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कांग्रेसी पार्षद अपनी तनख्वाह लेने तक सीमित, विकास के काम हुए ठप
Updated Sun, 03 Jun 2018 10:20 PM IST
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वादे अधूूरे, विकास के सपने नहीं हो सके पूरे
सांसद ने चार और विधायक ने एक वर्ष से मुल्लापुर दाखा को नहीं दी ग्रांट
कांग्रेेस पार्षद अपनी तनख्वाह लेने तक सीमित, विकास के सभी काम ठप
नगर काउंसिल का मेंबर होने के बावजूद विधायक नहीं हुए मीटिंग में शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
मुल्लांपुर दाखा (लुधियाना)। लोकसभा तथा विधान सभा चुनाव से पहले मंडी मुल्लापुर केे 13 वार्डों के हजारों लोगों को विकास के बड़े-बड़े सपने दिखाने वाले कांग्रेस के लोक सभा सदस्य रवनीत सिंह बिट्टू और आम आदमी पार्टी के हलका विधायक एचएस फूलका नगर काउंसिल मुल्लापुर दाखा को विकास कार्यों के लिए ग्रांट देने में पीछे ही रहे है। पिछले चार वर्षों में एमपी बिट्टू और एक साल के दौरान हलका विधायक फूलका ने विकास कार्य के लिए कोई भी ग्रांट नहीं दी। ग्रांट की कमी के कारण शहर में जहां विकास के सभी काम ठप पड़े हैं। वहीं 13 कांग्रेसी पार्षद तनख्वाह लेने तक ही सीमित है।
नगर काउंसिल के 13 वार्डों के अंदर कांग्रेस के पार्षद और प्रधान है। फिर भी एमपी की ओर से ग्रांट न देने के कारण शहर वासी हैरान है। लोगों का कहना है चुनाव समय विकास के बड़े बड़े दाव करने वाले एमपी अपने फंड में से शहर के विकास के लिए फंड देने से क्यों गुरेज कर रहे है। एक साल पहले हलका दाखा के वोटरों ने अकाली दल व कांग्रेस को नकारते हुए आम आदमी पार्टी के एचएस फूलका को बड़ी लीड से जीता कर विधान सभा में भेजा था।
फूलका ने विधायक बनने के बाद शहर वासियों के साथ किया एक भी वादा पूरा नहीं किया। नगर काउंसिल के मेंबर होने के बावजूद फूलका ने शहर विकास के लिए मीटिंग तक अटेंड नहीं की। दूसरी तरफ कांग्रेस सरकार आने के बाद हलका इंचार्ज मेजर सिंह भैणी डेढ़ करोड़ की ग्रांट का चेंक सरकार से ले आने का दावा कर रहे है। इस ग्रांट से शहर में कौन सा विकास का काम हुआ है, यह भी कांग्रेसी बताने में असमर्थ है। एक साल के दौरान शहर में आज तक एक भी गली या नाली की रिपेयर तक नहीं हुई। पिछले दस सालों से शहर में ठप पड़े विकास के कामों के कारण अब शहर वासियों में रोष पाया जा रहा है। इससे लोग एमपी के चुनाव में शहर वासी गलियों के बाहर बोर्ड लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जिनमें लिखा होगा कि वोट मांगने वाले कांग्रेसी नेता यह बताए कि उन्होंने शहर के विकास के लिए एमपी कोटे में कितनी ग्रांट दी है। अगर ग्रांट दी है तो ही वोट मांगने आएं।
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सांसद ने चार और विधायक ने एक वर्ष से मुल्लापुर दाखा को नहीं दी ग्रांट
कांग्रेेस पार्षद अपनी तनख्वाह लेने तक सीमित, विकास के सभी काम ठप
नगर काउंसिल का मेंबर होने के बावजूद विधायक नहीं हुए मीटिंग में शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
मुल्लांपुर दाखा (लुधियाना)। लोकसभा तथा विधान सभा चुनाव से पहले मंडी मुल्लापुर केे 13 वार्डों के हजारों लोगों को विकास के बड़े-बड़े सपने दिखाने वाले कांग्रेस के लोक सभा सदस्य रवनीत सिंह बिट्टू और आम आदमी पार्टी के हलका विधायक एचएस फूलका नगर काउंसिल मुल्लापुर दाखा को विकास कार्यों के लिए ग्रांट देने में पीछे ही रहे है। पिछले चार वर्षों में एमपी बिट्टू और एक साल के दौरान हलका विधायक फूलका ने विकास कार्य के लिए कोई भी ग्रांट नहीं दी। ग्रांट की कमी के कारण शहर में जहां विकास के सभी काम ठप पड़े हैं। वहीं 13 कांग्रेसी पार्षद तनख्वाह लेने तक ही सीमित है।
नगर काउंसिल के 13 वार्डों के अंदर कांग्रेस के पार्षद और प्रधान है। फिर भी एमपी की ओर से ग्रांट न देने के कारण शहर वासी हैरान है। लोगों का कहना है चुनाव समय विकास के बड़े बड़े दाव करने वाले एमपी अपने फंड में से शहर के विकास के लिए फंड देने से क्यों गुरेज कर रहे है। एक साल पहले हलका दाखा के वोटरों ने अकाली दल व कांग्रेस को नकारते हुए आम आदमी पार्टी के एचएस फूलका को बड़ी लीड से जीता कर विधान सभा में भेजा था।
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फूलका ने विधायक बनने के बाद शहर वासियों के साथ किया एक भी वादा पूरा नहीं किया। नगर काउंसिल के मेंबर होने के बावजूद फूलका ने शहर विकास के लिए मीटिंग तक अटेंड नहीं की। दूसरी तरफ कांग्रेस सरकार आने के बाद हलका इंचार्ज मेजर सिंह भैणी डेढ़ करोड़ की ग्रांट का चेंक सरकार से ले आने का दावा कर रहे है। इस ग्रांट से शहर में कौन सा विकास का काम हुआ है, यह भी कांग्रेसी बताने में असमर्थ है। एक साल के दौरान शहर में आज तक एक भी गली या नाली की रिपेयर तक नहीं हुई। पिछले दस सालों से शहर में ठप पड़े विकास के कामों के कारण अब शहर वासियों में रोष पाया जा रहा है। इससे लोग एमपी के चुनाव में शहर वासी गलियों के बाहर बोर्ड लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जिनमें लिखा होगा कि वोट मांगने वाले कांग्रेसी नेता यह बताए कि उन्होंने शहर के विकास के लिए एमपी कोटे में कितनी ग्रांट दी है। अगर ग्रांट दी है तो ही वोट मांगने आएं।
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