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Punjab: पर्यावरण बचाने के लिए बलकार सिंह ने शुरू की स्ट्राबेरी की खेती, केवल तीन एकड़ जमीन से उठाया लाभ
Fri, 02 Jun 2023 12:42 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, कपूरथला (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, कपूरथला (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 02 Jun 2023 12:42 PM IST
सार
2012 में इंटरनेट पर स्ट्रॉबेरी की खेती देखने के बाद बलकार सिंह ने बागवानी विभाग कपूरथला और बागवानी विभाग ने वाई एस परमार हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, सोलन (एच.पी) से संपर्क किया और किसान के लिए स्ट्रॉबेरी के पौधों की व्यवस्था की।
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स्ट्राबेरी की खेती कर रहे बलकार सिंह।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विस्तार
पंजाब के सुल्तानपुर लोधी के गांव सवाल के किसान बलकार सिंह ने बागवानी विभाग के सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन से स्ट्राबेरी और अन्य फलों/सब्जियों की खेती कर अन्य किसानों के लिए फसल विविधिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है।
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केवल तीन एकड़ कृषि योग्य भूमि के मालिक बलकार सिंह अंडर मैट्रिक हैं, लेकिन भूजल और पर्यावरण को बचाने के लिए पारंपरिक फसल चक्कर के अलावा उनकी खेती और अन्य फसलों की मार्केटिंग उन्हें अन्य किसानों से अलग साबित करती है।
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2012 में इंटरनेट पर स्ट्रॉबेरी की खेती देखने के बाद बलकार सिंह ने बागवानी विभाग कपूरथला और बागवानी विभाग ने वाई एस परमार हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, सोलन (एच.पी) से संपर्क किया और किसान के लिए स्ट्रॉबेरी के पौधों की व्यवस्था की। इसके बाद बलकार सिंह ने स्ट्रॉबेरी की कई किस्मों जैसे स्वीट चार्ली, चैंडलर, कैमरोजा, कैपरी और रानिया की खेती शुरू की। उसी वर्ष बलकार सिंह ने क्यारियों में प्लास्टिक मल्चिंग बिछाकर 2 कनाल स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। शुरुआती वर्ष में अच्छी आय होने के कारण विभाग द्वारा उन्हें आने वाले वर्षों में एक एकड़ तक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया और प्रति एकड़ 3.40 लाख का लाभ कमाया।
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उन्होंने कहा कि कपूरथला में बागवानी विभाग के तकनीकी ज्ञान से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की गई थी। बागवानी विभाग की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत किसानों को स्ट्रॉबेरी की खेती, प्लास्टिक मल्चिंग, मधुमक्खी पालन और गाजर धोने की मशीन में आर्थिक सहायता का लाभ दिया गया है। वह 6 एकड़ में लाल (स्थानीय) और सतरंगी गाजर (रिज फायर) की, एक एकड़ में प्लास्टिक मल्चिंग पर खरबूजा (बॉबी), एक-एक एकड़ में प्याज और कद्दू की, तीन एकड़ में टमाटर की और 1 एकड़ में शिमला मिर्च के साथ ककड़ी की खेती भी करते हैं। उनके पास अमरूद का बाग भी है और सभी फसलों से वे हर साल 5 लाख (लगभग) का मुनाफा कमाते हैं।
डीसी कपूरथला कैप्टन करनैल सिंह ने फसली विविधीकरण के लिए काम कर रहे बलकार सिंह और अन्य प्रगतिशील किसानों की सराहना करते हुए कहा कि जिला प्रशासन कपूरथला जिले में फसली विविधीकरण के लिए और अधिक प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि कपूरथला जिले विशेषकर सुल्तानपुर लोधी और कपूरथला तहसील जो आलू, गाजर, टमाटर, मक्का, खरबूजा की खेती के लिए जानी जाती हैं, के किसानों को नवीनतम तकनीक और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे। ऐसे किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित भी किया जाएगा।
बागवानी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सुखदीप सिंह हुंदल और बागवानी विकास अधिकारी मनप्रीत कौर ने बताया कि पिछले वर्ष 2021-22 के दौरान बाग़वानी विभाग के सहयोग से बलकार सिंह ने 50 प्रतिशत सब्सिडी पर कनाल पॉलीहाउस स्थापित किया, जिसमें उन्होंने रंगीन शिमला मिर्च और बीज रहित पौधे लगाए। वह खीरे की खेती करते हैं और अपना पनीरी भी खुद तैयार करते हैं।
किसान ने बागवानी विभाग के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर वेजिटेबल, करतारपुर से सुरक्षित खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया। फल और सब्जियां की खेती के साथ-साथ बलकार सिंह और उनका बेटा 250 ग्राम क्षमता वाले प्लास्टिक के कंटेनरों का उपयोग करके स्ट्रॉबेरी को ग्रेड व पेक करते हैं और कपूरथला, जालंधर और तरनतारन के स्थानीय बाजारों में सीधे बेचते हैं। वह बेरोजगार युवाओं को रोजगार भी प्रदान करते हैं जो उनकी उपज को घर-घर जाकर आसपास के गांवों में बेचते हैं। किसान का यह दृष्टिकोण बेरोजगार युवाओं के लिए आय उत्पन्न करने में मदद करता है। वह अपने अधिकांश कृषि उत्पाद स्वयं बेचते हैं जो बिचौलियों से बचने का एक अच्छा तरीका है।