{"_id":"5aae941c4f1c1bbe758b6233","slug":"151521390620-ludhiana-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज संस्कृति बहीन समाज में जगतगुरु का छवी धुमिल हो गई है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज संस्कृति बहीन समाज में जगतगुरु का छवी धुमिल हो गई है
Updated Sun, 18 Mar 2018 10:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘आतंक और अपराधों को जन्म देता है नशा’
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
स्वर्गीय केवल क्रिशन मरवाहा की प्रथम पुण्यतिथि पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने राम सीता माता मंदिर डरेसी ग्राउंड में भजन संध्या का आयोजन किया। सतगुरु आशुतोष महाराज की शिष्य साध्वी रूपेश्वरी भारती ने कहा कि भारत को देव भूमि कहा जाता है। संस्कृति में देव पूजा का विधान है। सभी लोग ईश्वर को मानते है। आज संस्कृति से दूर हमारा ेश किस स्थान पर खड़ा है। हमारे भारत को पहले जगतगुरु के नाम से शोभित किया गया था। आज संस्कृति विहीन समाज में जगतगुरु का छवि धूमिल हो गई है।
साध्वी ने कहा कि युवा वर्ग में नैतिक मूल्यों की कमी के कारण युवा वर्ग नशे में फंस रहा है। नशा आतंकवाद और अपराधों को जन्म देता है। किसी ने कहा कि आज मानव ने पानी में तैरती मछलियों को देख समुंदरी जहाज बना डालें, पंछीयों को उडतें देख कर हवाई जहाज बना डाले, रोबट के जमाने में मानव भी रोबट बनता जा रहा है पर अफसोस इस बात का है कि इंसान इंसान नही बन सका। इंसान के भीतर इंसानियत के गुण कही लुप्त होते जा रहे है। संस्कारों की नींव अध्यात्म है। आज आवश्यकता है अध्यात्म से जुड़ने की, तभी हम अपने देश और विश्व के विषय में सोच सकते है। अध्यात्म के मार्ग का प्रथम सोपान है पूर्ण संत, जिनकी दिव्य कृपा से मानव अपने भीतर ईश्वर का दर्शन करता है, तभी संस्कारों से ओत प्रोत हमारी संस्कृति बचाना संभव है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
स्वर्गीय केवल क्रिशन मरवाहा की प्रथम पुण्यतिथि पर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने राम सीता माता मंदिर डरेसी ग्राउंड में भजन संध्या का आयोजन किया। सतगुरु आशुतोष महाराज की शिष्य साध्वी रूपेश्वरी भारती ने कहा कि भारत को देव भूमि कहा जाता है। संस्कृति में देव पूजा का विधान है। सभी लोग ईश्वर को मानते है। आज संस्कृति से दूर हमारा ेश किस स्थान पर खड़ा है। हमारे भारत को पहले जगतगुरु के नाम से शोभित किया गया था। आज संस्कृति विहीन समाज में जगतगुरु का छवि धूमिल हो गई है।
साध्वी ने कहा कि युवा वर्ग में नैतिक मूल्यों की कमी के कारण युवा वर्ग नशे में फंस रहा है। नशा आतंकवाद और अपराधों को जन्म देता है। किसी ने कहा कि आज मानव ने पानी में तैरती मछलियों को देख समुंदरी जहाज बना डालें, पंछीयों को उडतें देख कर हवाई जहाज बना डाले, रोबट के जमाने में मानव भी रोबट बनता जा रहा है पर अफसोस इस बात का है कि इंसान इंसान नही बन सका। इंसान के भीतर इंसानियत के गुण कही लुप्त होते जा रहे है। संस्कारों की नींव अध्यात्म है। आज आवश्यकता है अध्यात्म से जुड़ने की, तभी हम अपने देश और विश्व के विषय में सोच सकते है। अध्यात्म के मार्ग का प्रथम सोपान है पूर्ण संत, जिनकी दिव्य कृपा से मानव अपने भीतर ईश्वर का दर्शन करता है, तभी संस्कारों से ओत प्रोत हमारी संस्कृति बचाना संभव है।
विज्ञापन