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चार्ज के लिए सड़क पर सरपंच
अमर उजाला, (जगरांव/लुधियाना)
Updated Mon, 03 Feb 2014 10:00 PM IST
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सात माह पहले चुनाव जीत का सरपंच बनने के बावजूद चार्ज न मिलने से नाराज गांव भमीपुर के सरपंच रिटायर्ड कैप्टन बलौर सिंह सोमवार को ग्रामीणों के साथ कांग्रेस के नेतृत्व में सड़क पर उतर आए।
लोगों ने पहले शहर में रोष मार्च निकाला। फिर बीडीपीओ दफ्तर के आगे पहुंच कर तहसील रोड पर चक्का जाम कर दिया। सरपंच ने भूखहड़ताल पर बैठने से पहले सात माह तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए और अफसरों से गुहार लगाई, लेकिन बात न बनी। सोमवार को सड़क जाम और धरना देने के साथ ही अफसर कैप्टन के पीछे पीछे फिरते दिखाई दिए। धरना स्थल पर पहुंच कर बीडीपीओ अमरजीत सिंह ने कैप्टन को मंगलवार को ही चार्ज देने का आश्वासन दिया।
आरोप है कि गांव भमीपुरा के सरपंच कांग्रेस पार्टी से जुड़े होने के कारण उनको राजनीतिक दबाव के चलते सात माह से सरपंची का चार्ज नहीं दिया गया। सोमवार को प्रदर्शन के दौरान लोगों ने बीडीपीओ के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। बीडीपीओ दफ्तर के बाहर प्रदर्शन से रास्ते में जाम लग गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इससे प्रशासन में अफरा तफरी मच गई।
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यातायात को वैकल्पिक रास्तों से भेजा गया। कैप्टन ने कहा कि उनको जनता ने जिताया, लेकिन प्रशासन ने सात माह से हारे हुए उम्मीदवार जैसा सलूक किया। बीडीपीओ से आश्वासन मिलने के बाद धरना वापस ले लिया गया। इस अवसर पर सतिंदर पाल सिंह, सुखदेव सिंह, मनजिंदर सिंह, हरनेक सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।
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लोगों ने पहले शहर में रोष मार्च निकाला। फिर बीडीपीओ दफ्तर के आगे पहुंच कर तहसील रोड पर चक्का जाम कर दिया। सरपंच ने भूखहड़ताल पर बैठने से पहले सात माह तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए और अफसरों से गुहार लगाई, लेकिन बात न बनी। सोमवार को सड़क जाम और धरना देने के साथ ही अफसर कैप्टन के पीछे पीछे फिरते दिखाई दिए। धरना स्थल पर पहुंच कर बीडीपीओ अमरजीत सिंह ने कैप्टन को मंगलवार को ही चार्ज देने का आश्वासन दिया।
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आरोप है कि गांव भमीपुरा के सरपंच कांग्रेस पार्टी से जुड़े होने के कारण उनको राजनीतिक दबाव के चलते सात माह से सरपंची का चार्ज नहीं दिया गया। सोमवार को प्रदर्शन के दौरान लोगों ने बीडीपीओ के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। बीडीपीओ दफ्तर के बाहर प्रदर्शन से रास्ते में जाम लग गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इससे प्रशासन में अफरा तफरी मच गई।
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यातायात को वैकल्पिक रास्तों से भेजा गया। कैप्टन ने कहा कि उनको जनता ने जिताया, लेकिन प्रशासन ने सात माह से हारे हुए उम्मीदवार जैसा सलूक किया। बीडीपीओ से आश्वासन मिलने के बाद धरना वापस ले लिया गया। इस अवसर पर सतिंदर पाल सिंह, सुखदेव सिंह, मनजिंदर सिंह, हरनेक सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।