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मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना को चुनौती: वोटर आईडी अनिवार्य क्यों, HC ने पंजाब सरकार से मांगा जवाब
Tue, 29 Sep 2026 08:48 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 29 Sep 2026 08:48 AM IST
सार
याचिकाकर्ता का कहना है कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़ी वैधानिक देनदारियों के मामलों में अदालत के समक्ष वित्तीय कठिनाइयों का हवाला देती रही है। इसके बावजूद सरकार विवेकाधीन सब्सिडी और मुफ्त लाभ वाली योजनाओं पर लगातार बड़ी राशि खर्च कर रही है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए पंजाब का मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य किए जाने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है।
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि योजना का लाभ देने के लिए मतदाता पहचान पत्र को अनिवार्य बनाने के पीछे आखिर उद्देश्य क्या है। मामले में अब पांच अक्तूबर को सुनवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरबख्श चैरिटेबल सोसायटी की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सवाल उठाया। याचिका में अप्रैल में शुरू की गई मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना को चुनौती दी गई है। योजना के तहत सामान्य वर्ग की पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की पात्र महिलाओं को 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है।
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जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पंजाब का मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य करना इसके उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मतदाता पहचान पत्र पहचान स्थापित करने के लिए स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेज में से एक हो सकता है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने से यह आशंका पैदा होती है कि योजना का इस्तेमाल लाभार्थियों के वोट हासिल करने के लिए किया जा रहा है। यह याचिकाकर्ता का आरोप है और हाईकोर्ट ने अभी इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने याचिकाकर्ता के दावों का विरोध किया। जनहित याचिका में योजना के वित्तीय पहलू को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़ी वैधानिक देनदारियों के मामलों में अदालत के समक्ष वित्तीय कठिनाइयों का हवाला देती रही है। इसके बावजूद सरकार विवेकाधीन सब्सिडी और मुफ्त लाभ वाली योजनाओं पर लगातार बड़ी राशि खर्च कर रही है। याचिकाकर्ता ने इसे सार्वजनिक धन की प्राथमिकताओं, वित्तीय जवाबदेही और सुशासन से जुड़ा मुद्दा बताया है।
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हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि योजना का लाभ देने के लिए मतदाता पहचान पत्र को अनिवार्य बनाने के पीछे आखिर उद्देश्य क्या है। मामले में अब पांच अक्तूबर को सुनवाई होगी।
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मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरबख्श चैरिटेबल सोसायटी की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सवाल उठाया। याचिका में अप्रैल में शुरू की गई मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना को चुनौती दी गई है। योजना के तहत सामान्य वर्ग की पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की पात्र महिलाओं को 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है।
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जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पंजाब का मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य करना इसके उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मतदाता पहचान पत्र पहचान स्थापित करने के लिए स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेज में से एक हो सकता है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने से यह आशंका पैदा होती है कि योजना का इस्तेमाल लाभार्थियों के वोट हासिल करने के लिए किया जा रहा है। यह याचिकाकर्ता का आरोप है और हाईकोर्ट ने अभी इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने याचिकाकर्ता के दावों का विरोध किया। जनहित याचिका में योजना के वित्तीय पहलू को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़ी वैधानिक देनदारियों के मामलों में अदालत के समक्ष वित्तीय कठिनाइयों का हवाला देती रही है। इसके बावजूद सरकार विवेकाधीन सब्सिडी और मुफ्त लाभ वाली योजनाओं पर लगातार बड़ी राशि खर्च कर रही है। याचिकाकर्ता ने इसे सार्वजनिक धन की प्राथमिकताओं, वित्तीय जवाबदेही और सुशासन से जुड़ा मुद्दा बताया है।