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एमएस की गलती, गरीब मुफ्त इलाज से वंचित
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
Updated Mon, 22 Jun 2015 10:38 PM IST
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विजिलेंस ब्यूरो ने गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बड़ी
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प्रशासनिक कमियों को उजागर किया है। शिकायत के आधार पर की गई विजिलेंस की
जांच में सामने आया है कि मेडिकल अधीक्षकों की गलती के कारण गरीब और
जरूरतमंद वर्ग के करीब 1500 मरीजों को सीटी स्कैन की मुफ्त सुविधा से वंचित
रखा गया है। इस मामले में विजिलेंस ने अस्पताल प्रशासन को इस अवधि के
दौरान तैनात रहे तीन मेडिकल अधीक्षकों पर विभागीय कार्रवाई करने की सिफारिश
की है। इनमें से दो अधीक्षक सेवामुक्त हो चुके हैं।
भाई कन्हैया कैंसर रोको सोसायटी के प्रधान गुरप्रीत सिंह चंदबाजा ने इस मामले की जांच और कार्रवाई रिपोर्ट को आरटीआई एक्ट के तहत विजिलेंस विभाग से हासिल किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की पहल पर दिसंबर 2008 के दौरान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक निजी संस्थान को सीटी स्कैन मशीन लगाने की इजाजत दी थी। समझौते के तहत संस्थान को जरूरतमंद और गरीब वर्ग से संबंधित 10 प्रतिशत मरीजों के स्कैन मुफ्त करने थे और इसके लिए एमएस की सिफारिश मान्य होनी थी।
विजिलेंस ने शिकायत नंबर 80/2013 की पड़ताल रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि अस्पताल प्रशासन ने गरीबों को मुफ्त सीटी स्कैन सुविधा की कोई जानकारी नहीं दी। रिपोर्ट के अनुसार भले ही इससे सरकारी खजाने को कोई नुकसान नहीं पहुंचा लेकिन जरूरतमंदों को उनके हकों से वंचित रखा गया है।
विजिलेंस ने यह भी आशंका जताई है कि निजी संस्थान को फायदा पहुंचाने की मंशा से जानबूझकर मुफ्त स्कैन की सुविधा के बारे में लोगों को जानकारी नहीं दी गई। इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो पंजाब ने डीआरएमई पंजाब को लिखित पत्र भेजकर दिसंबर 2008 से वर्तमान समय तक तैनात रहे तीन एमएस पर विभागीय कार्रवाई करने की सिफारिश की है। बाबा फरीद विवि के वीसी डॉ. राज बहादुर ने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो की सिफारिश के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
भाई कन्हैया कैंसर रोको सोसायटी के प्रधान गुरप्रीत सिंह चंदबाजा ने इस मामले की जांच और कार्रवाई रिपोर्ट को आरटीआई एक्ट के तहत विजिलेंस विभाग से हासिल किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार बाबा फरीद यूनिवर्सिटी की पहल पर दिसंबर 2008 के दौरान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक निजी संस्थान को सीटी स्कैन मशीन लगाने की इजाजत दी थी। समझौते के तहत संस्थान को जरूरतमंद और गरीब वर्ग से संबंधित 10 प्रतिशत मरीजों के स्कैन मुफ्त करने थे और इसके लिए एमएस की सिफारिश मान्य होनी थी।
विजिलेंस ने शिकायत नंबर 80/2013 की पड़ताल रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि अस्पताल प्रशासन ने गरीबों को मुफ्त सीटी स्कैन सुविधा की कोई जानकारी नहीं दी। रिपोर्ट के अनुसार भले ही इससे सरकारी खजाने को कोई नुकसान नहीं पहुंचा लेकिन जरूरतमंदों को उनके हकों से वंचित रखा गया है।
विजिलेंस ने यह भी आशंका जताई है कि निजी संस्थान को फायदा पहुंचाने की मंशा से जानबूझकर मुफ्त स्कैन की सुविधा के बारे में लोगों को जानकारी नहीं दी गई। इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो पंजाब ने डीआरएमई पंजाब को लिखित पत्र भेजकर दिसंबर 2008 से वर्तमान समय तक तैनात रहे तीन एमएस पर विभागीय कार्रवाई करने की सिफारिश की है। बाबा फरीद विवि के वीसी डॉ. राज बहादुर ने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो की सिफारिश के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।