कोरोना महामारी के बीच रविवार को लुधियाना की अनाज मंडी में किसान-मजदूर महापंचायत का आयोजन किया गया। इस दौरान किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने मलोट प्रकरण से पल्ला झाड़ते हुए मामले की कड़ी निंदा की और कहा कि वह सत्याग्रही हैं और सत्याग्रह के रास्ते पर चलते हुए संघर्ष में विजयी होंगे। उन्हें हिंसा में विश्वास नहीं है। महापंचायत में कोरोना संबंधी सभी गाइडलाइंस के पालन की बात कही गई थी, लेकिन बाद में नियमों की धज्जियां उड़तीं नजर आईं। महापंचायत में पहुंचे लोगों ने मास्क पहनना तो दूर, किसान नेताओं ने भी कोरोना गाइडलाइन का पालना नहीं किया। हालांकि श्रोता के तौर पर पहुंचीं कुछ महिलाएं मास्क में नजर आईं।
महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन कादियां के प्रधान हरमीत सिंह कादियां ने भी भाजपा विधायक पर हमले की निंदा करते हुए कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ऐसे हमलों में विश्वास नहीं रखता है। उन्होंने मोर्चा से भाजपा नेताओं का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि जहां भी भाजपा नेता प्रेस कांफ्रेंस करते हैं या किसी दफ्तर का उद्घाटन करने पहुंचते हैं तो उनका काले झंडे दिखाकर विरोध किया जाएगा। मलोट में जो भी हुआ भाजपा को समझना चाहिए कि लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। इस मामले में लॉ एंड ऑर्डर भी सवाल उठता है, एक विधायक जा रहा है और उसे पूरी सुरक्षा नहीं दी गई। केंद्र सरकार को कृषि कानूनों को जल्द वापस लेना चाहिए। वहीं किसानों और केंद्र में बंद हो चुकी बातचीत पर कादियां ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक मिनट कॉल की बात कही थी, लेकिन 66 दिन बीत चुके हैं। अभी तक उनके पास कोई काल नहीं आई है। सरकार की तरफ बातचीत बंद है, हम पीछे नहीं हटे हैं। हम 12 बैठकें कर कृषि कानूनों के संबंध में सारी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। सरकार जब बैठक के लिए बुलाएगी, वह जाने के लिए तैयार हैं। संयुक्त किसान मोर्चा की 30 मार्च को बैठक हो रही है, इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।