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यारियां-2 गाने में कृपाण विवाद: हाईकोर्ट ने रद्द किया केस, धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप खारिज
Wed, 09 Sep 2026 09:30 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Wed, 09 Sep 2026 09:30 PM IST
सार
अदालत ने स्पष्ट किया कि गाने में गैर-अमृतधारी व्यक्ति को कृपाण पहने दिखाना अपने आप में सिख धर्म का अपमान नहीं माना जा सकता।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फिल्म यारियां-2 के एक गाने में गैर-अमृतधारी अभिनेता को कृपाण पहने दिखाने के मामले में निर्देशक, सह-निर्देशक और निर्माता को राहत दी है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी पूरी कार्रवाई रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि किसी धार्मिक प्रतीक का कलात्मक चित्रण मात्र धार्मिक भावनाएं आहत करने का अपराध नहीं बनता।
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भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए के तहत अपराध तभी बनता है, जब धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण मंशा से कृत्य किया गया हो। जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि गाने में गैर-अमृतधारी व्यक्ति को कृपाण पहने दिखाना अपने आप में सिख धर्म का अपमान नहीं माना जा सकता।
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शिकायतकर्ता हरप्रीत सिंह ने आरोप लगाया था कि गैर-अमृतधारी अभिनेता निजान जाफरी को कृपाण पहने दिखाया गया। उन्होंने कहा कि सिख परंपरा के अनुसार कृपाण अमृतधारी सिखों के पांच ककारों में शामिल है। इस शिकायत के आधार पर निर्देशक राधिका राव, सह-निर्देशक विनय सप्रू और निर्माता भूषण कुमार के खिलाफ धारा 295-ए के तहत मामला दर्ज हुआ था।
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एफआईआर और अदालत का तर्क
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि इसी गाने को लेकर अमृतसर में भी एक एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे निर्णायक नहीं माना क्योंकि वर्तमान एफआईआर 30 अगस्त 2023 को दर्ज हुई जबकि अमृतसर वाली 31 अगस्त 2023 को। हाईकोर्ट ने जोर दिया कि अभियोजन को दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य साबित करना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि एक व्यक्ति की शिकायत पूरे सिख समुदाय की सामूहिक धार्मिक भावना का प्रमाण नहीं हो सकती।