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बटाला में बाबे के विवाह पर विशाल भव्य नगर कीर्तन निकाला
Updated Mon, 28 Aug 2017 09:44 PM IST
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बाबे के विवाह पर नगर कीर्तन निकाला, बरसे फूल
बटाला।
पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी औैर बीबी सुलक्खनी जी का विवाह पर्व बटाला में सोमवार को पूरे हर्षोल्लास से मनाया गया। सुबह श्री गुरु ग्रंथ साहिब को पालकी साहिब में सुशोभित करके पंज प्यारों की अगुवाई में भव्य नगर कीर्तन का आयोजन किया गया। बारात के रूप में निकाले गए नगर कीर्तन में स्थानीय क्षेत्र के लोगों के अलावा सुल्तानपुर लोधी से बारात के रूप में पहुंची संगत भी शामिल हुई।
नगर कीर्तन गुरुद्वारा डेरा साहिब से शुरू हुआ। नगर कीर्तन की शुरूआत करने के लिए राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्कि क्षेत्र के वरिष्ठ लोग पहुंचे और महाराज की हजूरी में नतमस्तक हुए। नगर कीर्तन की अगुवाई कर रहे पंज प्यारों को रास्ते में विभिन्न संगठनों ने सिरोपा भेंट करके सम्मानित किया। इस धार्मिक समारोह में पालकी साहिब पर ड्रोन से फूलों की बारिश की गई। पालकी साहिब के आगे-आगे गतका पार्टी युद्ध कला का प्रदर्शन कर रही थी।
संगत श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी के आगेे नंगे पांवों झाडू से सफाई कर रही थी। नगर कीर्तन के दौरान जगह-जगह लंगर और ठंडे मीठे जल के स्टाल लगे थे। बाबे के विवाह पर्व को लेकर बटाला के सभी गुरुद्वारों को सजाया गया था। नगर कीर्तन में ट्रालियों पर सवार महिलाओं के कीर्तन जत्थे गुरू की बाणी का गुनगान करने में मस्त थे। बाबेे के विवाह को लेकर सोमवार बटाला शहर खचाखच भरा हुआ था। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सुबह ही बटाला पहुंच गए थे। दोपहर बाद गुरुद्वारा कंध साहिब में तिल रखने के लिए भी जगह नही थी। सारा दिन बटाला में नगर कीर्तन के दौरान आतिशबाजी चलती रही। सड़कों के किनारे पर रागी, टाढ़ी और कविशर गुरु नानक जी के जीवन के बारे में लोगों को जानकारी दे रहे थे। वहीं विवाह पर्व को लेकर पुलिस और सिविल प्रशासन के प्रबंध भी पुख्ता थे। नगर कीर्तन गुरुद्वारा डेरा साहिब से शुरू होकर पूरे शहर से गुजरते हुए शाम को गुरुद्वारा डेरा साहिब में ही समाप्त हो गया। इस मौके पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रंबंधक कमेटी के सदस्य और विवाह पर्व के मुख्य प्रबंधक जत्थेदार गुरिंदरपाल सिंह गोरा ने समूह संगत को सहयोग के लिए धन्यवाद किया।
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बटाला।
पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी औैर बीबी सुलक्खनी जी का विवाह पर्व बटाला में सोमवार को पूरे हर्षोल्लास से मनाया गया। सुबह श्री गुरु ग्रंथ साहिब को पालकी साहिब में सुशोभित करके पंज प्यारों की अगुवाई में भव्य नगर कीर्तन का आयोजन किया गया। बारात के रूप में निकाले गए नगर कीर्तन में स्थानीय क्षेत्र के लोगों के अलावा सुल्तानपुर लोधी से बारात के रूप में पहुंची संगत भी शामिल हुई।
नगर कीर्तन गुरुद्वारा डेरा साहिब से शुरू हुआ। नगर कीर्तन की शुरूआत करने के लिए राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्कि क्षेत्र के वरिष्ठ लोग पहुंचे और महाराज की हजूरी में नतमस्तक हुए। नगर कीर्तन की अगुवाई कर रहे पंज प्यारों को रास्ते में विभिन्न संगठनों ने सिरोपा भेंट करके सम्मानित किया। इस धार्मिक समारोह में पालकी साहिब पर ड्रोन से फूलों की बारिश की गई। पालकी साहिब के आगे-आगे गतका पार्टी युद्ध कला का प्रदर्शन कर रही थी।
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संगत श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी के आगेे नंगे पांवों झाडू से सफाई कर रही थी। नगर कीर्तन के दौरान जगह-जगह लंगर और ठंडे मीठे जल के स्टाल लगे थे। बाबे के विवाह पर्व को लेकर बटाला के सभी गुरुद्वारों को सजाया गया था। नगर कीर्तन में ट्रालियों पर सवार महिलाओं के कीर्तन जत्थे गुरू की बाणी का गुनगान करने में मस्त थे। बाबेे के विवाह को लेकर सोमवार बटाला शहर खचाखच भरा हुआ था। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सुबह ही बटाला पहुंच गए थे। दोपहर बाद गुरुद्वारा कंध साहिब में तिल रखने के लिए भी जगह नही थी। सारा दिन बटाला में नगर कीर्तन के दौरान आतिशबाजी चलती रही। सड़कों के किनारे पर रागी, टाढ़ी और कविशर गुरु नानक जी के जीवन के बारे में लोगों को जानकारी दे रहे थे। वहीं विवाह पर्व को लेकर पुलिस और सिविल प्रशासन के प्रबंध भी पुख्ता थे। नगर कीर्तन गुरुद्वारा डेरा साहिब से शुरू होकर पूरे शहर से गुजरते हुए शाम को गुरुद्वारा डेरा साहिब में ही समाप्त हो गया। इस मौके पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रंबंधक कमेटी के सदस्य और विवाह पर्व के मुख्य प्रबंधक जत्थेदार गुरिंदरपाल सिंह गोरा ने समूह संगत को सहयोग के लिए धन्यवाद किया।
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