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कैट का बड़ा फैसला: सेवानिवृत्त डाक कर्मचारी को मिलेगा वित्तीय लाभ, कहा-डाकिया बनने को पदोन्नति नहीं मान सकते
Sat, 10 Oct 2026 12:32 PM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Sat, 10 Oct 2026 12:32 PM IST
सार
न्यायमूर्ति रमेश सिंह ठाकुर और सदस्य (प्रशासनिक) अंजलि भावरा की पीठ ने सात अक्तूबर 2026 को जसविंदर सिंह की याचिका मंजूर करते हुए 26 दिसंबर 2024 और 10 मार्च 2025 के विभागीय आदेश रद्द कर दिए।
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CAT
- फोटो : फाइल
विस्तार
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की चंडीगढ़ पीठ ने सेवानिवृत्त डाक कर्मचारी जसविंदर सिंह को बड़ी राहत दी है। अधिकरण ने डाक विभाग के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिये डाकिया बनने को उनकी पहली वित्तीय उन्नति माना गया था। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षा के जरिये ऊंचे पद पर चयन को पदोन्नति मानकर वित्तीय उन्नति की गणना नहीं की जा सकती।
न्यायमूर्ति रमेश सिंह ठाकुर और सदस्य (प्रशासनिक) अंजलि भावरा की पीठ ने सात अक्तूबर 2026 को जसविंदर सिंह की याचिका मंजूर करते हुए 26 दिसंबर 2024 और 10 मार्च 2025 के विभागीय आदेश रद्द कर दिए। विभाग को निर्देश दिया गया कि जसविंदर सिंह की वित्तीय उन्नति की दोबारा गणना की जाए और 1 सितंबर 2008 से पहला वित्तीय उन्नयन दिया जाए। इसके साथ ही वेतन और सेवानिवृत्ति लाभों का दोबारा निर्धारण भी किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
1982 में डाक विभाग में हुई थी नियुक्ति
मामले के अनुसार जसविंदर सिंह ने एक दिसंबर 1982 को डाक विभाग में ईडी बीपीएम के तौर पर सेवा शुरू की थी। वर्ष 1991 में वह सेना डाक सेवा में प्रतिनियुक्ति पर गए और बाद में उन्हें मूल विभाग में ग्रुप-डी पद पर तकनीकी नियुक्ति मिली। इसके बाद उन्होंने सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा पास कर एक जून 1996 से डाकिया पद संभाला और जालंधर मंडल में तैनात हुए। 30 जून 2023 को वह मेल ओवरसियर के पद से सेवानिवृत्त हुए।
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विवाद संशोधित सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना (एमएसीपी) के तहत वित्तीय उन्नयन को लेकर था। योजना के तहत 10, 20 और 30 साल की नियमित सेवा पर वित्तीय उन्नयन का प्रावधान है। विभाग ने जसविंदर सिंह के डाकिया बनने को पहली वित्तीय उन्नति मान लिया था और उन्हें एक सितंबर 2008 से दूसरी तथा एक सितंबर 2018 से तीसरी एमएसीपी दी थी।
जसविंदर सिंह का कहना था कि उनके साथ उसी आदेश से नियुक्त कई अन्य डाकियों को वित्तीय लाभ दिया गया, लेकिन उन्हें इससे वंचित रखा गया। अधिकरण ने पूर्व न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए माना कि सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिये चयन कैरियर में आगे बढ़ने की प्रक्रिया है, इसे पदोन्नति नहीं माना जा सकता।
अधिकरण ने इसी आधार पर विभाग को उनकी पहली एमएसीपी 1 सितंबर 2008 से देने और उससे जुड़े सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया है।
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न्यायमूर्ति रमेश सिंह ठाकुर और सदस्य (प्रशासनिक) अंजलि भावरा की पीठ ने सात अक्तूबर 2026 को जसविंदर सिंह की याचिका मंजूर करते हुए 26 दिसंबर 2024 और 10 मार्च 2025 के विभागीय आदेश रद्द कर दिए। विभाग को निर्देश दिया गया कि जसविंदर सिंह की वित्तीय उन्नति की दोबारा गणना की जाए और 1 सितंबर 2008 से पहला वित्तीय उन्नयन दिया जाए। इसके साथ ही वेतन और सेवानिवृत्ति लाभों का दोबारा निर्धारण भी किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
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1982 में डाक विभाग में हुई थी नियुक्ति
मामले के अनुसार जसविंदर सिंह ने एक दिसंबर 1982 को डाक विभाग में ईडी बीपीएम के तौर पर सेवा शुरू की थी। वर्ष 1991 में वह सेना डाक सेवा में प्रतिनियुक्ति पर गए और बाद में उन्हें मूल विभाग में ग्रुप-डी पद पर तकनीकी नियुक्ति मिली। इसके बाद उन्होंने सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा पास कर एक जून 1996 से डाकिया पद संभाला और जालंधर मंडल में तैनात हुए। 30 जून 2023 को वह मेल ओवरसियर के पद से सेवानिवृत्त हुए।
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विवाद संशोधित सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना (एमएसीपी) के तहत वित्तीय उन्नयन को लेकर था। योजना के तहत 10, 20 और 30 साल की नियमित सेवा पर वित्तीय उन्नयन का प्रावधान है। विभाग ने जसविंदर सिंह के डाकिया बनने को पहली वित्तीय उन्नति मान लिया था और उन्हें एक सितंबर 2008 से दूसरी तथा एक सितंबर 2018 से तीसरी एमएसीपी दी थी।
जसविंदर सिंह का कहना था कि उनके साथ उसी आदेश से नियुक्त कई अन्य डाकियों को वित्तीय लाभ दिया गया, लेकिन उन्हें इससे वंचित रखा गया। अधिकरण ने पूर्व न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए माना कि सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिये चयन कैरियर में आगे बढ़ने की प्रक्रिया है, इसे पदोन्नति नहीं माना जा सकता।
अधिकरण ने इसी आधार पर विभाग को उनकी पहली एमएसीपी 1 सितंबर 2008 से देने और उससे जुड़े सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया है।