फर्क नहीं पड़ता। यह लोगों के मन का वहम है।
नयागांव में लावारिस कुत्तों का आतंक है। हर गली मोहल्ले मे 10 -15 कुत्तों का झुंड घूमता रहता है। लोगों को काटने के अलावा घरों के बाहर गंदगी करने वाले इन कुत्तों से लोग आजिज आ चुके हैं। नगर काउंसिल से गुहार लगाकर थक चुके हैं। कुछ लोगों ने अब अजीब तरह के टोटकों का सहारा लेना शुरू किया है। इसके लिए वे घरों के बाहर पानी की नीली बोतलें लटका रहे हैं। उनका तर्क है कि जिस घर के सामने नीली बोतल टंगी होगी, वहां कुत्ते गंदगी नहीं करेंगे। यह टोटका कितना सफल हो रहा है, यह तो वही जानें। लेकिन आजकल पानी की यह नीली बोतलें चर्चा का विषय बन गई हैं। दूसरी ओर, सेनेटरी इंस्पेक्टर रामगोपाल का कहना है कि लावारिस कुत्तों की नसबंदी के लिए नगर काउंसिल ने टेंडर लगाया है। जैसे ही कोई कंपनी आती है तो प्राथमिकता से इसे पूरा किया जाएगा।
नीले रंग से कुत्तों पर कोई फर्क नहीं पड़ता
नीले रंग का कुत्तों के साथ कोई भी संबंध नहीं है। अगर उस बोतल में किसी प्रकार की कोई दवाई डाल रखी हो तो बात अलग है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। यह बात फिजूल है कि नीली बोतल देखकर कुत्ते गंदगी नहीं करेंगे। -डॉक्टर राजेश गुप्ता, वेटरिनरी डॉक्टर
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क्या कहते हैं लोग
कई बार कह चुके, नहीं हुई कार्रवाई
नगर काउंसिल के कर्मचारियों को इस मामले पर कार्रवाई करने के लिए कई बार कह चुके हैं, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। -प्रितपाल, निवासी दशमेश नगर नयागांव
किसी से सुना उसके बाद लगाई बोतल
हमें कहीं से पता चला था कि अगर नीले पानी की बोतल घर के बाहर लगाई जाए तो उससे कुत्ते घर के बाहर आकर मल मूत्र विसर्जित नहीं करते। इसलिए हमने यह बोतल घर के बाहर लगा रखी है। -लीला दास, स्थानीय निवासी
पूरी रात जागकर काटनी पड़ती है
लावारिस कुत्तों के कारण पूरी रात सोना मुश्किल हो जाता है। यह कुत्ते पूरी रात गली में शोर करते रहते हैं। रात को न सोने के कारण हम लोग पूरे दिन अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाते हैं। -राशिद खान, स्थानीय निवासी
कई लोगों को काट चुके है कुत्ते
हमारे मोहल्ले में पहले भी लावारिस कुत्तों ने कई लोगों को काटा है। यह कुत्ते अक्सर बच्चों पर हमला कर देते हैं। कुत्तों के डर से हमारे बच्चे गली में भी नहीं निकलते। -सरिता, स्थानीय निवासी
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नयागांव में लावारिस कुत्तों का आतंक है। हर गली मोहल्ले मे 10 -15 कुत्तों का झुंड घूमता रहता है। लोगों को काटने के अलावा घरों के बाहर गंदगी करने वाले इन कुत्तों से लोग आजिज आ चुके हैं। नगर काउंसिल से गुहार लगाकर थक चुके हैं। कुछ लोगों ने अब अजीब तरह के टोटकों का सहारा लेना शुरू किया है। इसके लिए वे घरों के बाहर पानी की नीली बोतलें लटका रहे हैं। उनका तर्क है कि जिस घर के सामने नीली बोतल टंगी होगी, वहां कुत्ते गंदगी नहीं करेंगे। यह टोटका कितना सफल हो रहा है, यह तो वही जानें। लेकिन आजकल पानी की यह नीली बोतलें चर्चा का विषय बन गई हैं। दूसरी ओर, सेनेटरी इंस्पेक्टर रामगोपाल का कहना है कि लावारिस कुत्तों की नसबंदी के लिए नगर काउंसिल ने टेंडर लगाया है। जैसे ही कोई कंपनी आती है तो प्राथमिकता से इसे पूरा किया जाएगा।
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नीले रंग से कुत्तों पर कोई फर्क नहीं पड़ता
नीले रंग का कुत्तों के साथ कोई भी संबंध नहीं है। अगर उस बोतल में किसी प्रकार की कोई दवाई डाल रखी हो तो बात अलग है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। यह बात फिजूल है कि नीली बोतल देखकर कुत्ते गंदगी नहीं करेंगे। -डॉक्टर राजेश गुप्ता, वेटरिनरी डॉक्टर
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क्या कहते हैं लोग
कई बार कह चुके, नहीं हुई कार्रवाई
नगर काउंसिल के कर्मचारियों को इस मामले पर कार्रवाई करने के लिए कई बार कह चुके हैं, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। -प्रितपाल, निवासी दशमेश नगर नयागांव
किसी से सुना उसके बाद लगाई बोतल
हमें कहीं से पता चला था कि अगर नीले पानी की बोतल घर के बाहर लगाई जाए तो उससे कुत्ते घर के बाहर आकर मल मूत्र विसर्जित नहीं करते। इसलिए हमने यह बोतल घर के बाहर लगा रखी है। -लीला दास, स्थानीय निवासी
पूरी रात जागकर काटनी पड़ती है
लावारिस कुत्तों के कारण पूरी रात सोना मुश्किल हो जाता है। यह कुत्ते पूरी रात गली में शोर करते रहते हैं। रात को न सोने के कारण हम लोग पूरे दिन अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाते हैं। -राशिद खान, स्थानीय निवासी
कई लोगों को काट चुके है कुत्ते
हमारे मोहल्ले में पहले भी लावारिस कुत्तों ने कई लोगों को काटा है। यह कुत्ते अक्सर बच्चों पर हमला कर देते हैं। कुत्तों के डर से हमारे बच्चे गली में भी नहीं निकलते। -सरिता, स्थानीय निवासी