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Sidhu Moosewala: सिद्धू मूसेवाला हत्या के सात आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, दो साल से जेल में हैं आरोपी
Sun, 03 Aug 2025 11:08 AM IST
अंकेश ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Sun, 03 Aug 2025 11:08 AM IST
सार
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड मामले में जेल में बंद सात आरोपियों की तरफ से जमानत याचिका लगाई गई थी। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी सातों आरोपियों की जमानत की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
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Sidhu moosewala
- फोटो : फाइल
विस्तार
बहुचर्चित सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सातों आरोपियों की जमानत की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और चश्मदीद गवाहों की गवाही पूरी होने तक जमानत पर विचार नहीं किया जा सकता।
हिरासत में मौजूद 7 आरोपियों ने विभिन्न आधार बनाते हुए हाईकोर्ट से जमानत की मांग की थी। प्रभदीप सिंह उर्फ पब्बी, जगतार सिंह, मनप्रीत सिंह उर्फ भाऊ, नसीब दीन, राजिंदर उर्फ जोकर, पवन कुमार बिश्नोई और सराज की याचिकाएं एक साथ सुनवाई के लिए पहुंची थीं। सभी पर हत्या सहित अन्य धाराओं में पुलिस ने मामला दर्ज किया था। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि वे दो साल से हिरासत में हैं और ट्रायल की गति बेहद धीमी है।
पंजाब सरकार ने विरोध करते हुए कहा कि मामले में कुल 180 अभियोजन गवाह हैं जिनमें से तीन चश्मदीद हैं। अब तक सिर्फ एक गवाह की आंशिक गवाही ही हुई है। बाकी दो की गवाही होना अभी बाकी है। हालांकि याची पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि दो चश्मदीदों की गवाही हो चुकी है और केवल एक की बाकी है। कोर्ट ने माना कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए गवाहों की सुरक्षा और निष्पक्षता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी चश्मदीद गवाहों की गवाही पूरी नहीं होती तब तक नियमित जमानत याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता। यह मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। आरोपियों के बाहर आने पर चश्मदीद असुरक्षित महसूस करेंगे, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
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हिरासत में मौजूद 7 आरोपियों ने विभिन्न आधार बनाते हुए हाईकोर्ट से जमानत की मांग की थी। प्रभदीप सिंह उर्फ पब्बी, जगतार सिंह, मनप्रीत सिंह उर्फ भाऊ, नसीब दीन, राजिंदर उर्फ जोकर, पवन कुमार बिश्नोई और सराज की याचिकाएं एक साथ सुनवाई के लिए पहुंची थीं। सभी पर हत्या सहित अन्य धाराओं में पुलिस ने मामला दर्ज किया था। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि वे दो साल से हिरासत में हैं और ट्रायल की गति बेहद धीमी है।
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पंजाब सरकार ने विरोध करते हुए कहा कि मामले में कुल 180 अभियोजन गवाह हैं जिनमें से तीन चश्मदीद हैं। अब तक सिर्फ एक गवाह की आंशिक गवाही ही हुई है। बाकी दो की गवाही होना अभी बाकी है। हालांकि याची पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि दो चश्मदीदों की गवाही हो चुकी है और केवल एक की बाकी है। कोर्ट ने माना कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए गवाहों की सुरक्षा और निष्पक्षता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी चश्मदीद गवाहों की गवाही पूरी नहीं होती तब तक नियमित जमानत याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता। यह मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। आरोपियों के बाहर आने पर चश्मदीद असुरक्षित महसूस करेंगे, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
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