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रेलवे पावर हाउस में दौड़ रहा घोटाला करंट
Updated Sat, 28 Apr 2018 10:45 PM IST
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रेलवे पावर हाउस में दौड़ रहा घोटाला करंट
क्वार्टर बिजली मुलाजिम के नाम, रह रहा आरपीएफ का सेवानिवृत्त कर्मचारी
रेल अफसरों ने इंजीनियर को दी चार्जशीट, टीए घोटाले में भी लिप्त है आरोपी
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर।
रेलवे इलेक्ट्रिकल के पावर हाउस में घोटाला करंट े दौड़ रहा है। पावर हाउस में अभी टीए घोटाले की -पड़ताल पूरी नहीं हुई है कि क्वार्टर घोटाला उजागर हुआ है। जिस इंजीनियर ने टीए घोटाले को अंजाम दिया था, उसी ने क्वार्टर घोटाला भी किया है। क्वार्टर जिस कर्मी के नाम किया उसे पता तक नहीं, उसमें पिछले दो साल से आरपीएफ का एक सेवानिवृत्त कर्मचारी रह रहा है, जिससे कथित तौर पर किराया वसूला जा रहा है। इस घोटाले की खबर रेल अधिकारियों तक पहुंची तो आरोपी इंजीनियर को चार्जशीट दे दी।
सूत्रों के अनुसार रेलवे का बर्ट रोड पर क्वार्टर नंबर-461 है। अगस्त 2016 को उक्त क्वार्टर खाली हुआ था। पावर हाउस में तैनात तत्कालीन एक इंजीनियर ने उसी समय उक्त क्वार्टर पावर हाउस के कर्मचारी गुरुप्रीत को अलाट कर दिया, जबकि गुरूप्रीत को पता ही नहीं कि उसके नाम पर क्वार्टर अलाट हुआ है। जानकारों का कहना है कि लगभग दो साल तक उक्त क्वार्टर का बिजली बिल भी तैयार नहीं हुआ। कुछ दिन पहले क्वार्टर की बिजली रीडिंग लेने कर्मचारी गए तो ताला लगा मिला। कर्मियों ने पावर हाउस के इंचार्ज दीपक कुमार से पूछा कि बिजली का बिल किसके नाम पर तैयार किया जाए। जब दस्तावेज देखे तो उसमें गुरुप्रीत का नाम सामने आया और जब उससे पूछा गया कि तो उसने कहा कि उसने तो क्वार्टर अलाट नहीं करवाया है। पूछताछ में पता चला कि आरपीएफ का सेवानिवृत्त कर्मी अश्वनी कुमार रह रहा है। मामले में फिलहाल रेल अधिकारियों ने पावर हाउस के तत्कालीन इंजीनियर को चार्जशीट दी है और घोटाले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
ऐसे हुआ खुलासा
सूत्रों के अनुसार क्वार्टर में रह रहे सेवानिवृत्त आरपीएफ कर्मी कुछ दिन पहले तीन हजार रुपये किराया मौजूदा पावर हाउस के इंचार्ज को देने पहुंचा। तब उसने कर्मी से पूछा कि यह किराया किस का है तो उसने कहा क्वार्टर का है, जिसमें वह रह रहा है, उक्त किराया वह पहले भी यहां मौजूद इंजीनियर को देता था। इस मामले की शिकायत इलेक्ट्रिकल के डिवीजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (डीईई) मुनीष कुमार से की। कुमार ने पूरे मामले की जांचकी और क्वार्टर का निरीक्षण किया। उसके बाद रिपोर्ट तैयार कर सीनियर डीईई नीरज गुप्ता को दी। गुप्ता ने उक्त इंजीनियर को चार्जशीट दे दी। क्वार्टर का बिजली बिल भी लगभग 12 हजार पांच सौ रुपये है।
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क्वार्टर बिजली मुलाजिम के नाम, रह रहा आरपीएफ का सेवानिवृत्त कर्मचारी
रेल अफसरों ने इंजीनियर को दी चार्जशीट, टीए घोटाले में भी लिप्त है आरोपी
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर।
रेलवे इलेक्ट्रिकल के पावर हाउस में घोटाला करंट े दौड़ रहा है। पावर हाउस में अभी टीए घोटाले की -पड़ताल पूरी नहीं हुई है कि क्वार्टर घोटाला उजागर हुआ है। जिस इंजीनियर ने टीए घोटाले को अंजाम दिया था, उसी ने क्वार्टर घोटाला भी किया है। क्वार्टर जिस कर्मी के नाम किया उसे पता तक नहीं, उसमें पिछले दो साल से आरपीएफ का एक सेवानिवृत्त कर्मचारी रह रहा है, जिससे कथित तौर पर किराया वसूला जा रहा है। इस घोटाले की खबर रेल अधिकारियों तक पहुंची तो आरोपी इंजीनियर को चार्जशीट दे दी।
सूत्रों के अनुसार रेलवे का बर्ट रोड पर क्वार्टर नंबर-461 है। अगस्त 2016 को उक्त क्वार्टर खाली हुआ था। पावर हाउस में तैनात तत्कालीन एक इंजीनियर ने उसी समय उक्त क्वार्टर पावर हाउस के कर्मचारी गुरुप्रीत को अलाट कर दिया, जबकि गुरूप्रीत को पता ही नहीं कि उसके नाम पर क्वार्टर अलाट हुआ है। जानकारों का कहना है कि लगभग दो साल तक उक्त क्वार्टर का बिजली बिल भी तैयार नहीं हुआ। कुछ दिन पहले क्वार्टर की बिजली रीडिंग लेने कर्मचारी गए तो ताला लगा मिला। कर्मियों ने पावर हाउस के इंचार्ज दीपक कुमार से पूछा कि बिजली का बिल किसके नाम पर तैयार किया जाए। जब दस्तावेज देखे तो उसमें गुरुप्रीत का नाम सामने आया और जब उससे पूछा गया कि तो उसने कहा कि उसने तो क्वार्टर अलाट नहीं करवाया है। पूछताछ में पता चला कि आरपीएफ का सेवानिवृत्त कर्मी अश्वनी कुमार रह रहा है। मामले में फिलहाल रेल अधिकारियों ने पावर हाउस के तत्कालीन इंजीनियर को चार्जशीट दी है और घोटाले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
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ऐसे हुआ खुलासा
सूत्रों के अनुसार क्वार्टर में रह रहे सेवानिवृत्त आरपीएफ कर्मी कुछ दिन पहले तीन हजार रुपये किराया मौजूदा पावर हाउस के इंचार्ज को देने पहुंचा। तब उसने कर्मी से पूछा कि यह किराया किस का है तो उसने कहा क्वार्टर का है, जिसमें वह रह रहा है, उक्त किराया वह पहले भी यहां मौजूद इंजीनियर को देता था। इस मामले की शिकायत इलेक्ट्रिकल के डिवीजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (डीईई) मुनीष कुमार से की। कुमार ने पूरे मामले की जांचकी और क्वार्टर का निरीक्षण किया। उसके बाद रिपोर्ट तैयार कर सीनियर डीईई नीरज गुप्ता को दी। गुप्ता ने उक्त इंजीनियर को चार्जशीट दे दी। क्वार्टर का बिजली बिल भी लगभग 12 हजार पांच सौ रुपये है।
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