साढ़े आठ करोड़ की लूट की कहानी: चार महीने से प्लानिंग कर रहे थे आरोपी, कपड़े तक तय हो गए थे पर...
लूट की मास्टरमाइंड मंदीप कौर मूल रूप से लुधियाना के डेहलों की रहने वाली है। उसकी मुलाकात बरनाला के जसविंदर से सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर हुई थी। दोनों में वहीं से दोस्ती हुई और फरवरी में शादी कर ली। मंदीप कौर खुद को वकील प्रमोट करती थी
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लुधियाना में सीएमएस कंपनी में लूटकांड को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने काफी प्लानिंग की थी। आरोपियों की प्लानिंग तो सेट बैठ गई, लेकिन आरोपियों से करोड़ों रुपये की नकदी संभाली नहीं गई। नकदी संभालने के चक्कर में आरोपियों को समय लग गया और इतने में पुलिस ने अपनी जांच में तेजी ला दी। इसके बाद खुद को शातिर समझने वाले आरोपी कोई न कोई सुराग छोड़ते गए। ज्यादा पैसे देख आरोपी भी हैरान थे। कोई विदेश जाने की सोचने लगा तो कोई सोशल मीडिया पर रील डालने लग गया।
इस चार महीने की प्लानिंग के बीच आरोपियों ने कई तरह के फैसले लिए। फैसले लेने के लिए हर रविवार को मीटिंग हो रही थी। इतना ही नहीं मीटिंग का स्थान भी हर बार नया होता था, जिसमें सारा कुछ तय किया जाता था कि लूटकांड को कब अंजाम देना है।
यह भी तय कर लिया गया था कि लूटे गए पैसे सभी में बराबर-बराबर बंटेंगे और लूट वाले दिन सभी काले कपड़े पहनकर आएंगे ताकि काले कपड़े वाले व्यक्ति की विजिबिलिटी कम नजर आए। डाकू हसीना के नाम से मशहूर मंदीप कौर, उसके पति जसविंदर सिंह और साजिशकर्ता मनजिंदर सिंह मनी इस हक में थे कि जिस दिन कंपनी के दफ्तर में ज्यादा नकदी हो और स्टाफ की कमी ज्यादा हो तो उसी दिन वारदात करने का फायदा हो सकता है।
इसके लिए आरोपियों ने करीब चार महीने तक का इंतजार किया। मनजिंदर मनी को इतना तो पता था कि शुक्रवार को कंपनी के दफ्तर में कैश ज्यादा होता है। जिस दिन लूट करनी थी उस दिन कैश भी करीब 11 करोड़ रुपये पड़े थे और मनजिंदर को यह भी पता था कि दो सुरक्षा कर्मचारी डबल ड्यूटी कर रहे हैं और एक सो रहा होगा। इसके बाद उन्हें आस नजर आई कि अब लूटकांड को अंजाम दिया जा सकता है। आरोपियों ने सुरक्षा कर्मचारियों की थकावट का फायदा उठाया और लूटकांड को अंजाम दे दिया।
लूट की मास्टरमाइंड मंदीप कौर मूल रूप से लुधियाना के डेहलों की रहने वाली है। उसकी मुलाकात बरनाला के जसविंदर से सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर हुई थी। दोनों में वहीं से दोस्ती हुई और फरवरी में शादी कर ली। मंदीप कौर खुद को वकील प्रमोट करती थी, जबकि उसने एक दुष्कर्म का मामला किसी पर दर्ज कराया था उसकी पेशी भुगतने के लिए वह लुधियाना अदालत आती थी। जसविंदर ने भी सभी रिश्तेदारों और दोस्तों में मंदीप कौर को वकील ही बता रखा था। उसने मंदीप के चक्कर में कोकटेल बनाने का काम भी छोड़ दिया था और कोई दूसरा काम ढूंढ रहा था ताकि शार्टकट तरीके से पैसा कमा सके।
इसी दौरान मनजिंदर मंनी अदालत में लगे एटीएम मशीन में पैसे डालने आता था तो वहां उसकी मुलाकात मनी से हुई और दोनों की दोस्ती हो गई। इसके बाद मंदीप कौर ने लूट की योजना बनानी शुरू कर दी, उसने मनजिंदर से बात की और अपने पति को भी शामिल कर लिया। पुलिस के मुताबिक मंदीप और मनजिंदर में गहरी दोस्ती हो गई थी। उसने मनी से सारे भेद ले लिए कि कंपनी में कितनी नकदी होती है और क्या सिस्टम है। इसके बाद मंदीप कौर ने अपने पति और भाई सहित सात लोगों को लूट के लिए तैयार किया, जबकि बाकी लोगों को मनजिंदर मनी ने तैयार करना था। जब सभी लोग तैयार हो गए तो लूटकांड को अंजाम देने का समय तय कर लिया गया और लूट की गई।
सीपी बोले-जांच का सारा खर्च कंपनी से लेंगे
पुलिस कमिश्नर मंदीप सिंह सिद्धू सीएमएस कंपनी और उसके इंतजाम से काफी खफा हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस सभी शहरवासियों के लिए है। शहर में कहीं भी क्राइम होगा तो पुलिस उसे हल जरूर करेगी। अगर क्राइम किसी की गलती से हो तो उसका हर्जाना लोगों को भुगतना पड़े यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि इस लूटकांड में सबसे बड़ी गलती कंपनी की है जहां सिक्योरिटी सिस्टम ही सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि चार दिन से लुधियाना पुलिस एक निजी कंपनी के मुलाजिम बनकर रह गई है। आधी से ज्यादा लुधियाना पुलिस इस मामले को हल करने में लगी है। इसे हल करने के लिए करीब एक करोड़ रुपये खर्च आ चुका है। इसमें सभी अधिकारियों और मुलाजिमों की तनख्वाह, पेट्रोल के साथ-साथ टाइम भी दिया है। जो अधिकारी शहर के लोगों की समस्याएं सुनने के लिए अपने दफ्तरों में बैठते हैं वह एक कंपनी की गलती से चार दिन से अपने शहर के लोगों को समय नहीं दे पा रहे।
उन्होंने कहा कि लूटकांड को हल करने में जो खर्च पुलिस का आया है उसे कंपनी से वसूलने के लिए उच्चाधिकारियों से चर्चा जरूर की जाएगी। उन्होंने कहा कि कंपनी की गलती की वजह से लुधियाना पुलिस सीवरमैन तक बन गई। कैसे सैप्टिक टैंक में मुलाजिम और अधिकारी उतरे और गंदगी में हाथ डाल कर पैसे निकाले ताकि कोई नुकसान न हो।