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पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट: यूपी से गरीबी मिटाने आए थे पंजाब, मगर उजड़ गए पांच परिवार, जख्म ऐसे जो कभी नहीं भरेंगे
Sun, 01 Jun 2025 09:18 AM IST
अंकेश ठाकुर
जगदीश जोशी, मुक्तसर
जगदीश जोशी, मुक्तसर
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Sun, 01 Jun 2025 09:18 AM IST
सार
मुक्तसर में दो दिन पहले पटाखा फैक्टरी में ब्लास्ट कांड में पांच लोगों की मौत हुई थी। मरने वाले सभी उत्तर प्रदेश के थे। फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर यूपी से पंजाब अपने अच्छे भविष्य से सपने लेकर आए थे।
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मुक्तसर में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पंजाब के मुक्तसर के लंबी विधानसभा हलके के गांव सिंघेवाला में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता तरसेम सिंह की पटाखा फैक्टरी में ब्लास्ट में पांच मजदूरों की घटना ने सभी को झकझोर दिया है। यह घटना यूपी से मजदूरी करने आने वाले युवाओं के परिवारों के दिलों पर ऐसे घाव छोड़ गई है, जो वर्षों तक नहीं भर पाएंगे।
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शनिवार को अपने पांचों बच्चों के शवों को लेने के लिए यूपी के अलीगढ़ जिले से आए परिजन गिद्दड़बाहा सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के समय मोर्चरी के बाहर विलाप करते रहे। परिजन लेबर ठेकेदार तथा फैक्ट्री मालिक को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे। वहीं एंबुलेंस का खर्चा न उठा पाने के कारण मृतकों के परिजन दिन भर बिलखते रहे और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई।
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सिविल अस्पताल गिद्दड़बाहा में मौजूद मृतक शेलेंद्र सिंह के भाई पुष्पिंदर, मृतक राहुल के पिता कृष्ण, मृतक अखिलेश के जीजा व मृतक नीरज व दानवीर की माताओं व अन्य परिजनों ने बताया कि ठेकेदार राजकुमार भी अलीगढ़ का ही रहने वाला है। कुछ माह पहले उसने बताया कि पंजाब में एक फैक्टरी खुली है। वहां मजदूरों को अच्छा मेहनताना मिलता है। अगर उनके परिवार के युवा फैक्टरी में काम करेंगे तो उनकी जिंदगी बन जाएगी।
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अपने बच्चों का उज्ज्वल भविष्य देखते हुए उन्होंने अपने जिगर के टुकड़ों को ठेकेदार के कहने पर पंजाब भेज दिया। उन्हें क्या पता था कि यह हादसा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि ठेकेदार के कहने पर उनके परिवार के कई सदस्य दो माह पहले तो कई एक माह पहले चले गए, जबकि ठेकेदार राजकुमार गत 20 मई को अलीगढ़ जाकर करीब 15 से 20 लोगों को पंजाब लेकर आया था। उन्हें तो इस बात की भनक नहीं थी कि उनके बच्चे पटाखा फैक्टरी में कार्य करते हैं। उनकी मौत के लिए ठेकेदार व फैक्टरी मालिक जिम्मेदार हैं, इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
परिजन बोले-शवों को यूपी ले जाने में हम असमर्थ
परिजनों का कहना है कि वे अपने बच्चों शवों को यूपी ले जा पाने में वे लोग असमर्थ हैं। वे अलीगढ़ से गिद्दड़बाहा तक का खर्चा उठाकर वे बड़ी मुश्किल से आए हैं। शव ले जाने के लिए एंबुलेंस का खर्चा वे लोग वहन नहीं कर सकते। उन्होंने प्रशासन व सरकार से मृतकों के शवों को यूपी पहुंचवाने में मदद की गुहार लगाई। जिस पर देर शाम प्रशासन शवों को यूपी पहुंचवाने को आगे आया। बताया जा रहा है कि पहले सिविल सर्जन डॉ. चंद्र शेखर ने समाजसेवी संस्थाओं के स्टेट को-आर्डिनेटर डाॅ. नरेश परुथी से एनजीओ की एंबुलेंस के जरिये शवों को अलीगढ़ तक पहुंचवाने को कहा था। उन्होंने यह कहकर असमर्थता जाहिर कर दी कि उनकी एनजीओ की एंबुलेंस सिर्फ सौ से दो सौ किलोमीटर के दायरे तक जा सकती है। अलीगढ़ करीब पांच सौ किलोमीटर के दायरे में है। वहीं, एडीसी गुरप्रीत सिंह थिंद ने बताया कि एसडीएम की ड्यूटी लगा दी है। वे शवों को यूपी पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम करवा रहे हैं।