{"_id":"5b48da374f1c1b48748b4628","slug":"41531501111-ludhiana-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पी आर टी सी के डराईवर के साथ मारपीट करने वाले सी आई ए स्टाफ के एस आाई व फर्जी मेडकिल करने वाले डाक्टर पर केस दर्ज","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पी आर टी सी के डराईवर के साथ मारपीट करने वाले सी आई ए स्टाफ के एस आाई व फर्जी मेडकिल करने वाले डाक्टर पर केस दर्ज
Updated Fri, 13 Jul 2018 10:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीआरटीसी ड्राइवर को पीटने के मामले में एसआई व डाक्टर पर केस दर्ज
एसएसपी कर रहे थे टाल मटोल, ट्रांसफर के बाद एसपी ने लिया एक्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा। जिले के गांव दौलतपुरा निवासी पीआरटीसी ड्राइवर कुलविंदर सिंह को अवैध तौर पर हिरासत में रखकर उसे पीटने के आरोप में बठिंडा के सीआईए स्टाफ-2 के लोकल रैंक प्राप्त एसआई तरजिंदर सिंह, उसके दो साथी पुलिस वालों और फर्जी मेडिकल करने के आरोप में सिविल अस्पताल के डाक्टर हरमीक सिंह पर थाना सिविल लाइन में केस दर्ज किया गया है। इस मामले में बठिंडा के तत्कालीन एसएसपी नवीन सिंगला ने इन पुलिस वालों और डाक्टर को बचाने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेशों को एडिशनल सेशन कोर्ट में चैलेंज कर दिया था। लेकिन जब एसएसपी नवीन सिंगला का ट्रांसफर हुआ तो उन्होंने अदालत से डरते हुए मजबूरन 12 जुलाई को थाना सिविल लाइन पुलिस को एसआई और डाक्टर के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दे दिए। गौर हो कि बठिंडा पुलिस ने मजिस्ट्रेट के इस आदेश को एडिशनल सेशन कोर्ट में चैलेंज किया था, जिसमें मजिस्ट्रेट ने एसएसपी को आदेश दिए थे कि 24 घंटे में आरोपी एसआई व डाक्टर पर केस दर्ज किया जाए। लेकिन एडिशनल सेशन कोर्ट ने पुलिस याचिका पर सुनवाई करते हुए एसएसपी को मामले में दस दिन का समय दे दिया था।
जानकारी के अनुसार 24 जून रविवार को जिले के गांव दौलतपुरा में जब पुलिस वालों और शराब ठेकेदारों के कारिंदों की ग्रामीणों के साथ किसी बात को लेकर झडप हो गई थी तो उस पूरे वाकये की पीआरटीसी का ड्राइवर कुुलविंदर सिंह मोबाइल से वीडियो बनाने लगा था। इस पर थाना बालियांवाली पुलिस ने कुलविंदर सिंह को ही पुलिस वालों पर हमला करने के आरोप में नामजद कर गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद बालियांवाली पुलिस ने 26 जून को गिरफ्तार कर बठिंडा की जूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया तो अदालत ने आरोपी को अगले दिन अदालत में पेश करने संबंधी पुलिस को आदेश दिए थे। थाना बालियांवाली पुलिस ने कुलविंदर सिंह को बालियांवाली ले जाने के बजाय बठिंडा के सीआईए स्टाफ-2 में छोड़ दिया। जहां पर सीआईए स्टाफ-2 के एसआई तरजिंदर सिंह ने अपने साथी पुलिस वालों के साथ कुलविंदर सिंह के साथ अमानवीय मारपीट की। इस बात का खुलासा पीड़ित कुलविंदर सिंह ने उस समय किया जब पुलिस उसे सिविल अस्पताल के डाक्टर हरमीक सिंह से फर्जी मेडिकल करवाकर मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया तो अपने साथ कुलविंदर सिंह ने अदालत से मामले की शिकायत कर दी। जिस के अदालत ने तीन डाक्टरों के पैनल से दोबारा पीड़ित का मेडिकल करवाया तो उसमें पीड़ित को कई चोटें लगने की पुष्टि हुई। जिस पर अदालत ने 28 जून को सीआईए स्टाफ-2 के एसआई तरजिंदर सिंह, उसके साथी पुलिस वालों और फर्जी मेडिकल करने वाले डाक्टर हरमीक सिंह पर 24 घंटे में केस दर्ज करने के लिए एसएसपी बठिंडा को आदेश दिए थे ।
एसआई व डाक्टर पर लगी धाराएं नहीं बताईं
एसआई व डाक्टर पर किस धारा के तहत केस दर्ज किया गया है, इस बारे में जानने के लिए जब मीडिया कर्मियों ने फोन किया तो थाने के मुंशी से लेकर एसपी तक धाराओं को बताने के लिए टाल मटोल करते रहे। एसपी डी स्वर्ण खन्ना ने तो यहां तक कह दिया कि यह अदालती मामला है।
विज्ञापन
थाना सिविल लाइन प्रभारी ने किया मीडिया को गुमराह
एसआई और डाक्टर पर 12 जुलाई को थाना सिविल लाइन में एफआईआर नंबर 156 धारा 167, 330, 346, 348,193, 355 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया था। लेकिन थाना सिविल लाइन प्रभारी इंस्पेक्टर रछपाल सिंह ने मीडिया को गुमराह करते हुए कहा कि केस 13 जुलाई को दर्ज किया गया है। इस बारे में रोजाना क्राइम रिपोर्ट में भी जिक्र नहीं किया गया। केस नंबर 155 और 157 तो क्राइम रिपोर्ट में दर्ज कर दिया गया लेकिन 156 नंबर केस का कोई जिक्र नहीं किया।
विज्ञापन
एसएसपी कर रहे थे टाल मटोल, ट्रांसफर के बाद एसपी ने लिया एक्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा। जिले के गांव दौलतपुरा निवासी पीआरटीसी ड्राइवर कुलविंदर सिंह को अवैध तौर पर हिरासत में रखकर उसे पीटने के आरोप में बठिंडा के सीआईए स्टाफ-2 के लोकल रैंक प्राप्त एसआई तरजिंदर सिंह, उसके दो साथी पुलिस वालों और फर्जी मेडिकल करने के आरोप में सिविल अस्पताल के डाक्टर हरमीक सिंह पर थाना सिविल लाइन में केस दर्ज किया गया है। इस मामले में बठिंडा के तत्कालीन एसएसपी नवीन सिंगला ने इन पुलिस वालों और डाक्टर को बचाने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेशों को एडिशनल सेशन कोर्ट में चैलेंज कर दिया था। लेकिन जब एसएसपी नवीन सिंगला का ट्रांसफर हुआ तो उन्होंने अदालत से डरते हुए मजबूरन 12 जुलाई को थाना सिविल लाइन पुलिस को एसआई और डाक्टर के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दे दिए। गौर हो कि बठिंडा पुलिस ने मजिस्ट्रेट के इस आदेश को एडिशनल सेशन कोर्ट में चैलेंज किया था, जिसमें मजिस्ट्रेट ने एसएसपी को आदेश दिए थे कि 24 घंटे में आरोपी एसआई व डाक्टर पर केस दर्ज किया जाए। लेकिन एडिशनल सेशन कोर्ट ने पुलिस याचिका पर सुनवाई करते हुए एसएसपी को मामले में दस दिन का समय दे दिया था।
जानकारी के अनुसार 24 जून रविवार को जिले के गांव दौलतपुरा में जब पुलिस वालों और शराब ठेकेदारों के कारिंदों की ग्रामीणों के साथ किसी बात को लेकर झडप हो गई थी तो उस पूरे वाकये की पीआरटीसी का ड्राइवर कुुलविंदर सिंह मोबाइल से वीडियो बनाने लगा था। इस पर थाना बालियांवाली पुलिस ने कुलविंदर सिंह को ही पुलिस वालों पर हमला करने के आरोप में नामजद कर गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद बालियांवाली पुलिस ने 26 जून को गिरफ्तार कर बठिंडा की जूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया तो अदालत ने आरोपी को अगले दिन अदालत में पेश करने संबंधी पुलिस को आदेश दिए थे। थाना बालियांवाली पुलिस ने कुलविंदर सिंह को बालियांवाली ले जाने के बजाय बठिंडा के सीआईए स्टाफ-2 में छोड़ दिया। जहां पर सीआईए स्टाफ-2 के एसआई तरजिंदर सिंह ने अपने साथी पुलिस वालों के साथ कुलविंदर सिंह के साथ अमानवीय मारपीट की। इस बात का खुलासा पीड़ित कुलविंदर सिंह ने उस समय किया जब पुलिस उसे सिविल अस्पताल के डाक्टर हरमीक सिंह से फर्जी मेडिकल करवाकर मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया तो अपने साथ कुलविंदर सिंह ने अदालत से मामले की शिकायत कर दी। जिस के अदालत ने तीन डाक्टरों के पैनल से दोबारा पीड़ित का मेडिकल करवाया तो उसमें पीड़ित को कई चोटें लगने की पुष्टि हुई। जिस पर अदालत ने 28 जून को सीआईए स्टाफ-2 के एसआई तरजिंदर सिंह, उसके साथी पुलिस वालों और फर्जी मेडिकल करने वाले डाक्टर हरमीक सिंह पर 24 घंटे में केस दर्ज करने के लिए एसएसपी बठिंडा को आदेश दिए थे ।
विज्ञापन
एसआई व डाक्टर पर लगी धाराएं नहीं बताईं
एसआई व डाक्टर पर किस धारा के तहत केस दर्ज किया गया है, इस बारे में जानने के लिए जब मीडिया कर्मियों ने फोन किया तो थाने के मुंशी से लेकर एसपी तक धाराओं को बताने के लिए टाल मटोल करते रहे। एसपी डी स्वर्ण खन्ना ने तो यहां तक कह दिया कि यह अदालती मामला है।
विज्ञापन
थाना सिविल लाइन प्रभारी ने किया मीडिया को गुमराह
एसआई और डाक्टर पर 12 जुलाई को थाना सिविल लाइन में एफआईआर नंबर 156 धारा 167, 330, 346, 348,193, 355 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया था। लेकिन थाना सिविल लाइन प्रभारी इंस्पेक्टर रछपाल सिंह ने मीडिया को गुमराह करते हुए कहा कि केस 13 जुलाई को दर्ज किया गया है। इस बारे में रोजाना क्राइम रिपोर्ट में भी जिक्र नहीं किया गया। केस नंबर 155 और 157 तो क्राइम रिपोर्ट में दर्ज कर दिया गया लेकिन 156 नंबर केस का कोई जिक्र नहीं किया।